क्या महात्मा गाँधी अप्रासंगिक हो गए हैं ?
1इक्कीसवीं सदी में जिस प्रकार की हिंसा का हमारी दुनिया को सामना करना पड़ रहा है वह एक बिलकुल अलग प्रकार की हिंसा हैं । ९/११ के बाद से दुनिया
जनता से चुनावी वादा : – महंगाई कम करेंगे |सत्ता में आने पर : – पेट्रोल -डीजल-गैस की कीमत बढ़ाई| जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है इस राष्ट्रीय अपराध
अब वो समय आ गया है की युवा वर्ग को अपना ध्यान आम जनता के बीच सरकार की निरंकुशता के खिलाफ जागृति पैदा करने में देना होगा| बेईमानो की हितैषी,
स्वतंत्रता के बाद हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिकों ने अपने कीर्तिमान हर क्षेत्र में रचे हैं। हमारे कीर्तिमान और हमारी उपलब्धियां राजनीति,
इक्कीसवीं सदी में जिस प्रकार की हिंसा का हमारी दुनिया को सामना करना पड़ रहा है वह एक बिलकुल अलग प्रकार की हिंसा हैं । ९/११ के बाद से दुनिया
19 साल के अन्तराल के बाद भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बनने में कामयाब रहा। 192 देशों में 187 देशों ने भारत की दावेदारी का समर्थन किया।
लुकस टेटॆ अब हमारे बीच नही हैं, लेकिन लुकस टेटॆ अब हर उस भारतीय के दिल मे है जिसने भारत को प्यार किया है । नक्सलियों की कायरता एवं बर्बरतापूर्ण
जात ही पुछो साधु की,मत पुछिए ज्ञान, मोल करो मयान का,ऊपर से होती पहचान | भारतीय सामाजिक व्यवस्था में दोहों का मतलब बदलने में समय नही लगता. झुठ,फरेब और ऊपरी
साभार : आईएलओ प्रकाशित पुस्तक “मुक्ति की रह” अनौपचारिक अर्थव्यवस्था मोटे तौर पर इस प्रकार परिभाषित की जा सकती है- ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें अनिगमित उद्यम, अनियत या दिहाड़ी मजदूर है। भारत सहित
भारत के पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत का शनिवार की सुबह ११ बजकर १० मिनट पर निधन हो गया . गौरतलब है कि सांस लेने में तकलीफ़ की वजह
अगर हम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को आरक्षण देते रहना चाहते हैं तो जन-गणना में जाति का हिसाब तो रखना ही होगा| उसके बिना सही आरक्षण की व्यवस्था कैसे बनेगी
भूमंडलीकृत भारत के विकास की चकाचौंध में कई मूलभूत समस्याएं मंत्रालय की रद्दी टोकरियों में, और नेताओं के झूठे वादों में दबकर रह जाती हैं। गरीबी, बेकारी, बदतर स्वास्थ्य सेवाएं
भारत में 90 के दशक में आर्थिक सुधारों का सिलसिला शुरू हुआ था . दो दशकों में इसने ऐसी रफ़्तार पकड़ी कि देश का स्वरुप बदलता गया . कब सपेरों
भारत पर जबरन थोपे गये राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचन्द गाँधी के जीवन पर इंगलैण्ड के सुप्रसिद्ध इतिहासकार जेड ऐडम्स ने अपने पंद्रह वर्ष के लम्बे अध्ययन और गहन शोधों के आधार