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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; उग्रवाद</title>
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		<title>माओवाद की राजधानी ‘मनातू’ जहाँ सांसद भी जाने से डरते हैं &#124;</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Feb 2011 11:22:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
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		<description><![CDATA[जनोक्ति की टीम झारखण्ड में माओवाद की जमीन तलाशने के लिए राजधानी रांची से होते हुए पलामू ( डाल्टेनगंज ) पहुंची &#124; पलामू की जमीन पर कदम रखने से पहले जो सबसे बड़ा शब्द था &#8216; माओवाद &#8216; जिसके गहरे ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-13324" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e2%80%98%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%82/attachment/mnaatu/"><img class="alignright size-medium wp-image-13324" title="mnaatu" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/mnaatu-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /></a>जनोक्ति की टीम झारखण्ड में माओवाद की जमीन तलाशने के लिए राजधानी रांची से होते हुए पलामू ( डाल्टेनगंज ) पहुंची | पलामू की जमीन पर कदम रखने से पहले जो सबसे बड़ा शब्द था &#8216; माओवाद &#8216; जिसके गहरे निहितार्थ में हमें उतरना था |  रांची छोड़ने से पहले हमारे मन में आशंकाओं  के बादल उमड़ रहे थे लेकिन सच्चाई को जानने की जिद भी थी | रांची से पलामू पहुँचने के क्रम में कई ऐसे दृश्य नजरों से होकर गुजरे जो कल्पना से परे थे | एक -एक पुल की सुरक्षा में अर्ध-सैनिक बालों केदो दर्जन जवान गश्त लगा रहे थे | सडकों पर घुमती बख्तरबंद गाडियां इलाके में दहशत की कहानी को बयान कर रही थी | किसी प्रकार हम पलामू के अत्यंत पिछड़े और नक्सल प्रभावित प्रखंड मनातू पहुंचे | यहाँ जिला मुख्यालय से क्षेत्र के प्रखंडों को जोड़ने का एक मात्र माध्यम सालों पहले बनी जर्जर सड़कें जिसपर महज एक ही बस आवा-गमन करती है |  शिक्षा -स्वास्थ्य &#8211; सड़क -बिजली -पानी जैसी मुलभुत सुविधाओं से विहीन मनातू के लोगों से मिलकर हमने जो कुछ समझा उसको लेकर शासन तंत्र और जनप्रतिनिधियों के ऊपर अनेक सवाल उठ रहे थे |  इन्हीं सवालों को जानने के लिए हम पहुंचे क्षेत्र के सांसद &#8216;इन्दर सिंह नामधारी &#8216; के पास जो पूर्व में झारखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं |  सम्बंधित मुद्दे पर झारखण्ड के सबसे शिक्षित और सजग कहे जाने वाले जनप्रतिनिधि इन्दर सिंह नामधारी से हमारी बातचीत पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत है :</p>
<p style="text-align: justify;">भौगोलिक रूप से देश के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्र में से एक चतरा के सांसद इन्दर सिंह नामधारी ने बातचीत के दौरान मनातू को <strong>माओवादियों के अभ्यारण्य </strong><span style="font-size: 13.3333px;">की संज्ञा देते हुए हमारे सकुशल लौट आने पर आश्चर्य का भाव प्रकट किया | उन्होंने क्षेत्र में &#8216;भय&#8217; को रेखांकित करते हुए बताया कि मनातू ब्लोक का प्रखंड विकास पदाधिकारी वहां ना बैठ कर पड़ोस के &#8216; तरहस्सी &#8216; ब्लोक में बैठते हैं | उनसे जब हमने इलाके में नदारद मूलभूत सुविधाओं की बात छेड़ते हुए सड़क और बिजली की बदहाली की बात सामने रखी तो उन्होंने कहा कि माओवादियों के भय से कोई भी ठेकेदार टेंडर भरने को तैयार नहीं है | मोटी रकम  नक्सलियों को देने के बाद भी जान-माल की सलामती का सवाल बना रहता है | इसका एक ही उपाय है कि सुरक्षा बालों की कड़ी निगरानी में सड़क निर्माण का काम हो और यह कार्य केवल आर्मी के द्वारा ही संभव है | सड़क निर्माण में आर्मी की मदद की फ़रियाद लेकर वो केन्द्रीय गृहमंत्री चिदंबरम के पास भी पहुंचे थे | लेकिन चिदंबरम ने इस मामले में असमर्थता जाहिर की |</span></p>
<p style="text-align: justify;">सांसद महोदय के अनुसार बिजली के लिए लोडशेडिंग की सबसे बड़ी समस्या है | विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं को गिनाते हुए उन्होंने सांसदों और विधायकों की लड़ाई को भी बहुत हद तक जिम्मेदार बताया | जनप्रतिनिधियों में आपसी ताल मेल के अभाव में नौकरशाहों की मनमानी की शिकार क्षेत्र की जनता हो रही है | विकास मद में होने वाले प्रत्येक कार्य यहाँ तक की नरेगा में भी ४० %  कमीशनखोरी यहाँ आम बात है | डाल्टेनगंज के वर्तमान डी डी सी के ऊपर कमीशनखोरी और आर्थिक अनियमितता के सिलसिले में रंगे हाथों पकडे जाने पर भी राज्य सरकार की कृपा दृष्टि उन पर बनी हुई है | डी डी सी को बर्खास्त किये जाने की मांग को लेकर सांसद महोदय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को एक पत्र भी लिखा लेकिन अब तक कोई परिणाम सामने नहीं आया है |</p>
<p style="text-align: justify;">साथ-साथ पारा शिक्षकों और एनजीओ की मिलीभगत से मध्याह्न भोजन में होने वाली धांधलियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी तौर पर दो फीसदी भी नहीं हो पा रहा है | माओवादियों के नाम पर सरकारी अफसरों और कर्मचारियों इलाके से गायब रहते हैं | स्थानीय जनप्रतिनिधि का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है | विधायक महाशय को भी क्षेत्र की जनता शोषक के रूप में ही देखती है | शैक्षिक रूप से पिछड़े लोग अपने अधिकारों से अनजान और आवाज उठाने में असमर्थ हैं | बार-बार चुनाव में ऐसे लोगों को जीता कर पांच सालों तक उनकी मेहरबानियों पर गुजर-बसर करते हैं |</p>
<p style="text-align: justify;">मनातू में स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सकों की गैर मौजूदगी और एम्बुलेंस सेवा के ना होने के सवाल पर उन्होंने कन्नी काटते हुए कहा कि ऐसे इलाके में एम्बुलेंस सेवा का उपयोग कम दुरूपयोग ज्यादा होगा | हालाँकि ऐसा होता भी इलाके के स्वस्थ्य केंद्र में सोलर सेवा का उपयोग मरीजो के इलाज में हो ना हो कर्मचारियों के मोबाइल चार्ज में जरुर होता है |</p>
<p style="text-align: justify;">सांसद महोदय ने दार्शनिक अंदाज में क्षेत्र की समस्याओं से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि &#8216; <strong>इंसान परिस्थितियों का गुलाम होता है &#8216;  |</strong></p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>नक्सलियों के आय के प्रमुख स्रोत</title>
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		<pubDate>Wed, 10 Nov 2010 13:16:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>त्रिपुरारी कुमार</dc:creator>
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		<description><![CDATA[निशा दास की रिपोर्ट रांची से झारखंड में नक्सल समस्या एक जटिल समस्या बनी हुई है। लंबे समय से इस जंजाल से निकलने का यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों ने भी प्रयास किया ,पर अबतक कोई खास सफलता इसमें ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong>निशा दास की रिपोर्ट रांची से</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-10328" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/national-news-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af/%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96/attachment/naxal11/"><img class="aligncenter size-full wp-image-10328" title="naxal11" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/naxal11.jpg" alt="" width="310" height="240" /></a></p>
<p style="text-align: justify;">झारखंड में नक्सल समस्या एक जटिल समस्या बनी हुई है। लंबे समय से इस जंजाल से निकलने का यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों ने भी प्रयास किया ,पर अबतक कोई खास सफलता इसमें उन्हें नहीं मिल पाई है। आईए एक नजर डालते हैं नक्सलियों के आय के मुख्य श्रोतों पर।</p>
