सेक्स और समाज|Shortlink: 2009/10/21 5:08 pm

सेक्स चिंतन – 5

6 Comments

  • सेक्स चिंतन ! अच्छा title है …. 

  • "हम भौतिक सुख-सुविधाओं के अर्जन में समाज का ख्याल करते हैं अपना नहीं लेकिन आत्मिक /आध्यत्मिक  सुख के लिए समाज की चिंता सताने लगती है .अधिक से अधिक सुविधाओं को जुटाने के समय मन को समाज के बहुसंख्यक लोगों का ख्याल नहीं आता है . दूसरो का हक़ छीनते समय हमें किसी बात का ख्याल नहीं रहता है जबकि आत्मिक सुख / आत्मिक ज्ञान / आत्मिक अनुभव के सम्बन्ध में समाज की याद जोर मारने लगती है .हम समाज के चलन की हर एक बात का ध्यान रखते हैं . क्यों हम अपने सच को नहीं ढूंढ़ पाते हैं और संसार के अब तक की गलतियों में  फंस कर रह जाते हैं . "  -> इसपे सबको खुले मन से अपने अन्दर  झंकार कर प्रश्न करना चाहिए |
     
    बाजारवाद ने सेक्स का विकृत रूप ही पेश किया है और इसी विकृत रूप को आज हम सब कुछ मान बैठे हैं |

  • jayram bhaiya is lekh k liye sabse pahle to aapko bhahut bhaut dhanywaad………..parantu sex prem ki pahli sedi kaise hui??…….yahan pahli sedi ka kya arth hua??……….aur yadi sex hi pahli sedi hai to dusri kaun si hai??……….aur dusri sedi k prem ki tulna aap kisse karege??……….bhaiyaa kripyaa mera margdarshan kare……………..anoop aakash verma……wwwanoopverma@gmail.com…………..

  • जयराम "विप्लव"

    प्रिय अनूप जी , दरअसल आप किसी भ्रम में ना रहें . मान लीजिये आप ग्राउंड फ्लोर पर खड़े हैं और आपको ऊपर सातवे माले पर जाना है जहाँ आपका लक्ष्य है .तो आपको सीढियों को एक के बाद एक पार करके ही जाना पड़ेगा बगैर ऐसा किये आपका ऊपर जाना संभव नहीं है क्योंकि आप और हम साधारण मनुष्य हैं . हाँ यदि आप सुपरमेन या हनुमान होते तो शयद कूद -फंड कर पहुँच सकते थे वो भी बगैर सीढियों के . अब आप अपना लक्ष्य यानी मंजिल तय कीजिये आपकी मंजिल प्रेम की प्राप्ति हो या इश्वर की बात बराबर है . और आप तो जानते हैं प्रेम की raah में gyani purushon ne waasna को badhak maana है .तो kya आप bina is badha { pahli sidhi} को पार किये uski प्राप्ति कर सकते हैं . आप ऐसा kaise karnge yah आपको sochna है . waise asadharan manvon के liye kai raaste हैं . 

  • bhaiya mera margdarshan karne k liye aapka bahut bahut dhanywad……….anoop aakash verma…….

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