अजीज बर्नी सुनो , देश का मुसलमान क्या कह रहा है ?
17सहारा उर्दू अखबार के संपादक ‘अजीज बर्नी’ अपनी लेखनी को लेकर हमेशा विवादों में रहे हैं | अक्सर उनकी लेखनी में भारतद्रोह की बू नज़र आती है | लेकिन इस
दिल्ली विश्वविद्यालय में अभाविप के कार्यकर्ताओं व छात्रों ने रैली निकलकर की जनसभा अवनीश कुमार सिंह भ्रष्टाचार के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् द्वारा आयोजित देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में पूरे देश
जब तक है काजल की कोठरी तब तक है दर्पण का डर, और आईना कभी झूठ नहीं बोलता। कहते भी है कि जिसने अपने आपको जान लिया अब उसे जानने
जनाब आजकल की फिजा कुछ ऐसे ही है ! अन्ना हजारे जी का ये शब्द ” जनता राजा है और सरकार जनता की सेवक ” मेरे लिए एक झंझावत से
सहारा उर्दू अखबार के संपादक ‘अजीज बर्नी’ अपनी लेखनी को लेकर हमेशा विवादों में रहे हैं | अक्सर उनकी लेखनी में भारतद्रोह की बू नज़र आती है | लेकिन इस
भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेवार त्रिगुट मनमोहन, सोनिया व राहुल के खिलाफ अभाविप का देशव्यापी जनजागरण अभियान हाल ही में बंगलूर में सम्पन्न अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 56वें राष्ट्रीय अधिवेशन
क्या भ्रष्टाचार एक तरह का अर्थिक आतंकवाद नही है? ऐसा आतंकवाद जो देश की तरक्की में सबसे बड़ा बाधक है। जिसे देश में गरीबी का यह आलम है कि 77
आज हमारे लिये सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है कि देश या समाज के लिये न सही, कम से कम अपने आपके और अपनी आने वाली पीढियों के सुखद एवं सुरक्षित
हकीम लुकमान ने दुकान खोली, तो आज हर दिन की अपेक्षा अधिक रोगी दिखाई दिये। इतना ही नहीं, कई अति विशिष्ट जन (वी.आई.पी) भी उनकी प्रतीक्षा में था। हकीम साहब
बिहार की राजनीति और चुनाव की जांच-पड़ताल कर रहे हैं संजय शर्मा बदलाव की इच्छा जब जब बलवती हुई है, बिहार के चुनाव का आधार जातिगत नहीं रहा . 1977
मैं जहाँ कहीं भी लोगों के बीच जाता हूँ और भ्रष्टाचार, अत्याचार या किसी भी प्रकार की नाइंसाफी की बात करता हूँ, तो सबसे पहले सभी का एक ही सवाल
झारखंड में जब -जब नई सरकार बनीं तब-तब अधिकारियों के ट्रांस्फर -पोस्टींग का खेल चरम पर रहा। यहां के हुक्मरानों ने अधिकारियों को अपने मन मर्जी से ही चलाया। उनके
दीपावली का उल्लेख हो और दीपों की बात न हो, ये संभव नहीं है। अमावस की रात में आने वाली दीपावली को ये छोटे-छोटे दीप ही रोशन करते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं कि जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अँधेरे को दूर कर देता है, उसी तरह हमारा एक छोटा प्रयास भी एक दिन कोई बड़ा परिवर्तन ला सकता है। बस! मन में उत्साह और अपने संकल्प की पूर्ति के लिये लगन होनी चाहिये। दीपावली के इस अवसर पर दीपों की बात निकली, तो मुझे चाणक्य के जीवन का एक प्रसंग आ रहा है।
सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.