हिंदी को ह्रदय से स्वीकारें |
0बगीचों में अलग-अलग रंग के फूल और उनका सुवास चारों ओर के वातावरण को स्फूर्ति दायक बना देता है. बच्चे,बूढ़े,जवान सभी का मन करता है कि बगीचे के आनंद का
हिंदी की अपने ही घर में दुर्दशा पर चिंता जाहिर करने के पहले एक घटना का जिक्र करना जरूरी समझता हूं जो हिंदी दिवस नामक रस्मअदायगी या प्रहसन को तार-तार
सिर्फ मातम-पुर्सी से काम नहीं चलने वाला है।हिन्दी भारत वर्ष में राज-काज की भाषा है,हमारे सम्मान की प्रतीक है,तो सभी प्रांतीय व स्थानीय भाषायें हिन्दी की बहनें।भारत-वर्ष में बोली जाने
सितम्बर हिन्दी के वार्षिक श्राद्ध का महीना है। हर संस्था और संस्थान इस महीने में हिन्दी दिवस, सप्ताह या पखवाड़ा मनाते हैं और इसके लिए मिले बजट को खा पी
बगीचों में अलग-अलग रंग के फूल और उनका सुवास चारों ओर के वातावरण को स्फूर्ति दायक बना देता है. बच्चे,बूढ़े,जवान सभी का मन करता है कि बगीचे के आनंद का
हिंदी की अपने ही घर में दुर्दशा पर चिंता जाहिर करने के पहले एक घटना का जिक्र करना जरूरी समझता हूं जो हिंदी दिवस नामक रस्मअदायगी या प्रहसन को तार-तार
सिर्फ मातम-पुर्सी से काम नहीं चलने वाला है।हिन्दी भारत वर्ष में राज-काज की भाषा है,हमारे सम्मान की प्रतीक है,तो सभी प्रांतीय व स्थानीय भाषायें हिन्दी की बहनें।भारत-वर्ष में बोली जाने
सितम्बर हिन्दी के वार्षिक श्राद्ध का महीना है। हर संस्था और संस्थान इस महीने में हिन्दी दिवस, सप्ताह या पखवाड़ा मनाते हैं और इसके लिए मिले बजट को खा पी
“चल रे मटकी टम्मक टू ….” को “जॉनी जॉनी यस पापा…..” के सामने न जाने कितनी दफा शर्मिंदा होना पड़ा , अ-अनार के सामने ए-ऐपल्ल का, हमेशा से ही भारी
एक के बाद एक हो रहे रेल हादसों ने मन को व्यथित कर दिया है ! रेलमंत्री जी इस सवाल पर बिना कोइ जवाब दिए निकल जा रही हैं !
यह तभी सम्भव है, जब मंत्रीजी रेलवे सुरक्षा एवं रेलवे संचालन से जुडे प्रावधानों को अंग्रेजी में बनाकर, अंग्रेजी नहीं जानने वालों पर जबरन थोपने वाले असली गुनेहगारों को भी सजा
संस्कृत मां, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है, ऐसा कथन डॉ. फादर कामिल बुल्के का है जो संस्कृत और हिन्दी की श्रेष्ठता को बताने के लिए सम्पूर्ण है। मगर आज