भारत पर जबरन थोपे गये राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचन्द गाँधी के जीवन पर इंगलैण्ड के सुप्रसिद्ध इतिहासकार जेड ऐडम्स ने अपने पंद्रह वर्ष के लम्बे अध्ययन और गहन शोधों के आधार पर 288 पृष्ठ की एक किताब लिखी है। जिसे “Gandhi : Naked Ambition” नाम दिया गया है। जिसका हिन्दी अनुवाद किया जाये तो इसे-”गाँधी की नग्न महत्वाकांक्षा” नाम दिया जा सकता है। इस किताब को आधार बनाकर अनेक भारतीय लेखकों ने भी गाँधी पर लिखने का साहस किया है, बल्कि यह कहना अधिक उचित होगा कि उक्त किताब के बहाने गाँधी के यौन जीवन पर उंगली उठाने का साहस जुटाया है। गाँधी को यौन कुण्ठाओं से ग्रस्त बताने वाले उक्त लेखक की पुस्तक की आड में अनेक भारतीय लेखक स्वयं भी अपनी अनेकों प्रकार की दमित कुण्ठाओं को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। मैं भी इनमें से एक हूँ और उक्त पुस्तक के बहाने मैं भी गाँधी पर थोडा खुलकर लिखने का खतरा उठा रहा हूँ। आशा करता हूँ कि सुधिपाठक बिना पूर्वाग्रह अपनी अभिव्यक्तियाँ देंगे।
उक्त पुस्तक में गाँधी के ब्रह्मचर्य के प्रयोगों और इन प्रयोगों में शामिल स्त्रियों के संक्षिप्त उद्गारों के आधार पर यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया है कि गाँधी ब्रह्मचर्य के प्रयोगों के नाम पर 16 वर्ष की कमसिन लडकियों, युवतियों तथा अधेड भारतीय तथा विदेशी महिलाओं के साथ अन्तरंगता से संलिप्त थे। गाँधी स्वयं निर्वस्त्र होकर, इन स्त्रियों को नंगी होकर अपने साथ सोने एवं बन्द बाथरूम में अपने साथ नहाने को सहमत या विवश किया करते थे। गाँधी के आश्रम के कुछ लोगों ने इन गतिविधियों पर दबी जुबान में आपत्ति भी की थी, जिन्हें गाँधी एवं गाँधी के अनुयाईयों की असप्रसन्नता का शिकार होना पडा। यहाँ तक की गाँधी के समय के अनेक वरिष्ठ स्वतन्त्रता सैनानियों ने इसी कारण गाँधी से दूरियाँ बना ली थी और वे यदाकदा ही उनसे बहुत जरूरी होने पर, सार्वजनिक बैठकों या कार्यक्रमों में औपचारिक रूप से मिला करते थे। जिनमें सरदार वल्लभ भाई पटेल भी शामिल थे। मेरे पास जितनी जानकारी उपलब्ध है, उसके अनुसार इस किताब में ऐसा काफी मसाला है, जिसे आज की जिज्ञासु युवा पीढी आठ सौ रुपये में खरीदकर पढना चाहेगी!
