सपनों का सिनेमा
0अक्सर इंसान सपने देखता है , कल्पनाओं में उनको जीता है और जब तन्द्रा टूटती हैं तो सोचने लगता है कि जो हमने देखा उसका अर्थ आंखिर था क्या ?
दिल्ली के ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में कुछ दिनों पहले जब हॉकी विश्वकप का आगाज हुआ था, तो क्रिकेट को धर्म की तरह पूजने वाले भारतीय खेल प्रेमियों ने अपने क्रिकेट
मुंबइयां इंडस्ट्री के फार्मूलों और तौर-तरीकों को उन्होंने बेहद करीब से देखा है. इकतालीस वर्षीय इरफान कमाल के पिता अपने जमाने के शीर्ष कोरियोग्राफर थे, जिन्होंने मनमोहन देसाई और बी.
अक्सर इंसान सपने देखता है , कल्पनाओं में उनको जीता है और जब तन्द्रा टूटती हैं तो सोचने लगता है कि जो हमने देखा उसका अर्थ आंखिर था क्या ?
दिल्ली के ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में कुछ दिनों पहले जब हॉकी विश्वकप का आगाज हुआ था, तो क्रिकेट को धर्म की तरह पूजने वाले भारतीय खेल प्रेमियों ने अपने क्रिकेट
मुंबइयां इंडस्ट्री के फार्मूलों और तौर-तरीकों को उन्होंने बेहद करीब से देखा है. इकतालीस वर्षीय इरफान कमाल के पिता अपने जमाने के शीर्ष कोरियोग्राफर थे, जिन्होंने मनमोहन देसाई और बी.