<p style="text-align: justify;">नक्सलियों के दिन प्रतिदिन मजबूती से उभरने का सबसे बड़ा कारण है यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों के बीच कमजोर इच्छा शक्ति का होना। क्योंकि कोई चाहता है इसका सफाया तो कोई नक्सलियों के सफाये के नाम पर सिर्फ राजनीति करते हैं ना कि काम। किसी भी अपराधी गिरोह या और भी कोई दूसरा संगठन चलाने के लिए धन की काफी अहम भूमिका होती है। नक्सलियों को भी संगठन को मजबूती देने के लिए मोटे धन की आवश्यकता होती है। और ये धन झारखंड में चलने वाले सरकारी योजनाओं में काम करनेवाले ठेकेदारों और विभागों से मिलते हैं हालांकि इसका कोई रिकोर्ड नहीं है क्योंकि हर कोई चाहता है कि काम हो जाय और जान भी बच जाय। यानि की सुरक्षा के नाम पर हमारी पुलिस बौनी साबित हो रही है नक्सलियों के सामने तभी तो नक्सलियों के सामने ठेकेदार और विभागीय कर्मचारी घुटने टेकते हुए नजर आते हैं। और इसी का फायदा उठाते हैं नक्सली। झारखं डमें चलने वाले खानों से भी नक्सली लेवी वसूलते हैं इसके साथ -साथ विस्फोटक पदार्थ भी वहंीं से लेते हैं। जाहिर सी बात है कि जब सरकारी योजनाओं और खानों से नक्सलियों को सहज ही लेवी और धन उपलब्ध हो जाय तो वे मजबूती से उभरेंगे ही। हमारे ही हथियार और हमारे ही पैसे से हमारे ही लोगों को नक्सली मारते हैं और इस बात की तस्दीक करते हैं कि गरीबों और पीड़ितों के लिए नक्सलवाद का निर्माण किया गया। ये कैसा मरहम लगाने का तरीका है गरीबों पर ,जो आम इंसानों के खून से अपने हाथों को रंगता हो। और भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर गरीब लोगों के आंखों में धूल झोंकता हो। सवाल ये भी उठता है कि आखिर खानों से निकलने वाले विस्फोटक और पैसे का हिसाब कहां जाता है। क्योंकि जब इतने अधिक मात्रा में लेवी और सामानों की निकासी होती है तो इसका हिसाब किसी के पास क्यूं नहीं रहता है। मामला साफ है कि सबके सब इसमें आकंठ डूबे हुए हैं। ये अलग बात है कि नक्सलियों का डर ही इन्हें ऐसा करने पर मजबूर करता होगा पर सवाल ये भी उठता है कि आखिर हमारी पुलिसिया तंत्र क्या करती है जो अपने ही विभागों की रक्षा नहीं कर पाती है। एक कहावत है कि अगर सांप को मारना हो तो पहले उसके कमर पर वार करो उसके बाद कहीं दूसरे जगह। ठीक इसी तरह से नक्सलियों के उपर भी वार करना होगा तभी नक्सलियों के आतंक से मुक्ति मिल सकती है। क्योंकि जबतक वे पैसे से कमजोर नहीं होंगे तब तक ऐसे ही वे भी लड़ेंगे और हमारी पुलिस नक्सलियों से मुकाबला करती रहेगी।</p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>BSNL को दुत्कार, रिलायंस से प्यार !</title>
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		<pubDate>Wed, 03 Nov 2010 06:57:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>सुरेश चिपलूनकर</dc:creator>
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		<description><![CDATA[हाल ही में कैम्ब्रिज विवि में एक व्याख्यान के दौरान प्रकाश करात ने माना कि &#8220;भारत के वामपंथी&#8221; देश में होने वाले आर्थिक बदलावों को समझने में असफ़ल रहे तथा भारतीय वामपंथ आज भी 1940 के ज़माने की मानसिकता में ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>हाल ही में कैम्ब्रिज विवि में एक व्याख्यान के दौरान प्रकाश करात ने माना कि &#8220;भारत के वामपंथी&#8221; देश में होने वाले आर्थिक बदलावों को समझने में असफ़ल रहे तथा भारतीय वामपंथ आज भी <a href="http://www.thaindian.com/newsportal/politics/my-cambridge-speech-was-misreported-karat_100450106.html">1940 के ज़माने की मानसिकता</a> में जी रहा है। कुछ माह पहले यही स्वीकारोक्ति वचन, वामपंथियों के पितातुल्य फ़िदेल कास्त्रो भी अपने मुँह से उचर चुके हैं <a href="http://www.foxnews.com/world/2010/09/09/castro-admits-cubas-communism-doesnt-work/"><strong>(यहाँ देखें…)</strong></a>।</p>
<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-9984" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/bsnl-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af/attachment/communism1/"><img class="alignright size-full wp-image-9984" title="communism1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/communism1.jpg" alt="" width="200" height="200" /></a>आज़ादी के पिछले 60 साल से भारत की जनता ने वामपंथियों को लाल झण्डे उठाये, मुठ्ठियाँ भींचे, नारे लगाते देखा है, यह सारी प्रक्रिया अक्सर (लगभग हमेशा) उद्योगपतियों के खिलाफ़, निजीकरण के विरोध में, सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों को बचाने के नाम पर बरसों से दोहराई जाती रही है।</p>
<p style="text-align: justify;">विभिन्न सरकारी संस्थानों, उपक्रमों, सार्वजनिक कम्पनियों, नवरत्न कम्पनियों से लेकर रेल्वे तक वामपंथी नेता, विदेशी पुस्तकों से एवं विदेशी विचारकों से उधार ले-लेकर भाषण, सिद्धान्त जनता के माथे पर झाड़ते रहे। बात-बात पर हड़ताल, तालाबन्दी, कलमबन्दी, घेराव, प्रदर्शन, तोड़फ़ोड़, नारेबाजी, उकसाना, प्रबन्धन को हड़काना, मजदूर नेताओं(?) द्वारा हाजिरी मस्टर पर हस्ताक्षर करके दिन भर गायब हो जाना, प्रबन्धन को मनचाहा झुकाने के बावजूद ब्लैकमेल करना, अपने-अपने आदमियों को विभिन्न संस्थानों में दबाव से फ़िट करवाना… जैसे कई मार्क्सवादी(?) पुनीत काम पिछले कुछ दशकों से हम देखते आये हैं। <strong>उदारीकरण के दौर के बाद, इन लोगों के इसी रवैये की वजह से देश के सार्वजनिक उपक्रम निजी उपक्रमों से टक्कर लेने में कमजोर पड़ने लगे, फ़िर भी ये सुधरे नहीं।</strong> देखते-देखते पिछले 20 साल में निजी क्षेत्र तरक्की के नये सोपान चढ़ता गया और कामगारों के हमदर्द कहे जाने वाले वामपंथियों ने सरकारी उपक्रमों की टाँग खींचना जारी रखा।</p>
<p style="text-align: justify;">इनके अधिकतर आंदोलन तनख्वाह बढ़ाने, कर्मचारियों की सुविधाएं बढ़ाने, छुट्टियाँ और भत्ते बढ़वाने तक ही सीमित रहते हैं, बहुत कम आंदोलन ऐसे हुए हैं जिसमें इन्होंने उच्च प्रबन्धन के भ्रष्टाचार को लेकर तालाबन्दी की हो, ऐसा भी कम ही हुआ कि किसी कर्मचारी नेता या संस्थान के कर्मचारियों की काम के प्रति जवाबदेही और उसके कर्तव्यों के निर्वहन में मक्कारी के खिलाफ़ इन्होंने कोई आन्दोलन किया हो… नतीजा ये हुआ कि कई सार्वजनिक उपक्रम पूरी तरह बैठ गये, कुछ बीमार हो गये और कुछ बिकने की कगार पर हैं। इसका सारा दोष वामपंथी हमेशा दूसरी सरकारों पर डालते आये हैं, कि इन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिये यह कम्पनी बन्द हो गई या उन्होंने वैसा मैनेजमेण्ट किया इसलिये वह संस्था बरबाद हो गई… तात्पर्य यह कि कामचोरी, मक्कारी, हड़ताल, कर्मचारी यूनियन नेताओं की दादागिरी और कदाचरण तथा कर्मचारियों और मजदूरों को &#8220;सिर्फ़ अधिकार-सुविधाएं लेना&#8221; के साथ &#8220;कर्तव्य नहीं करना&#8221; की शिक्षा देना जैसे कामों में इनका कोई दोष नहीं है, सारा दोष दूसरों का ही है (यह इनकी पुरानी आदत रही है)। अपनी असफ़लता को स्वीकार करने में इन्हें हिचक तो होती है, अतः खुलकर कुछ कह नहीं पाते।