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राजनीति का खेल

राजनीति का खेल

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/02/24 7:39 pm

सिवनी में राजनीति के खेल पर प्रकाश डाल रहे हैं इंका नेता ” आशुतोष वर्मा “ वृहद स्तर पर विधायक द्वारा आयोजित हल्दी कूकू चर्चित-भाजपा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया द्वारा

कांग्रेस के दिग्गज सिपहसालार

कांग्रेस के दिग्गज सिपहसालार

0 पुष्पेन्द्र आल्बे / 2010/02/23 6:00 pm

केंद्र में सफलतापूर्वक अपनी दूसरी पारी खेल रही कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की स्थिरता के लिए अगर दस जनपथ को सबसे ज्यादा तारीफें मिलती हैं, तो इस बात

कांग्रेस : तब और अब

कांग्रेस : तब और अब

0 देवसूफी राम बंसल / 2010/02/04 10:33 pm

भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन के समय कांग्रेस की बागडोर महात्मा गाँधी के हाथ में थी जिन्होंने जनसाधारण को उस समय उपलब्ध वस्त्र केवल एक लंगोटी को अपनी वेशभूषा बनाया. इसके

हिन्दू मन की खोज

हिन्दू मन की खोज

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/02/03 12:33 am

कृष्ण कुमार हिन्दू होने के मायने खोजने वक्त अपनी निजी नियति से घिर जाना बहुत आसान है। मेरी समझ में हिन्दू होने का कोई ऐसा अर्थ सोच सकना या बता

क्या यह षड्यंत्र है , नहीं यही तो लोकतंत्र है !

क्या यह षड्यंत्र है , नहीं यही तो लोकतंत्र है !

4 महेश कुमार वर्मा / 2010/01/28 9:18 pm

सोचनीय है कि एक ओर धर्म व जाति के आधार पर भेद-भाव समाप्त करने की बात कही जाती है और दूसरी ओर धर्म व जाति के आधार पर आरक्षण दिया

लोकतंत्र बचाने  के लिए पहल करे चुनाव आयोग

लोकतंत्र बचाने के लिए पहल करे चुनाव आयोग

6 कुमारेन्द्र / 2010/01/02 6:31 pm

  उत्तर प्रदेश विधान परिषद् के स्थानीय निकाय के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है। प्रत्याशियों का चयन हो चुका है, नामांकन प्रक्रिया हो चुकी है अब बस मतदान का

अपने फर्ज से मुंह चुराते मनमोहन

अपने फर्ज से मुंह चुराते मनमोहन

1 नरेन्द्र निर्मल / 2009/11/22 8:01 pm

  भारत देश में विकास की रफ्तार बढ़ाने में यूपीए सरकार के रथी अर्थात देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का विशेष योगदान रहा है। ऐसा बड़े अखबारों और टीवी चैनलों

भारत में सशस्त्र का सपना पूरा नहीं हो सकता

0 संजय द्विवेदी / 2009/11/03 9:20 pm

देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब 15 सितंबर,2009 को दिल्ली में पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन में नक्सलवाद को देश का सबसे बड़ा खतरा बताया तो वे कुछ नयी बात नहीं कह रहे थे। इसके पहले भी देश के गृहमंत्री और कई नक्सल प्रभवित राज्यों के मुख्यमंत्री यह बात कहते आए हैं। बावजूद इसके हमारी सरकारें न जाने क्यों नक्सलवाद के खिलाफ एक समन्वित और परिणाम केंद्रित अभियान छेड़ने में असफल साबित हो रही हैं। नक्सली देश में हिंसक अभियान चला रहे हैं निरीह जनता को अपना निशाना बना रहे हैं पर देश का गरीब, आदिवासी तबका अपने नेताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति के इंतजार में खड़ा है।

नक्सलवाद का सच क्या है ?

2 डॉ०मधु लोमेश / 2009/11/02 1:32 pm

नक्सल आतंकवाद ,माओवादी हिंसा की घटनाएँ जो कभी छिट-पुट रूप में दिखाई देती थी आज तकरीबन देश के बीस राज्यों में पैर पसारे दिख रही है .राजनीतिक गलियारों में भले हीं इसे किसी आतंकवाद के सदृश घोषित कर दिया हो पर आम जनता इस सत्य को जान चुकी है कि वास्तव में ऐसी घटनाएँ सरकारी तंत्र की विफलता ,अव्यवस्था , भ्रष्टाचार ,सरकारी धन के दुरूपयोग , नीतियों के सही क्रियान्वयन ना होने से उत्पन्न आक्रोश ,असंतोष की ही परिचायक है जिसे हम सब जज्ब किये बैठे हैं . उनके हिंसक प्रदर्शनों ,हमलों पर रोक -थाम के लिए आवश्यक है कि सरकार अपनी कथनी और करनी के अंतर की समीक्षा करे .नक्सल प्रभावित संवेदनशील इलाकों में अंतर्विरोधों को समाप्त करने की पहल करें . रोटी ,कपडा ,मकान ,रोजगार समंधी ठोस कदम उठाये ना कि बल पूर्वक नाक्साली आन्दोलन को कुचलते हुए उन्हें अधिक उग्र बनने पर विवश करे

स्वतः प्राप्त हे पार्थ ! खुले यह,स्वर्ग-द्वार के जैसा।

1 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/01 7:46 pm

  सम्पूर्ण विश्व ने सदियों से भारत पर लगातार आक्रमण किए हैं किंतु मुख्यतः मुग़ल और ब्रिटिश लोगो को ही अधिक सफलता मिली है। मुग़ल और ब्रिटिश लोग भी इस