Post Tagged with: "गरीबी"

मन लगा यार अमीरी में

मन लगा यार अमीरी में

0 डॉ. शशि तिवारी / 2011/10/02 8:44 pm

जब तक इस देश में गरीबी है तब तक ही अमीरी भी है। हकीकत में अमीरों का अस्तित्व गरीबों की नींव पर ही टिका है। जब देश में गरीबही नही

भ्रष्टाचार – दूर होने की संभावनायें दूर दूर तक नहीं

भ्रष्टाचार – दूर होने की संभावनायें दूर दूर तक नहीं

1 आम आदमी / 2010/12/04 2:58 pm

किसी ने कहानी सुनाई थी. सच्ची या झूठी, पता नहीं. बताया कि एक यूरोपियन देश में ट्रेन चलना प्रारम्भ हुई. लोगों ने यात्रा करना प्रारम्भ किया. हमारे यहां की ही

भ्रष्टाचार का भारतीय राजनीति में विकास यात्रा

भ्रष्टाचार का भारतीय राजनीति में विकास यात्रा

1 अरविन्द विद्रोही / 2010/12/01 4:39 pm

भारत देश भ्रष्टाचार के सडे़ तालाब में परिवर्तित हो चुका है ।भ्रष्टाचार आज जो सरकारी लोकसेवकों के,राजनैतिक व्यक्तियांे के, व्यापारियो के,बहुत हद तक नागरिकों के भी नस-नस में रक्त बन

हमें अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी

हमें अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी

1 ब्रज किशोर सिंह / 2010/11/28 8:57 pm

भ्रष्टाचार के खिलाफ इस समय संसद में विपक्ष की एकजुटता देखते ही बनती है.विपक्ष अब भी जे.पी.सी. से कम पर मानने को तैयार नहीं है.लेकिन क्या विपक्ष वास्तव में भ्रष्टाचार

1  लाख  76  हजार  करोड़  का  घोटाला|

1 लाख 76 हजार करोड़ का घोटाला|

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/26 4:11 pm

1 लाख 76 हजार करोड़ का घोटाला| हम चुप क्यों हैं ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ? ?

जागिए मनमोहन जी !

जागिए मनमोहन जी !

1 ब्रज किशोर सिंह / 2010/11/22 10:11 pm

1990का स्वतंत्रता दिवस समारोह मुझे आज भी याद है.तब मैं हाई स्कूल में था और वैश्विक अर्थव्यवस्था को समझने लगा था.लाल किले के प्राचीर से भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ

फिर जंतर-मंतर पर धरना !

फिर जंतर-मंतर पर धरना !

0 शंकर दत्त फुलारा / 2010/11/21 8:47 pm

अब फूटेगा भ्रष्टाचार का गुब्बारा। बहुत माल भर लिया, अब सीमा से अधिक हो गया है। अति होने के बाद ही इति होती है। अब जनता को भी लगने लगा

लुटना हमारा ‘राष्ट्रीय व्यसन’ है

लुटना हमारा ‘राष्ट्रीय व्यसन’ है

0 एल.आर. गाँधी / 2010/11/21 8:24 pm

लुटना हमारा ‘राष्ट्रीय व्यसन’ है – हम लूटने को तैयार बैठे हैं बस लूटने वाला चाहिए -इतिहास गवाह है ? मुहम्मद ग़जनी ने हमें 17 बार लूटा -नादिर शाह ने

हहाती जनसँख्या पर चुप्पी ठीक नहीं

हहाती जनसँख्या पर चुप्पी ठीक नहीं

0 आम आदमी / 2010/11/03 11:06 am

POPULATION SHOULD BE CONTROLLED ANYWAY पिछली जनगणना के बाद जनसंख्या संबंधी आधिकारिक आँकड़े जारी किये गये, राजनीतिक दलों ने अपने-अपने नजरिये से इसे देखा और अपने हिसाब से व्याख्या की।

कांग्रेस ,नक्सलवाद और गरीबी

कांग्रेस ,नक्सलवाद और गरीबी

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/02 9:24 pm

मुरारी सिंह कंडारी 1947 से 1975 तक बिहार में कांग्रेस की सत्ता रही, इसी बीच दलितों को सरकारी जमीन के पट्रेट तो दिए गए पर उस जमीन पर कोई दलित