राजनीति की भेंट चढ़ गया लोकपाल विधेयक
0हर बार किसी न किसी कारण से पारित होने से रुका लोकपाल विधेयक इस बार देशभर में कथित रूप से उठे बड़े जनआंदोलन के बावजूद राजनीति की भेंट चढ़ गया।
हाल के कुछ महीनो में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े बड़े आन्दोलन हुए है चाहे वो आन्दोलन बाबा रामदेव का हो या अन्ना हजारे का हो सबमे सरकार
व्यक्ति की पहचान पहले उसके नाम से बाद में उसके कार्यों से होती है। कार्यों के गुण-दोषों केे ही आधार पर लम्बे समय के बाद उसकी छबिबनती एवं असावधानी से
भारतीय जनता पार्टी के ऊपर अक्सर बनिया-ब्राह्मण पार्टी होने का आरोप लगता रहा है | प्रमोद महाजन की असामयिक मौत के बाद से ही पार्टी की हालात खस्ता है और
हर बार किसी न किसी कारण से पारित होने से रुका लोकपाल विधेयक इस बार देशभर में कथित रूप से उठे बड़े जनआंदोलन के बावजूद राजनीति की भेंट चढ़ गया।
हाल के कुछ महीनो में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े बड़े आन्दोलन हुए है चाहे वो आन्दोलन बाबा रामदेव का हो या अन्ना हजारे का हो सबमे सरकार
व्यक्ति की पहचान पहले उसके नाम से बाद में उसके कार्यों से होती है। कार्यों के गुण-दोषों केे ही आधार पर लम्बे समय के बाद उसकी छबिबनती एवं असावधानी से
भारतीय जनता पार्टी के ऊपर अक्सर बनिया-ब्राह्मण पार्टी होने का आरोप लगता रहा है | प्रमोद महाजन की असामयिक मौत के बाद से ही पार्टी की हालात खस्ता है और
सारे देश में लोगों के लिये यह खबर एक नया सन्देश लेकर आयी है कि-बिहार विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के टिकिट पर चुनकर आये बाहुबली विधायक राजकिशोर केसरी का
कांग्रेस शासित राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने अजमेर धमाके की जाँच पूर्ण किए बिना ही इन्द्रेश कुमार का नाम उछाल दिया है। इन्द्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
बिहार का चुनाव क्या हो रहा है सभी छोटे बड़े राजनेताओं कि जुबान पर बस विकाश का ही मुद्दा छाया हुआ है। अब हर नेता अपनी जनसभा में केवल विकास
क्या यह वही आपत्तिकालीन समय है, जिसमें आपत्ति धर्म का अर्थ है-सामान्य सुख-सुविधाओं की बात ताक पर रख देना और वह करने में जुट जाना जिसके लिए मनुष्य की गरिमा
बिहार में चुनावी जंग छिड़ी है सभी पार्टियाँ अपने-अपने तरीके से चुनावी प्रचार शुरू कर दिए है. सभी पार्टियों के दिग्गज नेता कमर कस कर चुनावी मैदान में उतार चुके
नेहरु-गाँधी खानदान ने भारतीय राजनीति को वंशवाद का तौहफा दिया था | एक समय था देश में जब भी वंशवाद की चर्चा होती तो गाँधी परिवार तक ही सिमट कर