Post Tagged with: "भ्रष्टाचार"

अजीज बर्नी सुनो , देश का मुसलमान क्या कह रहा है ?

अजीज बर्नी सुनो , देश का मुसलमान क्या कह रहा है ?

17 जनोक्ति डेस्क / 2011/01/10 12:07 am

सहारा उर्दू अखबार के संपादक ‘अजीज बर्नी’ अपनी लेखनी को लेकर हमेशा विवादों में रहे हैं | अक्सर उनकी लेखनी में भारतद्रोह की बू नज़र आती है | लेकिन इस

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ABVP का आंदोलन

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ABVP का आंदोलन

0 जनोक्ति डेस्क / 2011/01/07 6:22 pm

भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेवार त्रिगुट मनमोहन, सोनिया व राहुल के खिलाफ अभाविप का देशव्यापी जनजागरण अभियान हाल ही में बंगलूर में सम्पन्न अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 56वें राष्ट्रीय अधिवेशन

अर्थिक आतंकवाद है भ्रष्टाचार

अर्थिक आतंकवाद है भ्रष्टाचार

0 रमेश भट्ट / 2010/12/04 6:54 pm

क्या भ्रष्टाचार एक तरह का अर्थिक आतंकवाद नही है? ऐसा आतंकवाद जो देश की तरक्की में सबसे बड़ा बाधक है। जिसे देश में गरीबी का यह आलम है कि 77

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

0 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/11/29 8:07 pm

आज हमारे लिये सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है कि देश या समाज के लिये न सही, कम से कम अपने आपके और अपनी आने वाली पीढियों के सुखद एवं सुरक्षित

हकीम की दुकान पर राहुल-लालू-पासवान

हकीम की दुकान पर राहुल-लालू-पासवान

0 विजय कुमार / 2010/11/25 5:29 pm

हकीम लुकमान ने दुकान खोली, तो आज हर दिन की अपेक्षा अधिक रोगी दिखाई दिये। इतना ही नहीं, कई अति विशिष्ट जन (वी.आई.पी) भी उनकी प्रतीक्षा में था। हकीम साहब

एकोअहम द्वितीयोनास्ति

एकोअहम द्वितीयोनास्ति

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/19 7:58 pm

बिहार की राजनीति और चुनाव की जांच-पड़ताल कर रहे हैं संजय शर्मा बदलाव की इच्छा जब जब बलवती हुई है, बिहार के चुनाव का आधार जातिगत नहीं रहा . 1977

आपने पुलिस के लिये क्या किया है?

आपने पुलिस के लिये क्या किया है?

3 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/11/10 9:00 pm

मैं जहाँ कहीं भी लोगों के बीच जाता हूँ और भ्रष्टाचार, अत्याचार या किसी भी प्रकार की नाइंसाफी की बात करता हूँ, तो सबसे पहले सभी का एक ही सवाल

झारखंड में ट्रांस्फर -पोस्टींग का खेल

झारखंड में ट्रांस्फर -पोस्टींग का खेल

0 त्रिपुरारी कुमार / 2010/11/10 6:36 pm

झारखंड में जब -जब नई सरकार बनीं तब-तब अधिकारियों के ट्रांस्फर -पोस्टींग का खेल चरम पर रहा। यहां के हुक्मरानों ने अधिकारियों को अपने मन मर्जी से ही चलाया। उनके

दीपावली, आर्य चाणक्य और वर्तमान राजनेता

दीपावली, आर्य चाणक्य और वर्तमान राजनेता

2 सुमंत विद्वांस / 2010/11/07 2:35 pm

दीपावली का उल्लेख हो और दीपों की बात न हो, ये संभव नहीं है। अमावस की रात में आने वाली दीपावली को ये छोटे-छोटे दीप ही रोशन करते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं कि जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अँधेरे को दूर कर देता है, उसी तरह हमारा एक छोटा प्रयास भी एक दिन कोई बड़ा परिवर्तन ला सकता है। बस! मन में उत्साह और अपने संकल्प की पूर्ति के लिये लगन होनी चाहिये। दीपावली के इस अवसर पर दीपों की बात निकली, तो मुझे चाणक्य के जीवन का एक प्रसंग आ रहा है।

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

1 शिरीष खरे / 2010/11/04 5:56 pm

सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.