मिलावट के इस दौर में असली बचा न कोय
2व्यक्ति की पहचान पहले उसके नाम से बाद में उसके कार्यों से होती है। कार्यों के गुण-दोषों केे ही आधार पर लम्बे समय के बाद उसकी छबिबनती एवं असावधानी से
इसे आने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारी कहें या फिर कुछ माह बाद होने वाले पंचायती चुनाव का खाका। सभी सियासी दलों में मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की होड़ मची
अंबेडकरवाद का चोगा ओढे उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बहन मायावती राजधानी लखनफ के आसपास लगी मूर्तियों का अनावरण करने में लगी है। अंबेडकर सिंद्धांत के मायने आज बसपा से कोसों
देश के राजनीतिक क्षेत्र को लेकर पिछले कुछ सालों से गाहे-बगाहे एक बड़ी विख्यात कहावत सुनाई देती रही है कि- ‘भले ही राजनीति कभी जनसेवा से जुड़ी हुई थी, लेकिन
व्यक्ति की पहचान पहले उसके नाम से बाद में उसके कार्यों से होती है। कार्यों के गुण-दोषों केे ही आधार पर लम्बे समय के बाद उसकी छबिबनती एवं असावधानी से
इसे आने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारी कहें या फिर कुछ माह बाद होने वाले पंचायती चुनाव का खाका। सभी सियासी दलों में मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की होड़ मची
अंबेडकरवाद का चोगा ओढे उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बहन मायावती राजधानी लखनफ के आसपास लगी मूर्तियों का अनावरण करने में लगी है। अंबेडकर सिंद्धांत के मायने आज बसपा से कोसों
देश के राजनीतिक क्षेत्र को लेकर पिछले कुछ सालों से गाहे-बगाहे एक बड़ी विख्यात कहावत सुनाई देती रही है कि- ‘भले ही राजनीति कभी जनसेवा से जुड़ी हुई थी, लेकिन