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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; कन्या भ्रूण हत्या</title>
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	<description>Daily news analysis , Hindi samachar ,Hindi magazine,Hindi website,a6V3sbK3z0d4m7JTOT6OQOVo1jQ</description>
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		<title>बराबरी का हक़ मिले बेटियों को : क्राई</title>
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		<pubDate>Tue, 28 Sep 2010 05:30:12 +0000</pubDate>
		<dc:creator>शिरीष खरे</dc:creator>
				<category><![CDATA[विविध]]></category>
		<category><![CDATA[कन्या भ्रूण हत्या]]></category>
		<category><![CDATA[बाल दुर्व्यवहार]]></category>
		<category><![CDATA[बाल विवाह]]></category>
		<category><![CDATA[बाल श्रम]]></category>

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		<description><![CDATA[बाल अधिकार पर काम करने वाला संस्था चाइल्ड राइट्स एडं यू &#8216;क्राई&#8217; ने देश में लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने की अपील करते हुये बेटियों को बेटों के बराबर की दर्जा देने की वकालत की है. ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong><a rel="attachment wp-att-7804" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7-miscellaneous/7803/attachment/betiyan/"><img class="alignleft size-medium wp-image-7804" title="betiyan" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/betiyan-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" /></a><a href="http://www.janokti.com/?s=%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2+%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0+&amp;x=-186&amp;y=9">बाल अधिकार </a></strong>पर काम करने वाला संस्था <strong>चाइल्ड राइट्स एडं यू</strong> &#8216;क्राई&#8217; ने देश में लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने की अपील करते हुये बेटियों को बेटों के बराबर की दर्जा देने की वकालत की है.</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">देश में मनाये जा रहे <strong><a href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-campaign-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8/%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F/">बालिका दिवस</a> </strong>के मद्देनजर ग्रीटिंग कार्ड बनाने वाली कंपनी आर्चीज ने लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने वाले संदेश वाले कार्ड के जरिये लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से क्राई के साथ भागीदारी की है. इस भागीदारी के मौके पर क्राई की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूजा मारवाह ने कहा कि &#8220;देश में बेटियों को लेकर दिल और दिमाग दोनों स्तर पर बदलाव लाने की जरुरत है. बेटियों को बेटे की तरह शिक्षा के साथ ही बराबरी का अधिकार दिये जाने की जरुरत है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">उन्होंने कहा कि &#8220;समाज में जागरूकता आने के बावजूद अब भी लोग बेटी नहीं बेटे चाहते हैं जबकि क्राई के अध्ययनों में यह साफ् हुआ है कि लडकियां व्यक्तिगत और सामूहिक रूप में समाज की पुरानी परंपराओं को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं और भेदभाव को स्वीकार नहीं कर रही हैं. वे मंजिल हासिल करने की दिशा में बढ़ने लगी हैं.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">इस मौके पर आर्चीज के प्रबंध निदेशक अनिल मूलचंदानी ने कहा कि &#8220;लड़कियों की स्थिति के मद्देनजर बालिका दिवस पर उनके प्रति प्रेम एवं सद्भाव जताने की जरुरत है.&#8221; उन्होंने बताया कि&#8221; उनके साथियों ने ऐसे ग्रीटिंग कार्ड बनाये हैं जिनके जरिए कार्ड भेजने वाले और पाने वाले दोनों देश में लड़कियों की वास्तविक स्थिति को समझ सकेंगें.&#8221;</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">सुश्री मारवाह ने बताया कि &#8220;उनकी संस्था देश के 13 हजार गांवों में लड़कियों को लड़कों के बराबर अधिकार देने का अभियान शुरू किया है. इसके तहत <strong>कन्या भ्रूण हत्या, बाल श्रम, बाल दुर्व्यवहार और बाल विवाह </strong>के प्रति लोगों में जागरूकता लायी जा रही है.&#8221; क्राई मानता है कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए नीतिनिर्धारकों और नीतियों को लागू करने वाली एजेंसियों को भी इस भेदभाव को दूर करने के प्रति कटिबद्धता जतानी होगी.</span></p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>बहू-बेटियों के हत्यारे, चले हैं बाघ बचाने</title>
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		<pubDate>Mon, 22 Feb 2010 04:36:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>कुमारेन्द्र</dc:creator>
