खुले आम सजता..देह का बाज़ार……
3शाम हुई सज गए……… कोठों के बाज़ार, मन का गाहक न मिला बिका बदन सौ बार। ये शेर मैंने एक बार किसी कवि सम्मलेन में सुना था,जिसमे मुझे कई नामचीन
समस्त देशवासियों , कुछ जगहों पर मुझे लेकर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि असदर अली ने संपादक अजीज बर्नी से हाथ मिला लिया है या बर्नी के किसी
असदर अली के सवालों पर गोल-मोल जवाब अजीज बर्नी की किताब “आरएसएस की साजिश 26 /11″ पर पत्रकार सैयद असदर अली के लेख ‘जनोक्ति’ के साथ -साथ कई सारे ब्लॉग
यह स्थापित सत्य है कि भारत में इस्लामी आतंकवादी हमलों का जनक मूलत: पाकिस्तान है। अपने इस खूनी एजेंडे को मूर्त रूप देने के लिए स्वाभाविक रूप से उसे स्थानीय
शाम हुई सज गए……… कोठों के बाज़ार, मन का गाहक न मिला बिका बदन सौ बार। ये शेर मैंने एक बार किसी कवि सम्मलेन में सुना था,जिसमे मुझे कई नामचीन
जनाब मुख्यमंत्री महोदय, आप के वादों पर पिछले चुनाव में मेरे परिवार से आप को 9 वोट दिए गये,इस उम्मीद पर कि मेरा नहीं तो मेरे गाँव का विकास होगा |
बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और जनता दल (युनाइटेड) के बीच विकास कार्यो का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई
आज से लगभग 4 साल पहले देश भर में रोजगार यात्राऐं निकाली जा रही थी। गीत गाया जा रहा था। हमारे लिए काम नही, हमें काम चाहिए। इसी समस्या को
उपसंहार जब किसी देश का समाज आर्थिक और भौतिक ही नहीं नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध हो, जब किसी देश के युवा मस्तिष्क से प्रतिभाशाली, शरीर से बलिष्ठ
63 साल बाद भी तिरंगा शान से लाल किले कि प्राचीर पर लहर रहा है.तिरंगे के लहरने का कारण वादियों में चलने वाली हवा है न कि हमारा जोश.वो निरंतर
यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी
(ऐसे 21 सुधार जो भारतवर्ष को फिर से विश्व गुरु और सोने की चिड़ियाँ बना सकते हैं।) मेरी छोटी सी पृष्ठभूमि : मैं मीणा जाति और आदिवासी वर्ग का राजस्थान
पश्चकथन 1996 से मैंने देश की समस्याओं के समाधान के बारे में लिखना शुरु किया. मैं ‘ऐसा होना चाहिये’, ‘वैसा होना चाहिये’ की शैली में लिख रहा था. तब मैं
अवनीश सिंह जैसे-जैसे राष्ट्रमंडल खेलों की घडियां नजदीक आती जा रही हैं, वैसे-वैसे खेल से जुडी परियोजनाओं के आयोजकों की परेशानी बढती जा रही हैं। अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रमंडल