लोकमुद्दों के बिल में आरक्षण की राजनीति
142 वर्षीय प्रौढ़ लोकपाल अब सख्त लोकपाल बनने के मूड में अंततः आ ही गया है। इस उम्र में कुछ अड़ियलपन भीआ जाता है जो सभी देख भी रहे है
सिद्धार्थ शर्मा करीब पांच दशकों में नौवीं बार लोकपाल विधेयक संसद में पेश है | १९६८ से अबतक लोकपाल की अतीव आवश्यकता के बावजूद संसद में इसका aपारित नहीं होना
यह आप बीती है ऐसे इंसान की जो अपना गाँव सब छोड़ कर देश की राजधानी दिल्ली आया था, अपना एवं अपने परिवार का भविष्य सुधारने को, परन्तु हर मोड़
एक गुस्साए युवक द्वारा केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को थप्पड़ मारने की घटना पर पूरे देश में अफसोस प्रकट किया गया है। आम प्रतिक्रिया यही है कि ऐसी हिंसा से
42 वर्षीय प्रौढ़ लोकपाल अब सख्त लोकपाल बनने के मूड में अंततः आ ही गया है। इस उम्र में कुछ अड़ियलपन भीआ जाता है जो सभी देख भी रहे है
सिद्धार्थ शर्मा करीब पांच दशकों में नौवीं बार लोकपाल विधेयक संसद में पेश है | १९६८ से अबतक लोकपाल की अतीव आवश्यकता के बावजूद संसद में इसका aपारित नहीं होना
यह आप बीती है ऐसे इंसान की जो अपना गाँव सब छोड़ कर देश की राजधानी दिल्ली आया था, अपना एवं अपने परिवार का भविष्य सुधारने को, परन्तु हर मोड़
एक गुस्साए युवक द्वारा केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को थप्पड़ मारने की घटना पर पूरे देश में अफसोस प्रकट किया गया है। आम प्रतिक्रिया यही है कि ऐसी हिंसा से
जब खाने-पीने की चीजों के दामों में आग लग जाय और रसोई के चूल्हे की आग गैस सिलेंडर महंगा होने से बुझ जाय , सरकार के मंत्री के घोटालो के चलते पूरी सरकार भ्रष्टाचार
हाल के कुछ महीनो में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े बड़े आन्दोलन हुए है चाहे वो आन्दोलन बाबा रामदेव का हो या अन्ना हजारे का हो सबमे सरकार
मित्रों,जब हम बचपने में थे तब हमारे घर के बड़े-बुजुर्ग हमें अक्सर गाँव के तालाब में नहाने से रोका करते थे.चूंकि मारने-डांटने का प्रभाव बच्चों के मन-मस्तिष्क पर बहुत ही
अरे प्रशांत भूषण की पिटाई वाला समाचार आपने सुना ? बड़ी उत्सुकता से एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने अपने एक अधेड़ उम्र के साथी से दिल्ली की लाइफ लाइन कही जाने वाली
आज़ादी के इतने वर्षो बाद भी गरीबी और मजाक एक दूसरे का पर्याय बने हुए है अगर ऐसा मान लिया जाय तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी ! कम से कम
जान की कीमत लगा दी गई है, मात्र 27 रुपये, इससे सस्ती कीमत पर आपको जान इस महंगाई के युग में कही नहीं मिलेगी. यहाँ इस जूनून के बाज़ार में जान