				<category><![CDATA[समाज]]></category>
		<category><![CDATA[Nature]]></category>
		<category><![CDATA[कन्या भ्रूण हत्या]]></category>

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		<description><![CDATA[देश की जनता में एकदम से बाघों को बचाने की होड़ शुरू हो गई है। लिख-लिख कर कागज काले कर डाले (वैसे अब कागज काले करने की जरूरत नहीं ब्लाग जो है) टी-शर्ट पहन डाली और भी जो तमाशा हो ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>देश की जनता में एकदम से बाघों को बचाने की होड़ शुरू हो गई है। लिख-लिख कर कागज काले कर डाले (वैसे अब कागज काले करने की जरूरत नहीं ब्लाग जो है) टी-शर्ट पहन डाली और भी जो तमाशा हो सकता था किया। सवाल ये उठता है कि बाघों की ये संख्या एकाएक तो कम नहीं हो गई? 1411 तक आने में बहुत समय लगा होगा किन्तु अब तक किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। <img src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/02/bagh-300x232.jpg" alt="" width="300" height="232" class="alignleft size-medium wp-image-1724" /><br />
अब जबकि टी0वी0 पर विज्ञापन दिखाया गया और देश में कई स्थानों पर मुख्य-मुख्य लोगों की दिलचरूपी इस ओर दिखी तो हमें भी लगा कि बाघों को बचाया जाये।<br />
सवाल फिर एक कि बाघों को बचायें कैसे? हमारा वश चले तो बाघों को पाल लें और रोज उनके द्वारा बच्चे पैदा करवाने का विकल्प वैज्ञानिकों और पशु-वैज्ञानिकों को तलाशने को कहें। रोज बच्चे पैदा होगे और बच जायेंगे बाघ।<br />
कितना हास्यास्पद और विद्रूपता से भरा लगता है कि जिस देश में अभी भी कन्या भ्रूण हत्या हो रहीं हों, लगभग रोज ही देश के किसी न किसी कोने में कन्या बचाओ अभियान चलाया जा रहा हो वहाँ हम बाघों को बचाने में इंसान से संवेदनशीलता की आशा लगाये हैं।<br />
एक आँकड़ा बताता है कि देश में स्त्री-पुरुष की संख्या में प्रति हजार लगभग 70 का अन्तर आ चुका है। जिसने भी मूक चीख फिल्म देखी हो <strong>(यह एक चिकित्सक द्वारा बनाई गई फिल्म है जिसमें गर्भपात करते समय का दृश्य है, इसमें भ्रूण की हृदय गति बहुत बढ़ गई है। वह अपना छोटा सा मुँह खोल रहा है, उसको दर्द का एहसास हो रहा है आदि-आदि)</strong> वह संवेदनशील है तो किसी भी स्थिति में गर्भपात की सलाह नहीं देगा।<br />
ऐसी स्थिति में जबकि हम सभी को पता है कि भ्रूण में जान है, हम उसकी भी हत्या कर देते हैं। इसके अलावा थोड़े से शारीरिक सुख के लिए जिस्मानी सम्बन्ध तो बना लिये जाते हैं बाद में हमारे कूड़े के ढेर बच्चे की कब्रगाह बनते हैं। कभी इन नवजात बच्चों को कुत्ते खाते दिखते हैं तो कभी कौवे नोंचते दिखते हैं। इसके बाद भी शारीरिक सुख के लिए अवैध यौन सम्बन्धों के बनने-बनाने में कोई कमी नहीं आई है। <img src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/02/pop1-287x300.jpg" alt="" title="pop1" width="287" height="300" class="alignright size-medium wp-image-1731" /><br />
कितनी बेटियों को मौत की नींद सुला देने के बाद, कितनी बेटियों के साथ भेदभाव करने के बाद, कितनी मन्नतों के बाद एक बेटे का जन्म होता है और उसी बेटे के सुख में हम ग्रहण की तरह लग जाते हैं। उसकी शादी के बाद चन्द सिक्कों की कमी के कारण किसी दूसरे घर की बेटी को, जतन से माँगे और पाले गये अपने बेटे की पत्नी को जला देने, मार डालने तक में नहीं हिचकते हैं।<br />
ये उदाहरण हमारी संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। इसके बाद भी हम बिना शर्म संवेदित हैं जानवरों को बचाने के लिए। हो सकता है कि हमारी इस पोस्ट के बाद हमें पशु विरोधी समझा जाये किन्तु हमारे साथ ऐसा नहीं है। हम भी जानवरों के प्रति, पर्यावरण के प्रति उतना ही चिन्तित रहते हैं जितना आज आप सभी बाघों के प्रति हो रहे हैं।<br />
चलिए यदि जानवरों की बात की जा रही है तो सिर्फ बाघ ही क्यों? क्या अब आपको आसमान में उड़ती चालें दिखती हैं? समाज की गंदगी साफ करने वाले गिद्ध आपने अंतिम बार कब देखे? कोयल की कू-कू आपने कब से नहीं सुनी। नीलकंठ के दर्शन के शुभ संकेत आपको कब से नसीब नहीं हुए? बागों में नाचते मोर देखे हैं पिछले एक-दो वर्ष में? (अरे! बाग ही नहीं तो मोर कहाँ नाचेंगे) बत्तख का तैरना आपके बच्चों ने कहाँ देखा है? इन्हें बचाने का जिम्मा क्या हमारा नहीं है या फिर इनके लिए भी एक टी0वी0 विज्ञापन की आवश्यकता है?<br />
अपने दिमाग की बत्ती जलाइये। एक विज्ञापन में ब्रह्म वाक्य है <strong>‘अपनी अकल लड़ाओ, दिखावे पर मत जाओ’</strong> आप भी उसी का अनुसरण करो।<br />
बाघ बचेंगे उनके जागने से जो बाघों को मारने में लगे हैं, उनको जगाओ। हम तो अभी बेटियों को, बहुओं को मारने में लगे हैं जब इनसे ही फुर्सत पायें तो बाघों को बचाने की ओर ध्यान दें!!!!!</p>
]]></content:encoded>
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