राजबाला का सबसे बड़ा गुनाह !
7राजबाला का सबसे बड़ा गुनाह:क्योंकि वो राजबाला थी कोई जकिया जाफरी या जाहिरा शेख नहीं !! क्योंकि तब सवाल वोट बैंक का हो जाता है ! बेचारी राजबाला १२४ दिनों
कांग्रेस ने गुजरात मे अपने राज मे गीर फोरेस्ट के बब्बर शेरो को खत्म कर दिया था .क्योकि कई स्थानीय कांग्रेस नेता शिकारियो से मिलकर शेरो का शिकार करवाते थे
चुनाव आयोग सोचे कि जो प्रतिष्ठा और विश्वास टी०एन०शेषण ने अर्जित किया था उसे कायम रखना है या नहीं ? मुस्लिम आरक्षण और बाटला हाउस को अपनी चुनावी सभाओं
‘आप बदलाव लाओ हम यूपी का भविष्य बदल देंगे।’ राहुल गांधी ने जब फुलपुर से इस अपील के साथ अपने भाषण का अंत किया तो कांग्रेस के लिए मिशन 2012
राजबाला का सबसे बड़ा गुनाह:क्योंकि वो राजबाला थी कोई जकिया जाफरी या जाहिरा शेख नहीं !! क्योंकि तब सवाल वोट बैंक का हो जाता है ! बेचारी राजबाला १२४ दिनों
आचार्य बालकृष्ण अगर इस देश मे नहीं रह सकते तो अदनान सामी को भारत मे रहने की सिफारिश चिदंबरम और दिग्विजय ने प्रधानमंत्री से क्यों किया ? यूपी के चुनावी
जी हां , कांग्रेस पार्टी ये कह कर कि कांग्रेस का दिग्विजय सिंह के बयानों से कोई लेना देना नहीं है ये एक कांग्रेस द्वारा इस देश में एक सरासर
कहने के लिए तो भारत में मीडिया स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की पूरी आजादी है, लेकिन क्या सरकारें और प्रशासन अपनी निंदा बर्दाश्त कर पाते हैं? अगर सर्च इंजिन गूगल
अंकित ,रामलीला मैदान से लौटकर दिल्ली के रामलीला मैदान में क्या हुआ था 4 जून की रात को ये आप में से अधिकांश लोग जानते हैं परन्तु शायद आप में
राकेश बिष्ट पूरे देश ने 4जून की रात को रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा प्रायोजित कृत्य को देखा, इस कृत्य को देख कर भारत भर में सत्तासीन कांग्रेस के प्रति लोगों के
शील निगम सोते हुए निहत्थे अनशनकारियों पर लाठीचार्ज करना कायरता का द्योतक है | बाबा रामदेव ने पूरे संसार में भारतीय संस्कृति का डंका योग तथा आयुर्वेद के माध्यम से
लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से निर्वाचित सरकार जब अपने देश-समाज के प्रति कर्त्तव्य पथ से विमुख होती है तब सत्याग्रह ,सविनय अवज्ञा , बहिष्कार, जन चेतना, और आम चुनावो में जुल्मी सरकारों
यूपीए सरकार की दूसरी पारी में फिक्सिंग पर फिक्सिंग हो रही है | महाघोटालों और गुरु घंटाल मंत्रियों के बीच मुखौटा प्रधानमंत्री कितने जिम्मेदार हैं यह तो रामलीला मैदान में
राकेश चन्द्र 4 जून की घटना के कई मायने हैं. कुछ चीजें सामने आ गई हैं, कुछ परदे के पीछे हैं. यहाँ मैं कुछ छुए और कुछ बिलकुल अनछुए पहलुओं