भारत माँ के लाल बहादुर
2[pullquote]आज भारत माँ के दो लालों का जन्मदिन है लोगों को और सरकार को एक याद रहता है दूसरा नहीं ! आइये हम याद करें जान-बुझ कर भुला दिए गये लालबहादुर
स्वभावगत जिद्दी,सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति,मासूम व्यक्तित्व,कुशल संगठनकर्ता,अपनत्व के धनी-एैसे थे सुखदेव।सुखदेव का जन्म 15मई,1907 को रामलाल थापर के पुत्र रूप में नौधरा,लुधियाना में हुआ था ।बचपन में ही पिता का साया
भगतसिंह का जन्म 27-28सितम्बर,1907 को बंगा गांव,लायलपुर जिला में हुआ।पिता सरदार किशनसिंह और चाचा अजीत सिंह स्वतंत्रता आन्दोलन में जेल में बन्द थे।भगतसिंह के जन्म के ही बाद ये लोग
यूँ तो नेताजी कब इस दुनिया को छोड़ गये यह आज भी रहस्य बना हुआ है | लेकिन ऐसा मना जाता है कि18 अगस्त या 16 सितम्बर 1945को आजादी के
[pullquote]आज भारत माँ के दो लालों का जन्मदिन है लोगों को और सरकार को एक याद रहता है दूसरा नहीं ! आइये हम याद करें जान-बुझ कर भुला दिए गये लालबहादुर
स्वभावगत जिद्दी,सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति,मासूम व्यक्तित्व,कुशल संगठनकर्ता,अपनत्व के धनी-एैसे थे सुखदेव।सुखदेव का जन्म 15मई,1907 को रामलाल थापर के पुत्र रूप में नौधरा,लुधियाना में हुआ था ।बचपन में ही पिता का साया
भगतसिंह का जन्म 27-28सितम्बर,1907 को बंगा गांव,लायलपुर जिला में हुआ।पिता सरदार किशनसिंह और चाचा अजीत सिंह स्वतंत्रता आन्दोलन में जेल में बन्द थे।भगतसिंह के जन्म के ही बाद ये लोग
यूँ तो नेताजी कब इस दुनिया को छोड़ गये यह आज भी रहस्य बना हुआ है | लेकिन ऐसा मना जाता है कि18 अगस्त या 16 सितम्बर 1945को आजादी के
8दिसम्बर,1879को काया ग्राम,जनपद नदिया-कुष्टिया,पश्चिम बंगााल में एक प्रतिभाशाली विद्वान श्री उमेश चन्द्र मुखर्जी के एवं उच्च कोटि की कवियत्री मांॅ शरत शशि देवी के पुत्र रत्न रूप में यतीन्द्र नाथ
आजादी की लड़ाई के हर मौके पर अपनी सहभागिता करने के लिए बेचैन रहने वाले,इस लड़ाई में जान देने व लेने का कोई अवसर हाथ से जाने न देने के
राष्ट का गौरवशाली,समृद्धशाली इतिहास राष्ट के निवासियों को उर्जा प्रदान करता है।अनेकानेक कारणों से जनता राष्ट गौरव की गाथाओं,समृद्धशाली इतिहास,बलिदान गाथाओं और विभिन्न कालों में रहे सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों की जानकारी
9वीं शताब्दी में अनेक अवतारी महापुरूषों ने भारत की धरती पर जन्म लिया। 14 अप्रैल 1881 का दिन ऐतिहासिक दिन था। इस दिन डा. भीमराव अम्बेडकर जी का जन्म हुआ।
अमृतसर के रहने वाले मदनलाल धींगरा वह गरीब़ और बद्किस्मत क्रांतिकारी थे,जिनके पिता ने उन्हें अपना पुत्र मानने से मना कर दिया था। बी0ए0 पास करने के पश्चात धींगरा इंग्लैण्ड़
हम भारत के लोग बडे ही हर्षोल्लास से १५ अगस्त को स्वाधीनता दिवस मनाते हैं, लेकिन हममें से बहुत कम लोगों को यह भान होगा कि इससे एक दिन पूर्व यानि १४ अगस्त १९४७ को