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हदों की हदें, पार कर रहा है कोई

हदों की हदें, पार कर रहा है कोई

0 varun prakash / 2010/07/17 3:20 pm

पल-पल नज़र में मुझे भर रहा है कोई……… दिल पर असर गहरा, कर रहा है कोई……… बो क्यों लगाते हैं, काज़ल आँखों में, इतना जिसके लिए हर पल, ज़ल रहा

खेलो न दिल से खिलौना समझकर

खेलो न दिल से खिलौना समझकर

0 नरेन्द्र निर्मल / 2010/05/24 10:39 am

इस दिल को कुछ हो गया है लगता है मुझको ये खो गया है कोई लाके इस दिल को दे जाए जरा वो पाएगा मुझसे प्यार मेरा इस दिल को कुछ हो

गम का है मौसम….

गम का है मौसम….

0 नरेन्द्र निर्मल / 2009/12/05 4:03 pm

गम का है मौसम, मौसम जुदाई का, तुझको कसम है जाना, तेरी खुदाई का, गम का है मौसम………………. तुझको मैं भूलूं, भूल न पाऊ मैं, विरहा की अगनी में,  जलता