यद्यपि गाँधी के यौन जीवन पर उंगली उठाना आज के समय में उतना खतरनाक नहीं रहा है, जितना कि तीस वर्ष पहले हो सकता था। भारतीय राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम के उदय के साथ-साथ गाँधी और काँग्रेस के बारे में बहुत कुछ आम जनता को ज्ञात हो चुका है। अतः वर्तमान में गाँधी पर लिखने में उतना खतरा नहीं है, बल्कि गाँधी पर लिखने में प्रचारित होने और माल कमाने का पूरा अवसर है। उक्त किताब के लेखक ने भी यही किया है। मात्र 288 पृष्ठ की पुस्तक की कीमत आठ सौ (800) रुपये देखकर कोई भी समझ सकता है कि किताब को लिखने के पीछे कमाई करना ही बडा लक्ष्य है।
मेरा मानना है कि आज की युवा और पौढ पीढी बहुत संजीदा, जागरूक है और सच्चाई को जानने को उत्सुक है। इस देश में गाँधी को बेनकाब करने वालों को जानने के साथ-साथ और गाँधी को बेनकाब होते हुए देखने वालों की अच्छी-खासी तादाद है। इसलिये किताब भी बिकेगी और वर्ड की बेस्ट सेलर बुक्स में भी शामिल हो सकती है। इसके बावजूद भी मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि गाँधी को चाहे कितना ही बेनकाब किया जाये, अभी वह समय नहीं आया है, जबकि गाँधी की मूर्तियों को तोडने के लिये सरकारी आदेश जारी किये जायें। लेकिन एक दिन ऐसा अवश्य आयेगा, जबकि इस कथित ढोंगी महात्मा का सच इस देश की जनता के साथ-साथ इस देश की सरकार भी स्वीकारेगी! मुझे व्यक्तिगत रूप से गाँधी के “उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन” या “ब्रह्मचर्य के प्रयोगों के बहाने सेक्स की तृप्ति” को लेकर उतनी आपत्ति नहीं है, जितनी कि गाँधी द्वारा अनेक महिलाओं के सेक्स एवं पारिवारिक जीवन को बर्बाद करने को लेकर है और इससे भी अधिक आपत्तिजनक तो गाँधी को इस देश पर “महात्मा एवं राष्ट्रपिता” के रूप में थोपे जाने पर है।
जहाँ तक गाँधी या नेहरू या अन्य किसी भी ऐसे व्यक्ति के सेक्स जीवन को उजागर करने या सार्वजनिक रूप से उछालने की बात है, जो आज अपना पक्ष रखने के लिये दुनिया में जीवित नहीं है, ऐसा करना न तो नैतिक रूप से उचित है और न हीं कानूनी रूप से ऐसा करना न्यायसंगत! सेक्स किसी भी व्यक्ति के जीवन में नितान्त व्यक्तिगत और महत्वपूर्ण विषय है। जिसे न तो उघाडा जाना चाहिये और न हीं प्रचारित या प्रसारित किया जाना जरूरी है। उक्त पुस्तक के लेखक ने अपने शोध में गाँधी को दमित सेक्स कुण्ठाओं से ग्रस्त पाया है। यदि गुपचुप सेक्स करना कुण्ठाग्रस्त होना नहीं और ब्रह्मचर्य के प्रयोग के नाम पर अपनी मनपसन्द स्त्रियों के साथ यौन सुख पाना कुण्ठाग्रस्त होना है तो लेखक की बात से सहमत होने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिये, लेकिन यह सच नहीं है। क्योंकि यौन विषयों पर हमारे देश में सार्वजनिक रूप से चर्चा करना भी अश्लीलता माना जाता है, लेकिन आज का युवा थोडी हिम्मत दिखाने का प्रयास कर रहा है। परन्तु इस देश का ढाँचा इस प्रकार से बनाया गया है या कालान्तर में ऐसा बन गया है कि सार्वजनिक रूप से समाज अपने ढाँचे से बाहर किसी को निकलने की आजादी नहीं देता। बेशक चोरी-छुपे आप कुछ भी करो।