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><a rel="attachment wp-att-9985" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/bsnl-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af/attachment/commun2/"><img class="alignleft size-full wp-image-9985" title="commun2" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/commun2.jpg" alt="" width="189" height="266" /></a>इतिहास गवाह है कि हर नये विचार का वामपंथियों ने विरोध किया है</strong>, इन्होंने कम्प्यूटर का विरोध किया, उस समय इसके फ़ायदे इन्हें समझ नहीं आये… और अन्त में वामपंथ मुख्यालय में कम्प्यूटर लगाने ही पड़े। <strong>ये लोग केरल और बंगाल में हड़तालें करवाते रहे, सरकारी उपक्रमों का भट्टा बैठाते रहे, कार्यसंस्कृति का सत्यानाश करते रहे और इनके पड़ोसी राज्य तेजी से आगे बढते चले गये…</strong> अब जाकर इनकी आँख खुली है। इन्होंने ट्रैक्टर का विरोध किया, इन्होंने थ्रेशर का विरोध किया, इन्होंने 10+2 शिक्षा पद्धति का विरोध किया, इन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में निजी भागीदारी का विरोध किया… तात्पर्य यह कि वास्तविकता को स्वीकार करने की बजाय रेत में मुँह दबाये बैठे रहे… <strong>फ़िलहाल इनका यही रवैया इस्लामिक उग्रवाद को लेकर है, अभी भी ये समझ नहीं पा रहे हैं कि केरल और बंगाल में मुस्लिम वोटों की खातिर जिस &#8220;भस्मासुर&#8221; को ये पाल रहे हैं, वह अन्ततः इन्हें ही भस्म करने वाला है… </strong></p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन हाल ही में केरल की एक और घटना ने इनके &#8220;पाखण्डों के धारावाहिक&#8221; का एक और एपीसोड प्रदर्शित किया है। केरल में वामपंथियों का एक &#8220;भोंपू&#8221; है (भोंपू यानी मुखपत्र अखबार) जिसका नाम है &#8220;देशाभिमानी&#8221; (नाम ही विचित्र है, क्योंकि इसका नाम तो मार्क्साभिमानी होना चाहिये था)। इस अखबार के विभिन्न दफ़्तरों और संवाददाताओं को <a href="http://www.google.co.in/url?sa=t&amp;source=web&amp;cd=1&amp;sqi=2&amp;ved=0CB8QFjAA&amp;url=http%3A%2F%2Fwww.bsnl.co.in%2F&amp;rct=j&amp;q=bsnl&amp;ei=juTOTJvoA4GmuAPC2PjwDw&amp;usg=AFQjCNFn4CQ0homIrAi0kRHLK1x0E6n9Jg&amp;cad=rja"><strong>BSNL</strong></a> के नेटवर्क (टेलीफ़ोन, मोडम, राऊटर, लीज़ लाइन्स इत्यादि) से जोड़ा गया था। हाल ही में CPM की केन्द्रीय समिति ने इस अखबार से BSNL का ठेका समाप्त करके रिलायंस टेलीकॉम कम्पनी की सेवाएं लेने का फ़ैसला कर लिया है। अब <a href="http://www.deshabhimani.com/">देशाभिमानी अखबार और वेबसाइट</a> से माकपा ने BSNL को बाहर करके <a href="http://www.google.co.in/url?sa=t&amp;source=web&amp;cd=2&amp;ved=0CCEQFjAB&amp;url=http%3A%2F%2Fwww.reliancenetconnect.co.in%2F&amp;rct=j&amp;q=reliance%20high%20speed%20broadband&amp;ei=t-TOTK6gE5H0vQPtg4z1Dw&amp;usg=AFQjCNFOypPUodUevWhF98LH_NpoiEpDoQ&amp;cad=rja">रिलायंस का हाई-स्पीड डाटा नेटवर्क</a> ले लिया है। BSNL को माकपा अखबार से बाहर करने का कारण &#8220;खराब और गुणवत्ताहीन सेवाएं&#8221; बताया गया है। BSNL की धीमी गति, लाइनों में बार-बार खराबी और डाटा नष्ट होने की वजह से परेशान होकर माकपा की केन्द्रीय समिति के सदस्य ईपी जयराजन और समिति के अन्य सदस्यों ने BSNL को बाहर का रास्ता दिखाने का फ़ैसला किया। &#8220;…आखिर कब तक हम BSNL को झेलते, उनकी सेवाएं बहुत खराब हैं और ऊपर से उनके बिल भी भारी-भरकम होते हैं…&#8221; ऐसा कहना है समिति के सदस्यों का।</p>
<p style="text-align: justify;">BSNL के स्थानीय प्रबन्धन ने इस बात से साफ़ इंकार किया है कि खराब सेवाओं के कारण उन्हें बन्द किया गया है, जबकि BSNL में ही कार्यरत यूनियन (माकपा से जुड़ी) के सदस्य भी इस निर्णय से बेहद शर्मिन्दा और खफ़ा हैं। BSNL एम्पलाइज़ यूनियन के सचिव के. मोहनन कहते हैं, &#8220;…हमारा प्रयास हमेशा BSNL की सेवाओं में सुधार का ही होता है, हम अपने सभी मिलने-जुलने वालों को BSNL की सेवाएं लेने हेतु प्रेरित करते हैं, लेकिन देशाभिमानी के इस निर्णय से हमारी स्थिति अजीब हो गई है…&#8221;।</p>
<p style="text-align: justify;">उल्लेखनीय है कि CPM और CITU ने BSNL को &#8220;निजीकरण से बचाने&#8221; के नाम पर जमकर (राजनैतिक और आर्थिक) रोटियाँ सेंकी हैं और UPA पर BSNL को कमजोर करने का आरोप लगाते रहे हैं, परन्तु जब बात खुद पर और &#8220;धंधे&#8221; पर आई तो BSNL को लात मारने में देर नहीं लगाई। यदि CPM वाले वाकई BSNL को सुधारने के प्रति गम्भीर होते तो अपनी यूनियन के जरिये सेवाओं में सुधार के लिये प्रबन्धन पर दबाव बनाते या फ़िर अपनी यूनियन सदस्यों को अच्छा काम करने को प्रेरित करते, सेवाओं में सुधार के लिये CPM की यूनियनें एक घण्टा अधिक काम करतीं, जो कर्मचारी दोषी या मक्कार है उसे सजा दिलाने के लिये CPM की यूनियन आवाज़ उठाती… ऐसा तो कुछ नहीं किया गया, उलटा BSNL का एक हजारों रुपये मासिक का बड़ा ग्राहक (यानी पार्टी का अखबार) खुद ही तोड़ दिया। ये कैसा मार्क्सवाद है भाई…?</p>
<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-9986" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/bsnl-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af/attachment/bsnl_6/"><img class="alignright size-full wp-image-9986" title="BSNL_6" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/BSNL_6.jpg" alt="" width="368" height="344" /></a>जबकि <strong>हकीकत यह है कि यदि BSNL को उचित माहौल, सही प्रबन्धन, नेतागिरी और यूनियनबाजों से से मुक्ति मिल जाये तो रिलायंस, <a href="http://www.google.co.in/url?sa=t&amp;source=web&amp;cd=1&amp;sqi=2&amp;ved=0CCQQFjAA&amp;url=http%3A%2F%2Fwww.ideacellular.com%2F&amp;rct=j&amp;q=idea%20cellular&amp;ei=9OTOTIODM4_-vQOWmNW-Dw&amp;usg=AFQjCNGkS0DYh1NN6N84IuFxdOmD5sgwnQ&amp;cad=rja">आईडिया</a>, <a href="http://www.google.co.in/url?sa=t&amp;source=web&amp;cd=3&amp;sqi=2&amp;ved=0CDIQFjAC&amp;url=http%3A%2F%2Fwww.airtel.in%2Fwps%2Fwcm%2Fconnect%2Fairtel.in%2Fairtel.in%2Fhome%2Fforme_newuser%2Fbroadband%2Band%2Bfixed%2BLine%2F&amp;rct=j&amp;q=airtel%20broadband&amp;ei=CuXOTKOvEo2mvQPxtfX2Dw&amp;usg=AFQjCNG4s2Nvg57k_YbQAWsxq4HjWwgYFQ&amp;cad=rja">एयरटेल</a> किसी भी औकात नहीं है कि उसके सामने टिक सकें।</strong> ऐसे आरोप आम हैं कि निजी कम्पनियों को बढ़ावा देने के लिये BSNL के अफ़सरों ने शुरुआत में जानबूझकर &#8220;सिम&#8221; को दबाये रखा, उसका ब्लैक होने दिया, जल्दी-जल्दी टावर खड़े नहीं किये… तब मार्क्सवादियों ने इसके खिलाफ़ कोई आंदोलन नहीं किये? निजी कम्पनियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में लैण्डलाइन सेवाएं देना नहीं चाहतीं, जबकि BSNL बाज़ार में मौजूद है इसलिये उन पर &#8220;कम रेट्स&#8221; रखने का दबाव भी है…। क्यों नहीं CPM वाले <a href="http://www.google.co.in/url?sa=t&amp;source=web&amp;cd=3&amp;sqi=2&amp;ved=0CCAQFjAC&amp;url=http%3A%2F%2Fblog.sureshchiplunkar.com%2F2010%2F05%2F3g-spectrum-license-raja-telecom.html&amp;rct=j&amp;q=A%20raja%20chiplunkar&amp;ei=MuXOTN-MF4eEvAOK87zzDw&amp;usg=AFQjCNFKG1Ev84JZAPWJmgJ0Or2VkcFjOQ&amp;cad=rja"><strong>दूरसंचार मंत्री राजा</strong></a> को उसके भ्रष्टाचार के लिये रगड़ते?</p>
<p style="text-align: justify;">असल में मार्क्सवादी हों, वामपंथी हों, CPM-CPI आदि जैसे जो भी हों, <strong>इनके सिद्धान्त सिर्फ़ बघारने के लिये होते हैं, कार्यकर्ताओं को लुभाने और जनता को बरगलाने के लिये होते हैं। माकपा की असली ताकत &#8220;गरीबी और बेरोज़गारी&#8221; है, इसलिये ये चाहते हैं कि गरीबी बनी रहे…, बेरोज़गार इनके झण्डे उठाते रहें। &#8220;विकास&#8221; से इनकी दुश्मनी है,</strong> क्योंकि जैसे ही उद्योग-धंधे लगेंगे… बाज़ार पनपेगा, क्रय शक्ति बढ़ेगी… गरीब आगे बढ़कर निम्न-मध्यम और मध्यमवर्ग बनेगा… तो सबसे पहले इन्हें ही लात मारेगा। फ़र्जी विदेशी सिद्धान्त झाड़ते-झाड़ते ये लोग यथार्थ से दूर हो गये हैं। सामाजिक सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन की सिर्फ़ बातें ही बातें इनसे करवा लो… जबकि <strong>&#8220;सरकारी एजेंसी द्वारा&#8221;</strong> करवाये गये सर्वे में यह बात सिद्ध हुई है कि गरीबों के लिये चलाये जाने वाले &#8220;बीस सूत्री कार्यक्रम&#8221; का सबसे सफ़ल क्रियान्वयन भाजपा शासित गुजरात (क्रमांक 1) और कर्नाटक (क्रमांक 2) राज्यों में हुआ है, जबकि केरल का नम्बर पाँचवा और बंगाल का 14वां है…। अब बताईये, क्या फ़ायदा हुआ एक ही राज्य में 30 साल शासन करने का और गरीबी-गरीबी भजने का? लेकिन फ़िर भी न तो ये सुधरेंगे, न ही झूठे सिद्धान्त बघारना छोड़ेंगे, न ही जनता की आमदनी बढ़ाने और विकास करने के लिये कुछ करेंगे…।<br />
