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हमारी संसद एक टॉकिंग शॉप है : डॉक्टर रामजी सिंह

हमारी संसद एक टॉकिंग शॉप है : डॉक्टर रामजी सिंह

4 जनोक्ति डेस्क / 2009/10/11 3:32 pm

१० अक्तूबर को भारत नीति संस्थान के द्वारा दीनदयाल शोध संस्थान, नई दिल्ली में ” वर्तमान सन्दर्भ में हिंद स्वराज की प्रासंगिकता ” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया . इस संगोष्ठी में वरिष्ठ गांधीवादी चिन्तक और पूर्व सांसद राम जी सिंह , जेएनयु के प्राध्यापक अमित शर्मा , पांचजन्य के सम्पादक बलदेव भाई सिंह , आईबीएन -7 के पत्रकार आशुतोष , आचार्य गिरिराज किशोर , केदारनाथ साहनी , और भारत नीति संस्थान के संचालक राकेश सिन्हा समेत दर्जनों पत्रकार ,लेखक और छात्र शामिल हुए . इस अवसर पर प्रो ० अमित शर्मा ने कहा कि हिंद स्वराज की प्रासंगिकता पर विचार करने से पूर्व गाँधी को जानना आवश्यक है . गाँधी ने जीवन के दो लक्ष्य बताये हैं, एक आत्मसाक्षात्कार और दूसरा ब्रह्मसाक्षात्कार . गाँधी शास्त्र के नहीं लोक के जानकार थे

सावधान ! याचना नहीं अब रण होगा

सावधान ! याचना नहीं अब रण होगा

5 जयराम "विप्लव" / 2009/10/07 8:29 am

वाह री बौद्धिकता ! जब से नक्सलियों / माओवादियों के सफाए के लिए वायु सेना की तैयारी से जुड़ी रपट और चिदंबरम का बयान मीडिया में उछाला गया है तभी से कुछ हिंदी चिट्ठों के स्वनामधन्य बौद्धिक लेखक इसे सत्ता का दमनकारी चरित्र और वर्तमान हालात को आपातकाल से भी बदतर बता रहे हैं . हिंदी के लेखकों को माओवादियों /नक्सलवादी/ उग्रवादी (तथाकथित क्रांतिकारी ) के मानवाधिकारों की रक्षा में खड़े होने का आह्वान किया जा रहा है

सब कुछ विचारधारा के नाम पर

सब कुछ विचारधारा के नाम पर

1 जनोक्ति डेस्क / 2009/09/24 1:37 pm

नक्सलवादी अपने आप को वनवासियों का मसीहा बताते हैं। उनका दावा है कि वे वनवासियों की भलाई के लिए कार्य करते हैं। लेकिन यह उनका वास्तविक रुप नहीं है। वास्तविकता कुछ और ही है। अब यह किसी से छिपा नहीं है। नक्सलवादियों के बर्बर और अमानवीय चेहरे को सभी ने देखा है। नक्सलवाद पर नजर रखने वाले लोग जानते हैं कि वे इसके माध्यम से अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहते हैं। उनकी विचारधारा से असहमत लोगों की सबके सामने गला काट कर हत्या कर दी जाती हैं।

हिंदू हिन्दी हिंदुस्तान

2 निर्भय जैन / 2009/09/22 9:00 pm

हिंदू हिन्दी हिंदुस्तान
क्या है भारत की पहचान
पहले राज किया अंग्रेजों ने
अब अंग्रेजी के है गुलाम
देश की आजादी की खातिर

माओवादियों के बरगलाये लोगों द्वारा अपनी जड़ों पर चोट

3 जनोक्ति डेस्क / 2009/07/30 10:14 am

नेपाल में हिन्दी विरोध कोई नई बात नहीं है। यह बात भी अब कोई छिपी बात नहीं रह गई है कि यहां हिन्दी विरोध का तात्पर्य भारत विरोध से है। नेपाल के उपराष्‍ट्रपति श्री परमानंद झा द्वारा हिन्दी में शपथ लेने का प्रसंग हो या फिर अभी-अभी नेपाल के शिक्षामंत्री द्वारा हिन्दी में भाषण का मामला हो। मौका मिलते ही माओवादियों द्वारा भारत विरोध को हवा देने में कोई कोताही नहीं बरती जाती।