सज़ा ए मौत : न सज़ा , न मौत
4अभी हाल ही में आए कुछ अहम फ़ैसलों में अपराधियों को मौत की सज़ा सुनाई गई । इससे पहले भी मौत की सज़ा मिले आरोपियों , जिनमें अजमल और अफ़ज़ल
भारत एक कृषि प्रधान देश है| भारत की बहुसंख्यक आबादी कृषि से ही जुडी है| आज भी भारत की बहुसंख्यक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भारत रूप से ग्रामीण जीवन से
मित्रों,अभी भारत के नवीनतम मित्र और दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत आई हुई थीं.वो भी ऐसे समय में जब भारत की आर्थिक राजधानी
जनता से चुनावी वादा : – महंगाई कम करेंगे |सत्ता में आने पर : – पेट्रोल -डीजल-गैस की कीमत बढ़ाई| जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है इस राष्ट्रीय अपराध
अभी हाल ही में आए कुछ अहम फ़ैसलों में अपराधियों को मौत की सज़ा सुनाई गई । इससे पहले भी मौत की सज़ा मिले आरोपियों , जिनमें अजमल और अफ़ज़ल
भारत एक कृषि प्रधान देश है| भारत की बहुसंख्यक आबादी कृषि से ही जुडी है| आज भी भारत की बहुसंख्यक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भारत रूप से ग्रामीण जीवन से
मित्रों,अभी भारत के नवीनतम मित्र और दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत आई हुई थीं.वो भी ऐसे समय में जब भारत की आर्थिक राजधानी
जनता से चुनावी वादा : – महंगाई कम करेंगे |सत्ता में आने पर : – पेट्रोल -डीजल-गैस की कीमत बढ़ाई| जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है इस राष्ट्रीय अपराध
अब वो समय आ गया है की युवा वर्ग को अपना ध्यान आम जनता के बीच सरकार की निरंकुशता के खिलाफ जागृति पैदा करने में देना होगा| बेईमानो की हितैषी,
स्वतंत्रता के बाद हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिकों ने अपने कीर्तिमान हर क्षेत्र में रचे हैं। हमारे कीर्तिमान और हमारी उपलब्धियां राजनीति,
ओबामा अपनी चार दिन की यात्रा पूरी कर पूर्वी एशिया के लिए रवाना हो चुके हैं.ओबामा जब तक भारत में रहे,भारत की स्तुति में लगे रहे.हम भारतीयों की यह पुरानी
भारत सरकार और मीडिया दोनों ही ऐसा दिखा रही है कि ओबामा कपास ओटने नहीं बल्कि हरिभजन को आये थे ! ओबामा के भजन की हर चर्चा है कि ओबामा
इक्कीसवीं सदी में जिस प्रकार की हिंसा का हमारी दुनिया को सामना करना पड़ रहा है वह एक बिलकुल अलग प्रकार की हिंसा हैं । ९/११ के बाद से दुनिया
19 साल के अन्तराल के बाद भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बनने में कामयाब रहा। 192 देशों में 187 देशों ने भारत की दावेदारी का समर्थन किया।