===========</p>
<div style="text-align: justify;"><strong>विशेष टीप &#8211; </strong></div>
<p style="text-align: justify;">1) इतने सालों तक सड़कों पर &#8220;संघर्ष&#8221;(?) करने के बावजूद वामपंथी लोग बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का कुछ नहीं उखाड़ पाये, लेकिन जब अकेले रामदेव बाबा ने अपने योग के प्रचार के जरिये इन शीतल पेय, जंक फ़ूड, दवा आदि कम्पनियों को अरबों रुपये का नुकसान करवा दिया तब भी इनके पेट में दर्द हो रहा है और <strong>ये <a href="http://www.google.co.in/url?sa=t&amp;source=web&amp;cd=4&amp;ved=0CCsQFjAD&amp;url=http%3A%2F%2Fwww.divyayoga.com%2F&amp;rct=j&amp;q=baba%20ramdev%20medicines&amp;ei=kuXOTN6mDIqIvgObwJTmDw&amp;usg=AFQjCNFjq5aczFvH5HGs8qMuTWhIgjGQVQ&amp;cad=rja">रामदेव बाबा</a> की आलोचना में लग गये हैं… कारण एक ही है कि रामदेव बाबा भारतीय संस्कृति की बात करते हैं तथा &#8220;भगवा&#8221; वस्त्र पहनते हैं…। </strong>इसी पाखण्ड की वजह से वामपंथ तेजी से अपना जनाधार खोता जा रहा है…</p>
<p style="text-align: justify;">2) अन्त में एक आसान सा सवाल &#8211; खबर है कि बिल क्लिंटन और जॉर्ज बुश की भारत यात्रा के दौरान जमकर विरोध करने वाले वामपंथी, ओबामा का <a href="http://www.livemint.com/2010/10/21213136/CPM-decides-not-to-boycott-Oba.html?atype=tp"><strong>बहिष्कार भी नहीं करेंगे</strong></a> और संसद में ओबामा के भाषण को सुनेंगे भी… बताईये ऐसा क्यों? जी हाँ, सही समझे आप… ओबामा के नाम में &#8220;हुसैन&#8221; शब्द जो आता है। स्वाभाविक है कि <strong>भारतीय संस्कृति को भले ही ये लोग जब-तब ईंट मारते रहें, लेकिन &#8220;हुसैन&#8221; से इनका &#8220;प्यार और दुलार&#8221; जगज़ाहिर है, फ़िर जल्दी ही केरल और बंगाल में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं… ऐसे में &#8220;हुसैन&#8221; शब्द जहाँ भी दिखेगा, सारे वामपंथी जीभ लपलपाते हुए उधर दौड़े चले जायेंगे…</strong></p>
<p style="text-align: justify;">लेख का सन्दर्भ :- <a href="http://expressbuzz.com/cities/thiruvananthapuram/deshabhimani-dumps-bsnl-prefers-reliance/216340.html%20">http://expressbuzz.com/cities/thiruvananthapuram/deshabhimani-dumps-bsnl-prefers-reliance/216340.html </a></p>
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		<title>भारत के विषय में पाकिस्तानी छात्राएं क्या सोचती हैं ?</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 16:17:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[सुनिए जरा पाकिस्तान की छात्राएं भारत-पाक संबंधों के बारे में क्या सोचती हैं ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><object width="480" height="385"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/81cfly1npRA?fs=1&amp;hl=en_US"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><param name="allowscriptaccess" value="always"></param><embed src="http://www.youtube.com/v/81cfly1npRA?fs=1&amp;hl=en_US" type="application/x-shockwave-flash" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" width="480" height="385"></embed></object></p>
<p>सुनिए जरा पाकिस्तान की छात्राएं भारत-पाक संबंधों के बारे में क्या सोचती हैं ?<br />
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		<title>हम पाकिस्तानी है ,पाकिस्तान हमारा है !</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 16:08:46 +0000</pubDate>
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<img class="aligncenter size-full wp-image-9765" title="saiyad shah gilani" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/saiyad-shah-gilani.jpg" alt="" width="512" height="382" /></a></p>
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		<title>आतंकियों के परिवार को सरकारी पेंशन</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 15:54:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[आतंकियों के परिवार को हर संभव मदद का निर्णय करने वाली मनमोहन की खडाऊं सरकार इसे मानवता का नाम दे रही है &#124; तो फ़िर क्या मानवता के नाते सिर्फ कश्मीरी आतंकवादी हीं क्यों ? क्या आने वाले दिनों में ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><object classid="clsid:d27cdb6e-ae6d-11cf-96b8-444553540000" width="480" height="385" codebase="http://download.macromedia.com/pub/shockwave/cabs/flash/swflash.cab#version=6,0,40,0"><param name="allowFullScreen" value="true" /><param name="allowscriptaccess" value="always" /><param name="src" value="http://www.youtube.com/v/OspO3aJCfNw?fs=1&amp;hl=en_US" /><param name="allowfullscreen" value="true" /><embed type="application/x-shockwave-flash" width="480" height="385" src="http://www.youtube.com/v/OspO3aJCfNw?fs=1&amp;hl=en_US" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true"></embed></object></p>
<p>आतंकियों के परिवार को हर संभव मदद का निर्णय करने वाली मनमोहन की खडाऊं सरकार इसे मानवता का नाम दे रही है | तो फ़िर क्या मानवता के नाते सिर्फ कश्मीरी आतंकवादी हीं क्यों ? क्या आने वाले दिनों में ये सरकार नक्सलियों समेत देश -प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े अपराधियों के परिवारों को पेंशन देने जा रही है ? अगर ऐसा है तो हम जैसे बेरोजगार भी तैयार हैं आतंकी बंनने के लिए , जीते जी ना सही, कम से कम मारने के बाद ही परिवार के काम आ जायेंगे !</p>
<p><a rel="attachment wp-att-9769" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/9756/attachment/terrorist-in-kashmir/"><img class="aligncenter size-full wp-image-9769" title="terrorist in kashmir" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/terrorist-in-kashmir.jpg" alt="" width="474" height="395" /></a></p>
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		<title>दूध का दूध और पानी का पानी</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 07:06:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>पवन कुमार अरविंद</dc:creator>
