Post Tagged with: "धर्म"

आप कैसे युवा हैं ?

आप कैसे युवा हैं ?

1 शंकर दत्त फुलारा / 2010/10/10 5:09 am

(जिन्हें भारत एक गड़रियों का देश था पढ़ाया गया है जिन्हें ये पढाया गया है कि हिन्दू धर्म ग्रंथों में केवल कहानिया हैं और कुछ नहीं, कैसे युवा हैं आप

सेक्स चिंतन -7

सेक्स चिंतन -7

1 जयराम "विप्लव" / 2010/09/12 11:55 am

प्रिय आत्मन ! सेक्स चिंतन की कड़ियाँ पिछले कुछ महीनों से जुड़ नहीं पा रही थी | आज थोड़ी फुरसत में कुछ मानवोपयोगी तथ्यों के आलोक में इस श्रृंखला को

क्या गलत है सेक्स शिक्षा  ?

क्या गलत है सेक्स शिक्षा ?

1 रोहित कश्यप / 2010/08/30 8:50 pm

आज लिखने तो बैठ गया हूँ, पर अपने को यह समझा नहीं पा रहा हूँ की आखिर आज का विषय क्या होगा ? कुछ सोचने की कोशिश करता हूँ तो

विकास के विचार में शामिल हुआ सुख

विकास के विचार में शामिल हुआ सुख

0 amita neerav / 2010/08/10 9:56 am

उस दिन नए थिंकर पढ़ाए जाने वाले थे, जर्मी बैंथम। पहले दिन तो विद्यार्थियों की उपस्थिति ठीक ही रहती है। उस दिन भी अच्छी भीड़ थी। बैंथम का प्रारंभिक परिचय

गीता का निराकार भगवान शिव या साकार श्री कृष्ण ?

गीता का निराकार भगवान शिव या साकार श्री कृष्ण ?

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/17 11:12 pm

भारतीयों के लिए ढाई हज़ार साल से जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शक का कार्य करने वाली गीता सर्व शास्त्र शिरोमणि है, इस बात में कोई संदेह नहीं है, किंतु

दुनिया का महानाटक

दुनिया का महानाटक

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/01 9:10 am

जैसे कोई ड्रामा है, वैसे ही यह भी ड्रामा है, लेकिन वे हद के ड्रामा होते हैं और यह तुम्हारा ५००० वर्षों का बेहद का ड्रामा है|” [शिवबाबा] सन १९३६-३७,

आप बच्चों के बाप हैं अथवा बच्चे आपके बाप — तय करें

आप बच्चों के बाप हैं अथवा बच्चे आपके बाप — तय करें

0 कुमारेन्द्र / 2010/06/26 8:12 pm

खुशी मनाने के कुछ बिन्दु 1- आपके परिवार के बेटे-बेटी मानने लगें कि उनका जन्म आपके परिवार की अभिलाषा नहीं वरन् उन बच्चों के माता-पिता के शारीरिक सुखों की परिणति

लोकतंत्र से आगे बौद्धिक लोकतंत्र -13

लोकतंत्र से आगे बौद्धिक लोकतंत्र -13

0 देवसूफी राम बंसल / 2010/06/06 3:29 pm

मानव संसाधन बौद्धिक लोकतंत्र मानव संसाधन विकास को ही अपना उत्तरदायित्व नहीं मानता अपितु इसके सम्यक उपयोग के लिए भी तत्पर है. जबकि वर्त्तमान भारतीय जनतंत्र जनसँख्या वृद्धि कहकर उपयोग से

लोकतंत्र से आगे बौद्धिक लोकतंत्र -12

लोकतंत्र से आगे बौद्धिक लोकतंत्र -12

0 देवसूफी राम बंसल / 2010/06/04 3:17 pm

बौद्धिक लोकतंत्र में धर्म की जगह बौद्धिक जनतंत्र की सुनिश्चित मान्यता है कि धर्मों और सम्प्रदायों ने मानव समाज को विभाजित कर घोर अहित किया है तथापि यह प्रत्येक व्यक्ति

फ़तवों की बिसात पर मुसलमान

फ़तवों की बिसात पर मुसलमान

1 फ़िरदौस ख़ान / 2010/05/13 3:53 pm

भारत में मुसलमान वर्ग अन्य समुदायों के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा पिछड़ा है. इसकी एक अहम वजह यह है कि वे अपनी पुरातनपंथी मानसिकता के दायरे से बाहर आने की कोशिश