इस सन्दर्भ में हाल ही में दक्षिण भारतीय फिल्मों की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री खुश्बू के बयान (विवाह पूर्व सुरक्षित सेक्स अनुचित नहीं) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राधा-कृष्ण के बिना विवाह किये साथ रहने को लेकर की गयी टिप्पणी को पढकर अनेक लोगों ने स्वयं को प्रचारित करवाने के लिये या वास्तव में सुप्रीम कोर्ट को सबक सिखाने के लिये हंगाया किया था। म. प्र. हाई कोर्ट में रिट भी दायर की गयी। लेकिन कौन नहीं जानता कि आज या बिगत मानव इतिहास में अपवादों को छोडकर मनचाहा और ताजगीभरा सेक्स पाना, हर उम्र के स्त्री और पुरुष की मनोकामना रही है। हाँ सेक्स के मार्ग में भटकन एवं फिसलन हमेशा रही है। जिसमें कभी न कभी हमारे पूज्यनीय समझे जाने वाले ऋषियों से लेकर आज तक के युवा भटकते रहे हैं।
जहाँ तक मोहनदास कर्मचन्द गाँधी के यौन-जीवन पर सार्वजनिक चर्चा का सवाल है तो हम सब जानते हैं कि गाँधी एक अत्यन्त तीक्ष्ण बुद्धि के स्वामी और धर्म का लबादा ओढकर लोगों को मूर्ख बनाने में दक्ष व चालाक किस्म के राजनीतिज्ञ थे। जिसने बडी आसानी से दस्तावेजों पर यह सिद्ध कर दिया कि अंग्रेजों की अदालत द्वारा सुनाई गयी फांसी की सजा से भगत सिंह एवं उसके साथियों को बचाने में उनका (गाँधी का) का भरसक प्रयास रहा, लेकिन इसके बावजूद भी भगत सिंह एवं उनके साथियों को नहीं बचाया जा सका।
जबकि सच्चाई सभी जानते हैं कि गाँधी के कारण ही आजाद भारत को भगत सिंह एवं सुभाष चन्द्र बोस जैसे सच्चे सपूतों की सेवाएँ नहीं मिल पायी। गाँधी को भगत सिंह एवं सुभाष चन्द्र बोस तथा इनके सहयोगी फूटी आँख नहीं सुहाते थे। ऐसे व्यक्तित्व के धनी मोहनदास कर्मचन्द के बारे में उक्त किताब लिखी गयी है। जिसके बारे में बहुत सारे लोग जानते हैं कि गाँधी कभी भी अपनी पत्नी के साथ यौन सम्बन्धों से सन्तुष्ट नहीं थे (अधिकतर भारतीयों की भी यही दशा है), इसलिये उसने एक ऐसा बुद्धिमतापूर्ण, किन्तु चालाकी भरा रास्ता खोज निकाला, जिस पर गाँधी के तत्कालीन समकक्षों में भी दबी जुबान तक में विरोध में आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी और जीवन पर्यन्त गाँधी ऐसा ही ढोंगी बना रहा।
आजादी के बाद भी गाँधी को ढोंगी कहने की हिम्मत जुटाने के बजाय, हमने स्वयं को ही ढोंगी बना लिया और गाँधी को इस देश के “राष्ट्रपिता” के रूप में थोप लिया। वैसे देखा जाये तो ठीक ही किया, क्योंकि इस देश के राष्ट्रपिता स्वामी विवेकानन्द या स्वामी दयानन्द सरस्वती तो हो नहीं सकते थे! क्योंकि जिस देश की संस्कृति ऋषियों की अवैध औलाद (वेदव्यास) की अवैध सन्तानों से (नियोग के बहाने) संचारित होकर महाभारत की गाथा को आज तक गर्व के साथ गाती और फिल्माती हो, उस देश की आधुनिक सन्तानों का सच्चा राष्ट्रपिता यौनेच्छाओं की खुलकर तृप्ति करने वाला मोहनदास कर्मचन्द गाँधी ही हो सकता था।
अन्त में उपरोक्त के अलावा तीन बातें और कहना चाहूँगा-
1. पहली गाँधी दमित सेक्स या यौन कुण्ठाओं से ग्रस्त नहीं था, बल्कि वह अन्त समय तक खुलकर यौनसुख भोगने वाला ऐसा नाटककार और मुखौटे पहने जीवन जीने वाला भोगी था, जिसने जीवनभर स्वयं की पत्नी या अपने परिवार की तनिक भी परवाह नहीं की और जिसने अपनी राजनैतिक इच्छा पूर्ति के लिये केवल इस राष्ट्र के टुकडे होना ही स्वीकार किया, बल्कि कूटनीतिक तरीके से ऐसी परिस्थितियाँ निर्मित कर दी कि भारत के टुकडे होकर ही रहें।