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		<description><![CDATA[कांग्रेस शासित राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने अजमेर धमाके की जाँच पूर्ण किए बिना ही इन्द्रेश कुमार का नाम उछाल दिया है। इन्द्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। उनको संघ के ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-9736" href="http://www.janokti.com/right-wing-%e0%a4%a6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4/%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a7-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%82%e0%a4%a7-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80/attachment/indreshkumar/"><img class="alignleft size-full wp-image-9736" title="indreshKumar" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/indreshKumar.jpg" alt="" width="248" height="312" /></a>कांग्रेस शासित राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने अजमेर धमाके की जाँच पूर्ण किए बिना ही इन्द्रेश कुमार का नाम उछाल दिया है। इन्द्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। उनको संघ के निष्ठावान व समर्पित कार्यकर्ताओं में गिना जाता है। संघ के हजारों कार्यकर्ता कार्य की दृष्टि से उनसे प्रेरणा लेते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">यह भी ध्यान देने वाली बात है कि श्री कुमार पिछले कई वर्षों से “राष्ट्रवादी मुस्लिम मंच” के बैनर तले देश के राष्ट्रवादी मुसलमानों को संगठित करने के कार्य में जुटे हुए हैं। इस कार्य में उनको काफी सफलता भी मिली है। उनके भगीरथ प्रयास से हजारों मुसलमान इस संगठन से जुड़ चुके हैं। उनके इस प्रयास के कारण ही भारत के अधिकांश मुसलमानों की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति धारणा सकारात्मक हुई है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राष्ट्रवादी मुसलमानों को एक मंच पर लाने के लिए संघ का यह कार्य अब तक का सबसे अनोखा कार्य है, इसलिए कांग्रेस पार्टी को कैसे पच सकता है। इसी कारण श्री कुमार पिछले कई वर्षों से कांग्रेस की नजरों में चढ़े हुए हैं। कांग्रेस उनको अपने वोटबैंक के लिए प्रमुख खतरा भी मानने लगी है। इसलिए विस्फोट के रूप में यह सारा वितंडावाद खड़ा किया जा रहा है। ताकि ऐन-केन-प्रकारेण श्री इन्द्रेश कुमार को लपेटे में लेकर उनके द्वारा चलाया जा रहे राष्ट्रवादी मुस्लिमों को संगठित करने के कार्य को प्रभावित करते हुए संघ को बदनाम किया जा सके।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">उल्लेखनीय है कि राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिस्ती की विश्व प्रसिद्ध दरगाह परिसर में 11 अक्टूबर 2007 आतंकवादी धमाके हुए थे। इन धमाकों में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 15 घायल हुए थे। इस मामले की जाँच एटीएस कर रही है। एटीएस ने 22 अक्टूबर को मामले से संबंधित 806 पृष्ठों का आरोप पत्र दायर किया है। इसमें विस्तार से धमाकों की साजिश का खुलासा करने का प्रयास किया गया है। इसमें 133 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इस आरोप पत्र में छह आरोपियों के नाम हैं। इनमें से तीन- देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लवे और लोकेश शर्मा की अप्रैल में गिरफ्तारी हुई थी। ये तीनों पूछताछ के लिए अभी न्यायिक हिरासत में हैं। शेष तीन आरोपियों में से दो- संदीप डांगे व रामजी कलसांगरे को फरार बताया जा रहा है और जबकि एक आरोपी सुनील जोशी की बहुत पहले ही मध्य प्रदेश में हत्या हो चुकी है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">आरोप पत्र में इन्द्रेश कुमार का भी नाम है, लेकिन उनको आरोपी नहीं बनाया गया है। इसका केवल एक ही कारण है कि इन्द्रेश कुमार के खिलाफ एटीएस को अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिल सका है। हालांकि जाँच अभी चल रही है और एटीएस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन्द्रेश कुमार का इस मामले से कोई संबंध है भी, या नहीं। आरोप पत्र के अनुसार, बम विस्फोट की साजिश जयपुर में रची गई है। आरोप पत्र में यह भी कहा गया है कि हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने बदला लेने की नीयत से अजमेर, हैदराबाद और महाराष्ट्र के मालेगाँव को धमाकों के लिए चुना।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">अब प्रश्न यह उठता है कि कांग्रेस शासित राज्य के एटीएस द्वारा लगाए गए ये आरोप कितने सही हैं और कितने गलत ? इसको जानने के लिए मामले की जाँच पूरी हो जाने और सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना होगा। तभी दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। लेकिन विडंबना यह है कि मामले की जाँच पूरी होने और आखिरी अदालत से फैसला आने के पूर्व ही कांग्रेस सहित कुछ कथित सेकुलरवादियों द्वारा आरोपियों को दोषी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। यहाँ तक कि जिसका नाम आरोपियों की सूची में नहीं है, उसको भी दोषी मान लिया गया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">हालांकि, कांग्रेस द्वारा सरकारी जाँच एजेंसियों का अपने हित में दुरुपयोग करने की बात कोई नया नहीं है। आजादी के बाद से ही वह अपने राजनीतिक विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग करती रही है। वह एजेंसियों के दुरुपयोग के मामले में सिद्धहस्त हो चुकी है। इस मामले में उसके जैसा और कोई दूसरा नहीं है। ये भी किसी से छिपा हुआ नहीं है कि गुजरात में सोहराबुद्दीन कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सीबीआई ‘कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इनवेस्टीगेशन’ की तरह कार्य कर रही है। अभी हाल ही में सम्पन्न निकाय चुनावों में जनता ने कांग्रेस को भारी बहुमत से हराकर उसको उसके किए की सजा सुना दी है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">दरअसल, अजमेर विस्फोट मामले में यह अधूरा आरोप पत्र जानबूझकर बिहार चुनावों के वक्त दायर करवाया गया है। ताकि हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों को बदनाम करके इसका तत्काल चुनावी लाभ लिया जा सके। बिहार में कांग्रेस की हालत खस्ता है। चुनाव जीतने का उसके पास और कोई दूसरा चारा नहीं है। राहुल गाँधी का सारा करिश्मा असफल साबित हो रहा है। वास्तव में कांग्रेस के पास देशहित में कोई मुद्दा नहीं बचा है। इसीलिए वह केंद्र द्वारा विभिन्न योजनाओं में दिए गए धन का हिसाब मांग रही है। चुनाव के पहले उसको केंद्र द्वारा दिए गए धन की चिंता नहीं थी। वह बिहार के संदर्भ में अभी तक सोई हुई थी और अचानक चुनाव में नींद खुली है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">आरोप पत्र दायर करवाने का एक और कारण है। वह है संसद का शीतकालीन सत्र, जो नवंबर मास में प्रारम्भ हो रहा है। इसके हंगामेदार रहने की प्रबल संभावना है। क्योंकि ‘भ्रष्टमंडल’ खेलों में कथित भ्रष्टाचार के कारण पूरी कांग्रेस पार्टी की साँस अटकी हुई हैं। वह अपने दामन अजाला रखने की जवाबदेही में प्रथम दृष्टया ही फंसती हुई नजर आ रही है। इन परिस्थितियों में वह विपक्षी दलों को विषयों से भटकाने के लिए पूरे जी-जान से लग गई है। भाजपा नेता सुधांशु मित्तल के यहाँ छापेमारी की घटना उसके इसी अभियान का हिस्सा है। जबकि सत्यता यह है कि मित्तल की कंपनी ने ‘भ्रष्टमंडल’ खेलों की तैयारियों में मात्र 29 लाख रूपए का ही कारोबार किया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">दूसरा पहलू यह है कि कांग्रेस अयोध्या फैसले का कोई राजनीतिक लाभ नहीं उठा सकी है। फैसले के बाद से ही वह बैकफुट पर नजर आ रही थी। उसने हाथ-पाँव मारने की बहुत कोशिश की, लेकिन मामला परवान नहीं चढ़ सका। इसलिए पार्टी के महासचिव राहुल गाँधी ने अल्पसंख्यक वोटों को साधने के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी की तुलना देशभक्त राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से कर डाली। हालांकि, उनके बयान का देश भर में काफी विरोध हुआ और करीब-करीब सभी बुद्धिजीवियों ने उनको अपरिपक्व बताते हुए उनके बयान को अनुचित नहीं माना।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल के अलावा कांग्रेस के एक दूसरे राष्ट्रीय महासचिव हैं दिग्विजय सिंह जी, जो विवादित बयान देने के लिए ही प्रसिद्ध हैं। वह किसी भी मामले को विवादित बनाकर ही बयान देते हैं। उनकी वाणी में गंभीरता नाम की कोई चीज नहीं होती है। ऐसा प्रतीत होता है पार्टी ने केवल विवादित बयान देने के लिए ही उनको राष्ट्रीय महासचिव का ओहदा थमाया है। हालांकि, कांग्रेस बहुत पहले से ही संघ को बदनाम करने के लिए भूमिका बनाने में जुट गई थी। भगवा व हिंदू आतंकवाद शब्दों का प्रयोग और संघ से सिमी की तुलना, उसके इसी अभियान का हिस्सा था। कांग्रेस का यह सारा अभियान उसको घोर साम्प्रदायिक पार्टी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। क्योंकि सत्ता में ऐन-केन-प्रकारेण बने रहने के लिए उसका जैसा कार्य-व्यवहार है, उसके लिए कोई दूसरा विशेषण उपयुक्त नहीं होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>बोलने से पहले सोचा नहीं था (राहुल गांधी)</title>
