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हिंदी को ह्रदय से स्वीकारें  |

हिंदी को ह्रदय से स्वीकारें |

0 नितिन देसाई / 2010/09/16 5:01 pm

बगीचों में अलग-अलग रंग के फूल और उनका सुवास चारों ओर के वातावरण  को  स्फूर्ति दायक  बना देता है. बच्चे,बूढ़े,जवान सभी का मन करता है कि बगीचे के आनंद का

हिंदी की उपेक्षा का दोषी कौन ?

हिंदी की उपेक्षा का दोषी कौन ?

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/09/14 9:26 pm

हिंदी की अपने ही घर में दुर्दशा पर चिंता जाहिर करने के पहले एक घटना का जिक्र करना जरूरी समझता हूं जो हिंदी दिवस नामक रस्मअदायगी या प्रहसन को तार-तार

हिन्दी का महत्व व विड़म्बनायें

हिन्दी का महत्व व विड़म्बनायें

13 अरविन्द विद्रोही / 2010/09/14 8:46 pm

सिर्फ मातम-पुर्सी से काम नहीं चलने वाला है।हिन्दी भारत वर्ष में राज-काज की भाषा है,हमारे सम्मान की प्रतीक है,तो सभी प्रांतीय व स्थानीय भाषायें हिन्दी की बहनें।भारत-वर्ष में बोली जाने

राष्ट्रभाषा हिंदी को बांटने का कुचक्र

राष्ट्रभाषा हिंदी को बांटने का कुचक्र

1 विजय कुमार / 2010/09/14 8:34 pm

सितम्बर हिन्दी के वार्षिक श्राद्ध का महीना है। हर संस्था और संस्थान इस महीने में हिन्दी दिवस, सप्ताह या पखवाड़ा मनाते हैं और इसके लिए मिले बजट को खा पी

मेरी प्यारी हिन्दी,मुझे माफ करना

मेरी प्यारी हिन्दी,मुझे माफ करना

0 नवीन देवांगन / 2010/09/13 8:40 pm

“चल रे मटकी टम्मक टू ….” को  “जॉनी जॉनी यस पापा…..” के सामने न जाने कितनी दफा शर्मिंदा होना पड़ा , अ-अनार के सामने ए-ऐपल्ल का, हमेशा से ही भारी

ये क्या हो रहा है ममता दीदी ?

ये क्या हो रहा है ममता दीदी ?

0 पियूष कुमार द्विवेदी / 2010/07/22 8:25 pm

एक के बाद एक हो रहे रेल हादसों ने मन को व्यथित कर दिया है ! रेलमंत्री जी इस सवाल पर बिना कोइ जवाब दिए निकल जा रही हैं !

रेल दुर्घटना का जिम्मेदार अंग्रेजी भी …

रेल दुर्घटना का जिम्मेदार अंग्रेजी भी …

4 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/07/19 9:54 pm

यह तभी सम्भव है, जब मंत्रीजी रेलवे सुरक्षा एवं रेलवे संचालन से जुडे प्रावधानों को अंग्रेजी में बनाकर, अंग्रेजी नहीं जानने वालों पर जबरन थोपने वाले असली गुनेहगारों को भी सजा

राष्ट्रभाषा की दिनो दिन दुर्गती

राष्ट्रभाषा की दिनो दिन दुर्गती

2 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/06/01 8:46 pm

संस्कृत मां, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है, ऐसा कथन डॉ. फादर कामिल बुल्के का है जो संस्कृत और हिन्दी की श्रेष्ठता को बताने के लिए सम्पूर्ण है। मगर आज