पिछले हफ्ते इण्डिया टुडे में छपी एक कवर स्टोरी पढ़ी। पढ़कर आश्चर्य चकित और चिंता भी बढ़ी। खबर थी “गोरी चमड़ी का काला धंधा”। यू तो हम लोगों ने अक्सर सुना व पढ़ा है कि वेश्यावृति में उतरने वाली ज्यादातर महिलाएं अपनी आर्थिक कमजोरी/तंगी के कारण इस रास्ते को चुनती है। यहीं वजह है कि आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों और देशो जैसे बंगाल, बिहार, आसाम, उड़ीसा, नेपाल, बंगलादेश , म्यांमार आदि जगहों से बहुतायत की संख्या में महिलाएं/लड़कियां लाई जाती रही है। लेकिन जैसे-जैसे भारतीय संस्कृति में आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति का समावेश हुआ और ऐशो-आराम के संसाधन बढ़ने लगे। वैसे-वैसे ही वे अपने काम से मुंह चुराने एवं ज्यादा से ज्यादा धनोपार्जन के लिए किसी भी हद तक गिरने में संकोच न करने की प्रवृति तेज होती गई। यहां तक की कुलीन वर्ग की महिलाएं एवं लड़कियां भी इस कुकृत्य को अत्यधिक धन कमाने का अपना पेशा बना लिया है।
कई युवा पीढ़ी बड़ी-बड़ी सोसाईटी में रहने वाले अपने रंग-ढंग, और फैशन को बरकरार रखने के लिए भी इन रास्तों पर चलने से गुरेज नहीं करती। यहां तक की मल्टी नेशनल कम्पनियों में कार्यरत महिलाएं अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए भी इस तरह के काम करती देखी या सुनी जा सकती है। कई बार तो खुद पत्नियों को अपने ही पति को समाज में प्रतिष्ठित करने, राजनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर दबदबा बढ़ाने के लिए आधुनिक समाज के वेश्यावृति से गुजरना पड़ता है। प्रेम प्रसंगों के कारण भी कई लड़कियां न चाहते हुए भी इस दल-दल में शामिल हो जाती है। ऐसे अनेक फिल्मों एवं कहानियों में हमने देखा और पढ़ा भी है कि कुछ पुरूष गांव जाकर भोली-भाली लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फांसकर उससे शादी कर शहर लाकर चंद रूपयों की लालच में इस अंधेरे कूप में उन्हें धकेल आते है। और जो लड़कियां/महिलाएं इस कालकोठरी में पहुंच जाती है वो चाहकर भी दुबारा इससे निकल नहीं पाती। कुछ ही खुशकिस्मत होती है जो सामाजिक संस्थाओं के प्रयास के कारण इस कीचड़ से निकल पाती है लेकिन सामाजिक प्रताड़ना व यातनाएं उन्हें इतनी झेलनी पड़ती है कि वो दुबारा न चाहकर भी लौट आती है।
मर्दों की तरह कई लड़कियां भी अनेक पुरूषों के साथ संबंध बनाना पसंद करती है। जिसके कारण भी वह परोक्ष रूप से इस गटर में शामिल हो जाती है। बहुत सी पाश्चात्य संस्कृति से ओत-प्रोत महिलाएं पतियों के साथ-साथ एक या दो अतिरिक्त दोस्त बनाकर रखना अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय मानती है।
इंडिया टूडे की कवर स्टोरी विशेषांक ‘‘गोरी चमड़ी का काला धंधा’’ में बताया गया है कि किस तरह देश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था के कारण लोगों में अर्थोपार्जन का जो दायरा बढ़ा है उससे इस धंधे ने भी काफी जोर पकड़ा है यहां तक की देशी के साथ विदेशी खासतौर से बड़े-बड़े देशों की महिलाएं/युवतियां जिन्हें गणिकायें भी कहा जाता है, काफी तादाद में भारतीय वेश्या बाजार के आधुनिकतम स्वरूप में शामिल हो रही है। फिर चाहे वो अखबारों में छपी आधुनिकतम मसाज पार्लरों के रूप में दिखाई दे या दोस्त बनाने के विज्ञापन के माध्यमों से। दरअसल इस तेजी के पीछे और भी कई सारे तथ्य सामने आ रहे है जैसे खाड़ी देशों एवं विकसीत देशों में आई आर्थिक मंदी इसका एक मुख्य कारण रही है। क्योंकि ऐसे लोग ज्यादातर परिश्रम हीनता के शिकार हो चुके होते है। वहीं भारत में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल के दौरान विश्व भर से आने वाले सैलानियों को ध्यान में रखकर अत्यधिक आय कमाने के लिए इन विदेशी गणिकाओं की मांग तेजी से बढ़ी है।