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		<pubDate>Sun, 10 Oct 2010 04:49:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>पंकज मिश्रा</dc:creator>
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		<description><![CDATA[राहुल गांधी। इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और युवा कांग्रेस की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री कहा जाता है, हालांकि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। दरअसल वे कुछ ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><strong><a rel="attachment wp-att-9286" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%a5%e0%a4%be/attachment/rahul-gandhi1-2/"><img class="alignleft size-medium wp-image-9286" title="rahul-gandhi1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul-gandhi1-300x240.jpg" alt="" width="300" height="240" /></a><a href="http://www.janokti.com/tag/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80/">राहुल गांधी</a></strong>। इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और <strong><a href="http://www.janokti.com/tag/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80/">युवा कांग्रेस</a></strong> की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री कहा जाता है, हालांकि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। दरअसल वे कुछ और ही कह रहे हैं। वे कह रहे हैं कि<strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0"> संघ और सिमी </a></strong>एक ही थाली के चट्टे- बट्टे हैं। उन्हें दोनों में कोई फर्क दिखाई नहीं देता। उन्हें चमचागिरि और चापलूसी करने वाले लोग भी कतई पसंद नहीं। वे कहते हैं कि हर मर्ज की सिर्फ एक ही दवा है और वह है राजनीति।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">अपने मध्य प्रदेश के दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कई बातें कहीं। कुछ ऐसी जो कहनी चाहिए थी और कुछ ऐसी जो मेरे ख्याल से नहीं कहनी चाहिए। राहुल ने कहा कि उन्हें चाटुकार और चमचे पसंद नहीं हैं। मुझे नहीं पता कि ये <strong><a href="http://www.janokti.com/tag/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80/">राहुल </a></strong>के निजी विचार हैं या फिर पारिवारिक। राहुल को भले चाटुकार पसंद न हों पर उनकी मां को चाटुकार और चमचे ही पसंद हैं। अगर नहीं होते तो <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">प्रतिभादेवी सिंह पाटिल </a></strong>आज देश की राष्ट्रपति नहीं होतीं। हो सकता है कि मेरी इस बात की जमकर आलोचना की जाए पर मैं जानना चाहता हूं कि प्रतिभादेवी सिंह पाटिल में ऐसी कौन सी खूबी है जो वह राष्ट्रपति के उम्मीदवार हो गईं। अगर महिला होने की वजह से उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया तो प्रधानमंत्री पद क्यों किसी पुरुष के सुपुर्द कर दिया गया। क्या पार्टी में कोई ऐसी योग्य महिला नहीं जो प्रधानमंत्री बन सके? या फिर ऐसी महिला नहीं जो <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80+&amp;x=-179&amp;y=3">सोनिया गांधी </a></strong>की बात को आंख पर पट्टी बांध कर मान ले। खुद के प्रधानमंत्री न बन पाने के बाद क्यों उन्होंने कठपुतली मनमोहन सिंह का चयन किया। क्या कांग्रेस में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो अपने दम पर लोकसभा चुनाव जीत सके और प्रधानमंत्री बन सके। दरअसल सोनिया अच्छी तरह जानती हैं कि जो नेता लोकसभा का चुनाव जीत सकता है उसका अपना अच्छा खासा जनाधार होता है। मनमोहन सिंह चूंकि लोकसभा से संसद में प्रवेश नहीं करते सो उनका जनाधार भी नहीं होगा। सोनिया सिर्फ उन्हीं लोगों को पद बख्श रहीं हैं जो उनके कहे पर चलें। वे कहेंं दिन तो दिन और कहें रात तो रात। ऐसे नामों में केवल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि कई नाम हैं। अगले लोकसभा चुनाव में जब <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80+&amp;x=-179&amp;y=3">राहुल प्रधानमंत्री पद के दावेदार</a></strong> होंगे उससे पहले ही मनमोहन सिंह को राष्ट्रपित भवन भेजने की पूरी तैयारी अभी से की जा रही है। राहुल को पहले अपने घर से चमचागिरि खत्म करनी होगी तब वे कार्यकर्ताओं को चमचागिरी न करने का पाठ पढ़ाएं तो ज्यादा अच्छा होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल कहते हैं कि देश की हर समस्या की खात्मा तभी होगा जब <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">युवा राजनीति </a></strong>में आएंगे। यानी हर मर्ज की एक ही दवा। <a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">राजनीति और सिर्फ राजनीति</a>। कोई कम अक्ल का व्यक्ति भी यह बता सकता है कि कभी भी हर मर्ज की एक ही दवा नहीं हुआ करती। अगर देश का हर व्यक्ति राजनीति करने लगेगा तो बाकी के काम कौन करेगा, यह भी राहुल को तय करना होगा। केवल राजनीति से देश नहीं चला करता। राजनीति पेट नहीं भरती। वे युवाओं को देश की राजनीति में लाना चाहते हैं। पहले उन्हें अपनी पार्टी में युवाओं को स्थान देना होगा। पहले वे अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से अपनी मां को हटाकर किसी युवा नेता को इसकी जिम्मेदारी सौंपे और फिर किसी युवा को ही प्रधानमंत्री बनने की घोषणा करें। केवल युवा कांग्रेस को बदलकर देश की राजनीति नहीं बदली जा सकती। राहुल को यह बात भी समझनी होगी कि कहने और करने में बहुत फर्क होता है। देशभर में घूमने से, <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">दलित के घर जाकर रोटी खाने से </a></strong>और उसके घर सोने से दलित को अच्छा तो लग सकता है, लेकिन इससे उसके पेट की भूख कम नहीं हो सकती। देश भूख है, कराह रहा है। इसके लिए राहुल के पास क्या दवा है? राजनीति। देश घूमकर उसकी समस्याओं को समझना एक बात है और उसकी समस्याओं का निराकरण करना दूसरी बात।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल कहते हैं कि वे प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते। राहुल को चाहिए कि वे पहले अपनी पार्टी के उन नेताओं को यह कहने से मना करें, जो उन्हें <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0">भावी प्रधानमंत्री </a></strong>के रूप में देख रहे हैं। राहुल को यह पता है कि अगले लोकसभा चुनाव में अगर उनकी पार्टी को बहुमत मिला तो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार वही होंगे सो अभी से ढोल-ताशे क्यों पीटे जाएं। हालांकि भीतर ही भीतर इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। योजना तैयार की जा रही है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">मजे की बात यह रही कि राहुल यहीं तक नहीं रुके। बुधवार को तो उन्होंने गजब ही कर दिया। उन्होंने कह दिया कि <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0">राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ </a></strong>और सिमी में उन्हें कोई फर्क नजर नहीं आता। सवाल यह है कि क्या राहुल ने कभी निष्पक्ष भाव से दोनों में कोई फर्क देखने की चेष्टा की है। नहीं की होगी, क्योंकि उनकी आंखों पर एक तरह का चश्मा लगा है और उन्हें जो कुछ भी दिखता है। उस चश्मे से ही दिखता है। अगर निष्पक्ष भाव से देखते तो उन्हें पता चल जाता कि संघ और सिमी में क्या फर्क है। सिमी जहां एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, वहीं <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0">संघ भारत भूमि की आत्मा </a></strong>से जुड़ा हुआ संगठन है। राहुल को अगर देशप्रेमी और देशद्रोही संगठनों में कोई फर्क नजर नहीं आता तो कोई क्या कर सकता है। बस उनकी बुद्धि पर मुस्कराया ही जा सकता है। वे जिस देश की राजनीति में युवाओं को लाने की बात कह रहे हैं क्या वे उस देश को समझ पा रहे हैं। इतने दिनों से देश भ्रमण के बाद भी अगर राहुल ऐसी बातें करते हैं तो लगता है कि लोग उन्हें यूं ही बच्चा नहीं समझते। वे वास्तव में अभी बड़े हो ही नहीं पाए हैं। बिना सोचे समझे बोलना उनकी आदत सी हो गई है। अंगे्रजी में पले बढ़े राहुल ने क्या थिंक बिफोर यू स्पीक की युक्ति नहीं सुनी होगी। सुनी होगी पर शायद उस पर अमल नहीं करना चाहते।