सेक्स और समाज|Shortlink: 2009/09/18 6:47 pm

सेक्स चिंतन – 4

4 Comments

  • नमस्कार जयराम जी, आपका आलेख एक अलग सा सार्थक खुसबू बिखेरता है | हिंदी ब्लॉग जगत मैं मनोहर कहानियां ही ज्यादा चल रही हैं, आपका आलेख एक नई दिशा देता है, सोचने को मजबूर करता है | आप टिप्पणी की चिंता मत कीजिये, यदि एक-दो लोग भी आपका आलेख पढ़ते हैं तो मैं समझता हूँ की आपका लेखन सफल है |

    आप नई ऊर्जा के साथ ऐसे ही लगे रहिये |

  • जयराम "विप्लव"

    राकेश जी , आप क़ी टिप्पणियाँ हमारा उत्साहवर्धन करती हैं . आपने सही कहा “मनोहर कहानियां ही ज्यादा पढ़ी जाती है ” . मैंने भी इस विषय पर स्वस्थ विमर्श करते हुए ४-५ ब्लोगों को हीं देखा है परन्तु मस्त राम वाली चीजों पर सैकड़ों मिल जायेगी ! खैर ,चिंता का विषय नहीं है रौशनी दिखाने वाला सूरज एक ही होता है .आप के आलेख मैं पढता हूँ तो अपने विचारों को मजबूती मिलती है .

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    nice , i like it.thanks for this article

  • bahut achha laga aapka yah lekh..
    ummed hai ki aage v aise charchaye blog k jariye padhane ko milege.

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