Post Tagged with: "गांधी"

क्या महात्मा गाँधी अप्रासंगिक हो गए हैं ?

क्या महात्मा गाँधी अप्रासंगिक हो गए हैं ?

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/01 9:28 pm

इक्कीसवीं सदी में जिस प्रकार की हिंसा का हमारी दुनिया को सामना करना पड़ रहा है वह एक बिलकुल अलग प्रकार की हिंसा हैं । ९/११ के बाद से दुनिया

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-4

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-4

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/10/07 9:54 am

समाजवाद से सर्वोदय की ओर यहां तक मैं बडे़ मैत्रीपूर्ण वातावारण में जिसकी स्मृति मेरे शेषजीवन को बराबर मिठास देती रहेगी, पार्टी के अपने साथियों के साथ काम करता रहा।

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-3

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-3

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/09/21 10:53 am

साम्यवाद से जनतंत्रीय समाजवाद की ओर आजादी की लड़ाई सन 1929 में जब मै। अपने देश वापस आया, वह समय मार्क्सवाद के लिए अनुकूल नहीं था। राष्ट्रीय भावना अपनी चरम

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-2

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-2

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/09/15 3:42 pm

मेरे पिछले जीवन का रास्ता बाहर के लोगों को भले ही टेढ़ा-मेढ़ा और पेचीदा लगे, वे उसे अनिश्चित और अन्धकार में टटोलना समझें। किन्तु जब मैं अपने अतीत पर दृष्टि

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-1

लोकनायक के ऐतिहासिक पत्र-1

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/09/12 10:01 pm

प्यारे साथियों, काफी चिन्तन के बाद मैने आपकों यह पत्र लिखने का निश्चय किया है। यह काम मेरे लिए आसान नहीं था। जीवनभर के साथियों से एकदम सम्बन्ध विच्छेद करना

अहिंसा-सत्याग्रह के राही थे क्रान्तिकारी

अहिंसा-सत्याग्रह के राही थे क्रान्तिकारी

1 अरविन्द विद्रोही / 2010/07/22 1:46 pm

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी आज हमारे बीच सशरीर नहीं हैं। महात्मा गाँधी के आदर्श, सोच हमारे लिए मार्गदर्शक बनकर विद्यमान हैं। ‘‘अहिंसा परमों धर्मः‘‘ के मूर्त रूप में अपने जीवन में उतार

अन्याय के विरुद्ध संघर्ष ही सत्याग्रह

अन्याय के विरुद्ध संघर्ष ही सत्याग्रह

0 अरविन्द विद्रोही / 2010/07/13 12:37 pm

महात्मा ने सत्य क्या है,इसके उत्तर में कहा था-यह एक कठिन प्रश्न है,किन्तु स्वयं अपने लिए मैने इसे हल कर लिया है। तुम्हारी अन्तरात्मा जो कहती है,वही सत्य है। गाँधी

गाँधी नहीं थे सत्याग्रह के प्रणेता

गाँधी नहीं थे सत्याग्रह के प्रणेता

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/10 11:02 am

:- विजय कुमार कुछ बातें कुछ लोगों के साथ चिपक जाती हैं, या यों कहें कि जबरन चिपका दी जाती हैं। कुछ ऐसा ही सत्याग्रह और गांधी जी के साथ

गाँधी का उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन

गाँधी का उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन

52 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/05/06 4:19 pm

भारत पर जबरन थोपे गये राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचन्द गाँधी के जीवन पर इंगलैण्ड के सुप्रसिद्ध इतिहासकार जेड ऐडम्स ने अपने पंद्रह वर्ष के लम्बे अध्ययन और गहन शोधों के आधार

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

16 के .पी. त्रिपाठी / 2010/05/03 6:58 pm

क्या राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी असामान्य सेक्स व्यवहार वाले अर्द्ध.दमित सेक्स मैनियॉक थे ? जी हां, महात्मा गांधी के सेक्स.जीवन को केंद्र बनाकर लिखी गई किताब “ Gandhi : Naked