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">दरअसल राहुल की दिक्कत यही है कि वे अपने आप को बहुत बड़ा और विद्धान समझते हैं, वहीं अन्य लोग उन्हें बच्चा समझते हैं। राहुल को यह तक नहीं पता कि किसी के यहां जाते हैं तो कैसे पेश आते हैं। मध्यप्रदेश आगमन से एक दिन पहले ही यहां की सरकार ने उन्हें प्रदेश का अतिथि घोषित कर दिया था, लेकिन राहुल को शायद अतिथि भाव पसंद नहीं आया। उन्हें तो मायावती जैसे लोग ही पसंद आते हैं, जो उनके आने पर कोई व्यवस्था नहीं करती बल्कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गाली ही देती हैं। राहुल की हर गलती को बच्चा समझकर माफ कर दिया जाता है, लेकिन कब तक? बच्चा जब कोई गलती करता है तो पहले उस पर हंसी आती है और जब बड़ा होकर भी वह ऐसा ही करता है तो सजा दी जाती है। राहुल को चाहिए कि वे ऐसी नौबत न आने दें और कोई भी बात बोलने से पहले सोचें।</p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>‘तोता-रटंत’ राहुल के निरर्थक बोल</title>
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		<pubDate>Fri, 08 Oct 2010 09:52:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>पवन कुमार अरविंद</dc:creator>
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		<description><![CDATA[कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना प्रतिबंधित और कुख्यात आतंकी संगठन सिमी से करके अपने नासमझी और अपरिपक्वता का ठोस परिचय दिया है। अभी तक उनकी नासमझी व अपरिपक्वता को लेकर देश ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-8544" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e2%80%98%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%9f%e0%a4%82%e0%a4%a4%e2%80%99-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%b0/attachment/rahul-gandhi-photo1-2/"><img class="alignright size-medium wp-image-8544" title="rahul-gandhi-photo1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul-gandhi-photo11-300x196.jpg" alt="" width="300" height="196" /></a>कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना प्रतिबंधित और कुख्यात आतंकी संगठन सिमी से करके अपने नासमझी और अपरिपक्वता का ठोस परिचय दिया है। अभी तक उनकी नासमझी व अपरिपक्वता को लेकर देश की जनता में कुछ संदेह था, लेकिन श्री गांधी ने इस प्रकार का बयान देकर उस संदेह को भी दूर कर दिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">हालांकि, 40 वर्षीय श्री गांधी ऐसा बचकाना बयान देंगे, यह किसी ने भी नहीं सोचा था। इसलिए उनका बयान हैरत में डालने वाला है। वह देश के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। केवल सांसद हैं इसलिए नहीं, बल्कि इसलिए भी, क्योंकि वह ऐसे खानदान का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने पंडित नेहरू सहित इस देश को तीन-तीन प्रधानमंत्री दिए हैं। इसलिए राहुल महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। संसदीय लोकतंत्र में ऐसे बयान को किसी भी सूरत में मर्यादापूर्ण नहीं कहा जा सकता है। यह हर स्थिति में लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार करने वाला है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">अब प्रश्न यह उठता है कि जो व्यक्ति आतंकी संगठन और सामाजिक संगठन में अंतर न समझ पाता हो, उस व्यक्ति को भविष्य में यदि कभी देश का नेतृत्व करने का मौका मिले, तो वह देश की बागडोर ठीक से संभाल सकेगा, इस बारे में लोगों को सदैव संदेह बना रहेगा। ध्यातव्य है कि राहुल ने मध्य प्रदेश के त्रि-दिवसीय प्रवास के दौरान कहा था कि कांग्रेस के कार्यकर्ता सिमी और आरएसएस से दूर रहें, क्योंकि ये दोनों संगठन कट्टरवाद के समर्थक हैं और दोनों की विचारधार में कोई खास फर्क नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल ने टिप्पणी तो कर दी लेकिन उनको शायद ही आरएसएस का इतिहास पता हो। वह आरएसएस के संस्थापक का ही ठीक से पूरा नाम नहीं बता सकते। हालांकि, वह आरएसएस को कितना जानते हैं यह बताने के लिए उनका बयान ही काफी है। राहुल के इस प्रकार के ऊल-जुलूल बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उनको इस देश के इतिहास-भूगोल की भी कोई जानकारी नहीं है। राहुल की विशेषता अब केवल स्वर्गीय श्री राजीव गांधी का बेटा होना भर ही रह गया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल को यह जानना चाहिए कि सिमी पर भाजपा नीत राजग सरकार ने प्रतिबंध लगाया था। उसके बाद उनकी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने उस प्रतिबंध को आगे बढ़ा दिया। क्योंकि वह खूंखार आतंकी संगठन है और देश में हुए कई आतंकी विस्फोटों में उसका हाथ है। सिमी पर अमेरिका ने भी प्रतिबंध लगा रखा है। राहुल की नजर में आरएसएस यदि सिमी जैसा संगठन है तो उनको अपनी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार से उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहना चाहिए। यदि आरएसएस सचमुच में सिमी के समान है, तो उनकी सरकार ने आरएसएस पर बिना प्रतिबंध लगाए क्यों छोड़ रखा है, यह सोचने वाली बात है ?</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">दरअसल, राहुल को स्वयं नहीं पता होता है कि वह क्या बोल रहे हैं। वह हमेशा लिखा हुआ भाषण पढ़ते हैं और भाषण में जो कुछ भी लिखा होता है, उसी को वह पढ़ डालते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">हालांकि, राहुल गांधी के बयान से आरएसएस की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। हां, इतना अवश्य है कि राहुल ऐसा बोलकर स्वयं ‘हल्के’ पड़ गए हैं। क्योंकि इस देश की जनता किसी भी राजनेता या श्रेष्ठ व्यक्तित्व से सदैव मर्यादित व संयमित व्यवहार तथा भाषा की अपेक्षा करती है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">कहा जाता है कि आदमी का बड़प्पन जीवन के किसी भी स्थिति, परिस्थित और मनःस्थिति में धैर्य व धीरज बनाए रखते हुए मर्यादापूर्ण आचरण व व्यवहार करने में होता है। लेकिन सामान्य स्थितियों में ही धैर्य खोकर विक्षिप्तावस्था में आ जाना और ऊल-जुलूल बातें करना, यह मनुष्य के व्यक्तित्व के एक वास्तविक पहलू को ही दर्शाता है। ऐसे व्यक्ति से देश के लिए और देशहित में किसी बड़े काम की उम्मीद नहीं की जा सकती।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
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		<title>बयानबाजी के बादशाह हैं सोनिया कांग्रेस के महासचिव राहुल</title>
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		<pubDate>Thu, 07 Oct 2010 17:41:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
