जयप्रकाश से अण्णा तक
0अन्ना हजारे के अनशन को केन्द्र में ऱखते हुए हो रही हलचल सन 1974 ई में बिहार के जयप्रकाश आन्दोलन की याद ताजा करती है। फर्क है इन आन्दोलनों के
समाजवाद से सर्वोदय की ओर यहां तक मैं बडे़ मैत्रीपूर्ण वातावारण में जिसकी स्मृति मेरे शेषजीवन को बराबर मिठास देती रहेगी, पार्टी के अपने साथियों के साथ काम करता रहा।
साम्यवाद से जनतंत्रीय समाजवाद की ओर आजादी की लड़ाई सन 1929 में जब मै। अपने देश वापस आया, वह समय मार्क्सवाद के लिए अनुकूल नहीं था। राष्ट्रीय भावना अपनी चरम
मेरे पिछले जीवन का रास्ता बाहर के लोगों को भले ही टेढ़ा-मेढ़ा और पेचीदा लगे, वे उसे अनिश्चित और अन्धकार में टटोलना समझें। किन्तु जब मैं अपने अतीत पर दृष्टि
अन्ना हजारे के अनशन को केन्द्र में ऱखते हुए हो रही हलचल सन 1974 ई में बिहार के जयप्रकाश आन्दोलन की याद ताजा करती है। फर्क है इन आन्दोलनों के
समाजवाद से सर्वोदय की ओर यहां तक मैं बडे़ मैत्रीपूर्ण वातावारण में जिसकी स्मृति मेरे शेषजीवन को बराबर मिठास देती रहेगी, पार्टी के अपने साथियों के साथ काम करता रहा।
साम्यवाद से जनतंत्रीय समाजवाद की ओर आजादी की लड़ाई सन 1929 में जब मै। अपने देश वापस आया, वह समय मार्क्सवाद के लिए अनुकूल नहीं था। राष्ट्रीय भावना अपनी चरम
मेरे पिछले जीवन का रास्ता बाहर के लोगों को भले ही टेढ़ा-मेढ़ा और पेचीदा लगे, वे उसे अनिश्चित और अन्धकार में टटोलना समझें। किन्तु जब मैं अपने अतीत पर दृष्टि
प्यारे साथियों, काफी चिन्तन के बाद मैने आपकों यह पत्र लिखने का निश्चय किया है। यह काम मेरे लिए आसान नहीं था। जीवनभर के साथियों से एकदम सम्बन्ध विच्छेद करना
जे.पी और कश्मीर समस्या जे.पी. का व्यक्तित्व अनूठा था। वे स्वयं को किसी विचारधारा से बांध कर नहीं रख सके। कारण था कि हर विचारधारा में गुणों के साथ अवगुणों
जयप्रकाश का पुनर्जन्म – जवाहर लाल कौल फीनिक्स पक्षी के बारे में कहावत है कि वह जलकर अपनी ही राख से फ़िर जन्म लेता है। जेपी के बहुआयामी व्यक्तित्व के