आज देश में कुल 30,000 विदेशी गणिकाए है जिसमें ज्यादातर दिल्ली में बसी हुई है और इनकी डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। कहा जाता है कि इनके पकड़े जाने पर भी विदेशी कानूनी पेच की वजहों से ये आसानी से भारतीय धाराओं से निकल जाती है। जिस वजह से यह काला कारोबार अंधेरे से दिन के उजाले में भी बेधड़क फैलता जा रहा है।
देश की संस्कृति पहले ही पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से काफी बदल चुकी है खासतौर से शहरों की। यही कारण है कि फैशन के आगे कई लड़कियां कड़ाके की ठंड से बेपरवाह दिखाई देती है। और ऐसे-ऐसे वस्त्र पहनने लगी है जो न सिर्फ तंग होती है बल्कि पहनने या न पहनने की इच्छा में भी संदेह बना रहता है।
कुछ महीने पहले दिल्ली के लोगों को विदेशी शैलानियों के साथ बर्ताव एवं अपने रहन-सहन, तौर-तरीकों में बदलाव लाने के लिए कई सारी सामाजिक गोष्ठियां एवं जन संदेश सरकार द्वारा जारी किये गये, जिनसे हम विदेशी सैलानियों के सामने सभ्य दिखाई दे।
लेकिन इस बात पर कभी चर्चा नहीं की गई कि उनके सेक्स को लेकर उनके खुले विचार और हमारे द्वारा नकल करने की प्रवृति के कारण भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक संरचना में कितना बदलाव या कहे नुकसान उठाना पड़ सकता है, ऐसा विचार तक नहीं किया गया। और ना ही उनके लिए कोई यूनीफोर्म कोड ऑफ कंडक्ट जैसे कानून लाने पर ही सोचा गया। इसलिए एक बात तो तय है कि भले ही कोमनवेल्थ गेम के देश में होने से विश्व के मानचित्र में भारत का कद बढ़ेगा और आय के नये-नये स्त्रोत खुलेंगे। लेकिन इससे होने वाले नुकसान के लिए हमे अवश्य तैयार रहने की जरूरत है।
गोरी चमड़ी की विदेशी गणिकाओं का भारत की आधुनिक वेश्या समाज में बढ़ती तादाद इसकी एक ट्रेलर मात्र है। आने वाले कुछ वर्षों में इसकी पूरी फिल्म भी हमें अवश्य दिखाई देगी।


nice……………………..
बहुत ही अच्छा लिखा है आपने ! कोमन वेल्थ के दौरान सेक्स व्यापार बढ़ने की बहुत अधिक संभावना है
नरेन्द्र निर्मल भाई आपने इंडिया टुडे में छपी कभर स्टोरी को पढ़ कर जो आपने अपनी अभिव्यक्ति ब्यक्त कि है वह सराहनीय है, हमको अपने अतीत में जाना होगा और जानना पड़ेगा कि आज कि जो युवा पीढ़ी है वह पाश्चात्य सभ्यता के तरफ क्यों अग्रसर हो रही है, हम माता पिता अपने बच्चो को अच्छे से अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाते है उनसे इंग्लिश मीडियम में पढाई कराते है ताकि समाज में मेरा एक उच्च स्थान बना रहे अपने स्टेटस सिम्बल के लिए मै उनको इस रास्ते पर अग्रसर करते है और जब बच्चे बड़े होकर पूरी तरह पाश्चात्य सभ्यता को अपनालेते हैं तो हम उनको दोषी बनाते है, जब कि गलती उनकी नहीं है, यह गलती मेरी है लेकिन हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे. युवा पीढ़ी बुरी नहीं है हमने उन्हें बुरा बनाया है, मनी माइंड हमने उनको बनाया है, लेकिन दोष यह है कि हम अपनी गलती स्वीकार नहीं करेंगे.
अजय केशरी, http://samaytimes.blogspot.com/
yes it is true I agree with you
भाई मध्य प्रदेश का मुख्या मंत्री भी गाव गाव गली गली कन्या पूजन कर रहा है उसी के सामने एक भ्रष्ट पुलिस सेवा का अधिकारी एक माँ जो अपनी सात माह की बच्ची को दूध पिला रही थी थप्पड़ मर दे रहा है …. तो देश वासियों देश के भ्रष्ट नेताओ,मंत्रियो,संत…रियो और अधिकारिओ के लिए गरीब बेटिया अय्यासी का साधन मात्र है ,देश की भ्रष्ट कांग्रेस सरकार तो बेटियों की देह के व्यापार के लिए लाइसेंस तक देने की तैयारी कर रही जिसमे देश और विदेश के बड़े बड़े निवेशक हिस्सा लेंगे और भारत सरकार देश का सारा कर्ज देश की गरीब बेटियों की आबरू का सौदा करके चूका देगी ..आपको सर्कार की योजना २०१४ कैसी लगी..भावी बाजार तैयार करने के किये यौन शिक्षा की तैयारी भी सर्कार कर रही है जिससे बेटियों की मार्केटिंग भी नहीं करनी पड़ेगी…..
problam is verry begest. but how solved this problam