2. दूसरी बात जिसे बहुत कम लोग जानते हैं कि गाँधी केवल अंग्रेज सरकार एवं अंग्रेजी प्रशासन के अन्याय या मनमानियों के विरुद्ध ही अनशन (उपवास) नहीं करता था, बल्कि उसने इस देश के 70 प्रतिशत दबे-कुचले और दमित लोगों के मूलभूत और जीवन जीने के लिये जरूरी हकों को छीनने के लिये भी अनशन का सफल नाटक किया। जिसके दुष्परिणाम इस देश को सदियों तक भुगतने पडेंगे। गाँधी के इसी षडयन्त्र की अवैध सन्तान है-अजा, अजजा एवं अन्य पिछडा वर्ग को नौकरियों में एवं अजा व अजजा को विधायिका में लुंजपुंज और कभी न खत्म होने वाला आरक्षण।
3. अन्तिम और तीसरी बात-जहाँ तक भारत के इतिहास और वर्तमान को देख कर ईमानदारी से आकलन करने की बात है तो गाँधी से भी अधिक कामुक और यौन लालायित हर आम स्त्री-पुरुष होता है, लेकिन स्त्री को तो हमने अनेक प्रकार की बेडियों में जकड रखा है, जबकि आम साहसी पुरुष यौनसुख हेतु मिलने वाले अवसरों को भुनाने से कभी नहीं चूकता। चूँकि गाँधी, नेहरू, बिल क्लिण्टन या कृष्ण ऐसे बडे व्यक्तित्व हैं, जिनके निजी जीवन की अन्तरंग बातें भी गोपनीय नहीं रह पाती हैं। इसीलिये इन पर किताबें लिखी जायेंगी, बहसें होंगी, अदालतों में याचिकाएँ दायर होंगी और कुछ लोग सडकों पर आकर भी धमाल मचा सकते हैं, लेकिन इसमें कुछ भी अस्वाभाविक या अनहोनी बात नहीं है। यह सब प्राकृतिक है। किसी भी जीव का अध्ययन करके देखा जा सकता है-अनेक मादाओं के झुण्ड में कोई एक शेर, एक बन्दर, एक सियार, एक चीता, एक सांड, एक भैंसा, एक बकरा या एक कुत्ता पाया जाता है और सन्तति का क्रम बिना व्यवधान चलता रहता है। यह अलग बात है कि आधुनिक नारी भी पुरुष की ही भांति प्रत्येक यौन-संसर्ग के दौरान यौनचर्मोत्कर्स की उत्कट लालसा की अवास्तविक और असम्भव कल्पनाओं में विचरण करने लगी है। दुष्परिणामस्वरूप ऐसी राह भटकी महिलाओं में से लाखों को हिस्टीरया जैसी अनेक मानसिक बीमारियों से पीडित होकर, घुट-घुट कर मरते हुए देखा जा सकता है।
लेकिन सवाल उठता है कि ऐसा क्यों? इस सवाल पर विस्तार से लिखने की जरूरत है, लेकिन संक्षेप में इतना ही लिखना चाहूँगा कि सेक्स दो टांगों के बीच का खेल नहीं(जैसा कि समझा जाता है) , बल्कि यह स्वस्थ मनुष्य के दो कानों के बीच (दिमांग) का खेल है। यदि और भी सरलता से कहा जाये तो शारीरक रूप से पूरी तरह स्वस्थ स्त्री-पुरुष के बीच सेक्स 20 प्रतिशत शारीरिक और 80 प्रतिशत मानसिक होने पर ही सुख या चर्मोत्कर्स या चर्मबिन्दु पर पहुँचने का आनन्द लिया जा सकता है। अन्यथा तो सेक्स पुरुषों की क्षणिक कामाग्नि के उबाल को शान्त करने का साधन और स्त्रियों की कामाग्नि प्रज्वलित करने वाली एक आवश्यक बुराई के सिवा कुछ भी नहीं है।


नमस्कार डा ० पुरुषोत्तम मीणा और जनोक्ति टीम,
राष्ट्रपिता के बारे में डा ० पुरुषोत्तम मीणा जैसे भारतीय बुद्धिजीवी के मन मस्तिस्क में जो विचार है, वह् कुण्ठित और अपनी popularity को भुनाने का एक तरिका मात्र है । आज बहुत अफ़्सोश् हो रहा है कि जनोक्ति में प्रकाशित इस लेख में गाँधीजी के बारे में लिखी बातें कहीं से भी प्रमाणित प्रतीत नही होती और लेखक नें सिर्फ एक विदेशी लेखक को सत्यवादी हरिशचंद मानकर आपने पूर्वाग्रह का परिचय दिया है | लेख में प्रयुक्त अमर्यादित टिपण्णीयों ने पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ अपनी दुकान चलाने का कम किया है.