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		<description><![CDATA[मंगलवार को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में कांग्रेस महासचिव और गाँधी परिवार के युवराज राहुल गाँधी ने कहा कि उनकी नजर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) एक जैसे हैं &#124; इस बयान के ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-8509" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8b/attachment/rahul-gandhi-photo1/"><img class="alignleft size-medium wp-image-8509" title="rahul-gandhi-photo1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul-gandhi-photo1-300x196.jpg" alt="" width="300" height="196" /></a>मंगलवार को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में कांग्रेस महासचिव और गाँधी परिवार के युवराज <strong><a href="http://www.janokti.com/page/2/?s=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2&amp;x=-181&amp;y=2">राहुल गाँधी</a></strong> ने कहा कि उनकी नजर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) एक जैसे हैं | इस बयान के मद्देनज़र पत्रकारों द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर राहुल गाँधी ने कहा कि उनकी नज़र में वैचारिक कट्टरता के मामले में दोनों में कोई अंतर नहीं है। <a href="http://www.janokti.com/page/2/?s=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2&amp;x=-181&amp;y=2">राहुल गाँधी</a> इससे पहले भी देश भर के दौरे पर जाते रहे हैं और अपनी सभाओं में युवाओं की भीड़ जुटाने में कामयाब रहे हैं हालाँकि यह बात और है कि भीड़ को कार्यकर्ताओं में बदलना नहीं हो पाता है | वैसे हाल के महीनों में राहुल का युवा फेक्टर औंधे मुंह गिरा है और इसकी शुरुआत बिहार के ललितनारायण मिथिला विश्वविद्यालय में हुई थी जब <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%80/">राहुल की गलतबयानी </a></strong>ने उनको माफ़ी मांगने पर मजबूर कर दिया था | 42 साल की उम्र में भी बाबा ( प्यार से बड़े लोग अपने सबसे छोटे बच्चे को पुकारते हैं ) कहे जाने वाले राहुल कितने परिपक्व है यह उनकी बातों से अंदाजा हो जाता है | संघ के ऊपर इस तरह की बयानबाजी राहुल ने एक योजना के तहत की थी जिसके जरिये मीडिया और पूरे संघ परिवार को खुद पर फोकस किया जा सके | और ठीक ऐसा ही हुआ |</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">मीडिया में दिन भर संघ और भाजपा नेताओं के बयानों को दिखा -दिखा कर राहुल गुणगान किया जाता रहा | मीडिया को दिए साक्षात्कार में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री राम माधव ने कहा कि आरएसएस जैसे देश भक्त और राष्ट्रवादी संगठन की तुलना स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इडिया (सिमी) जैसे जिहादी और प्रतिबंधित आतंकी संगठन से करना अशोभनीय है। यह उनकी अपरिपक्वता और देश व समाज के बारे में कम जानकारी को ही दर्शाता है। श्री गांधी जैसे युवा नेता को राजनीति में आगे बढ़ना है, अतः उन्हें अपनी बात नाप तौल कर बोलनी चाहिये।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्रवाद की पाठशाला है और वह पिछले 85 वर्षों से राष्ट्र के लिए तपस्या कर रहा है, जबकि सिमी एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है।जावडेकर ने कहा, &#8220;ऐसा बयान राहुल की राजनीतिक अज्ञानता, अपरिपक्वता और उद्दंडता को दर्शाता है। उन्हें सोच समझकर बोलना चाहिए। पिछले साल भर हुए विभिन्न चुनावों में कांग्रेस को मिली हार और अपना जादू न चलने से राहुल बौखलाए हुए हैं। इसलिए वह इस तरह की ऊल-जुलूल बयानबाज़ी कर रहे है।&#8221;</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">भाजपा के उत्तरप्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने स्थानीय पत्रकारों से कहा कि श्री गांधी को चाहिए कि वह अपने महासचिव को राष्ट्रभक्त और राष्ट्रद्रोही में अन्तर समझाये । संघ का नाम हर समय राष्ट्रभक्त के रुप में लिया जाता है । पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 के युद्ध में संघ की भूमिका की सराहना की थी । संघ के कार्यकर्ता राष्ट्रीय आपदाओं से निपटने में बढ चढकर हिस्सा लेते हैं ।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">वहीँ मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष  प्रभात झा ने राहुल गांधी को उटपटांग बयानबाजी करने वाला गांधी करार दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संघ एक राष्ट्रवादी संगठन है और पूरा देश जानता है कि संघ देशभक्ति का पाठ पढ़ाने वाला संगठन है, नौजवानों का चरित्र निर्माण करता है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">ऊपर के बयानों को पढ़िये और आने वाले दो-तीन दिनों तक प्रिंट -इलेक्ट्रोनिक -वेब प्रत्येक मीडिया माध्यमों का निरिक्षण करिए तो साफ़ हो जायेगा कि किस प्रकार राहुल गाँधी ने युवाओं में अपनी आउट <a rel="attachment wp-att-8510" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8b/attachment/rahul_gandhi_girls_20081124/"><img class="alignright size-full wp-image-8510" title="rahul_gandhi_girls_20081124" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul_gandhi_girls_20081124.jpg" alt="" width="250" height="239" /></a>ऑफ़  फोकस होती छवि को फ़िर से चर्चा में ला दिया है | क्योंकि गौर करिए इससे पहले राहुल क्या बात करते रहे हैं ? यही ना कि</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><strong><span style="color: #0000ff;">केंद्र का पैसा 10 प्रतिशत ही जनता तक पहुंचता है |</span></strong></span></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #0000ff;">राजनीति में युवाओं को आना चाहिए |</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #0000ff;">एक हिंदुस्तान हैं अमीरों का  हिंदुस्तान और दूसरा हिंदुस्तान गरीबों का हिंदुस्तान |</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #0000ff;">गरीबों का सिपाही हूं |</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">आदि-आदि वो तमाम बातें जो सुनने में अच्छी लगती हैं | ये सारी चीजें हर एक आम भारतीय समझता और महसूस करता है लेकिन राहुल बाबा इसे दूर करने का प्रयत्न भी तो करें | साठ सालों में रही अधिकांश सरकार इनकी ,हुकूमत इनकी फ़िर भी रोना क्यों रोते हैं ?</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">बहरहाल , देश के  युवा फेसबुक -ऑरकुट -ब्लॉग आदि पर राहुल के संघ सम्बंधित बयान में उलझे पड़े हैं | चर्चा में बने रहने का शगल राहुल गाँधी ने बखूबी सीख लिया है अपने गुरु दिग्विजय से, जो जब देखो तब दूसरों के फटे में अपना मुंह घुसा कर कुछ भी बक देते हैं जैसे कांग्रेस महासचिव नहीं राष्ट्रीय सलाहकार हैं जिनकी राय अपरिहार्य है ! गुरु तो गोबड़ करने में लगे हुए हैं देश का लेकिन चेला चीनी सरीखी मीठी बातों से युवाओं का नब्ज पकड़ना चाहता है ! और इस काम में मीडिया के साथ-साथ देश के बड़े औद्योगिक समूहों को लगाया गया है | इसके दो बड़े  उदाहरण , लोकसभा चुनाव परिणाम  के दौरान इलेक्ट्रोनिक मीडिया  की की रिपोर्टिंग  और हाल ही में एसोचैम द्वारा कराए गए एक सर्वे को मीडिया में उछाला जाना है जिसमें यह कहा गया कि यदि राहुल को कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन का काम सौंपा जाता तो यह काम शानदार ढंग से पूरा हो गया होता |</p>
<p style="text-align: justify;">खैर, अपना यूथ लेंस आउट ऑफ़ फोकस होता देखकर राहुल ने सीधे विपक्ष की जड़ों पर वार कर ध्यान खींचने की जोरदार कोशिश की है और उसमें वो कामयाब होते दिख रहे हैं लेकिन विश्लेषकों की माने तो इससे विकास और युवाओं की बात करने वाले राहुल की बची-खुची छवि भी नकारात्मक हो जाएगी |</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
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