Tag Archives: पत्रकारिता का इतिहास
बंद कमरे में कलम घिसने वाले पत्रकार नहीं थे प्रभाष जोशी
प्रभाष जोशी से मेरी जान-पहचान पुरानी ना सही पर तीन बरसों में कार्यक्रमों के दौरान हुई कुछ एक मुलाकातों का असर गहरा जरुर है .दिल्ली जैसे महानगर में प्रभाष जी… Read more
खबरिया चैनलों की होड़ और गलाकाट स्पर्धा
खबरिया चैनलों की होड़ और गलाकाट स्पर्धा ने खबरों के मायने बदल दिए हैं। खबरें अब सिर्फ सूचनाएं नहीं देती, वे एक्सक्लूसिव में बदल रही हैं। हर खबर अब ब्रेकिंग न्यूज में बदल जाना सिर्फ खबर की कलरिंग भर का मामला नहीं है। दरअसल, यह उसके चरित्र और प्रस्तुति का भी बदलाव है । खबरें अब निर्दोष नहीं रहीं। वे अब सायास हैं, कुछ सतरंगी भी।
वर्तमान पत्र-अकारिता और माखनलाल चतुर्वेदी -3
देश के अन्य पत्रों में जिनकी सेवाएं मूल्यवान ही रही हैं वे हैं अलमोड़ा की शक्ति और उसकी लगातार अपने क्षेत्र की राष्ट्रीय सेवाएं बिहार के ‘देश’और ‘महावीर’आगरे का ‘आर्य… Read more
वर्तमान पत्र-अकारिता और माखनलाल चतुर्वेदी -2
महाशयों, हमारे देश के समाचार पत्र संगठित नहीं हो रहे । श्रीयुत नटराजन के सभापितत्व में बम्बई में श्रीमान रामस्वामी शास्त्री के सभापतित्व में मद्रास में, ‘फारवर्ड’ के एक भूतपूर्व… Read more