— प्रवीन चन्द्र रॉय pravincroy@gmail.com
समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी लोग गांधीवाद का ‘ग’ भी नहीं जानते पर उन पर ऊँगली उठाने से बाज़ नहीं आते. एक इंसान जिसने देश ही नहीं वरन दुनिया के लिए अपनी सारी जिंदगी समर्पित कर मानवता का एक नया सन्देश हमें पढ़ाया. ऐसे बहुत सारे लोग हमारे समाज में हैं जिन्होंने गांधी पर तो कम किताबें पढ़ी हैं परन्तु गांधी की छवि को धूमिल करने वाली किताबें पढ़ कर अपनी अभिमती बना लेते हैं. डा०पुरुषोत्तम मीणा को मैं यह कहना चाहूँगा की आप चाहे जो राय गांधी के बारे में रखते हो. पर महानायकों की निजी जिंदगी देश के लिए महत्वपूर्ण नहीं है. हमें यह देखना चाहिए की उन्होंने देश के लिए क्या किया. इतिहास भी महानायकों के इसी तथ्य का अध्ययन करता है.
मिर्च मसाला जैसी बाते बनाकर राष्ट्रपिता को बदनाम करने की कोशिशे की गयी है! एक बात ध्यान में रखनी चाहिए की महात्मा गाँधी जी और पंडित नेहरु में काफी फर्क है! रास्ते…सोच…विचार धारा कुछ भी हो लेकिन एक अत्यंत आदरणीय नेता के बारे में ऐसी बाते लिखना गलत है! बोलने वालों की जबान और लिखने वालों के हाथ पकडे नहीं जाते …..हमें वैचारिक आज़ादी है लेकिन कुछ भी कहने का तरीका निंदनीय है! ऐसे विधान देश में अशांति का माहौल बनाते है! स्व.गाँधी जी के विचार या व्यक्तित्व हर एक की समझ में आएगा ऐसी उम्मीद रखना व्यर्थ है! आज के नादाँ…सुविधाभोगी….भ्रष्ट नेता जब गाँधी का नाम जबान पर लाते है तो बड़ा गुस्सा आता है!
पत्रकार महाशय,
उक्त लेख में कई ब्याकर्निय अशुद्धियाँ रह गयी हैं.
श्री गाँधी यकीनन एक विवादस्पद व्यक्तित्व हैं! मगर कौन नहीं होता बल्कि हर महान व्यक्ति के उद्देश्यों में स्वार्थ निकलने की कोशिश की जाती है और चूँकि सेक्स टैबू है इसलिए उसको कुंठित बताना कोई नयी बात नहीं! ऐसा हमेशा से होता आया है! यकीनन मानिये कांशीराम जी के ऊपर भी ऐसे आरोप लगाये जायेंगे क्योकि उन्होंने देश की राजनीति में मौन क्रांति लायी है! श्री गाँधी यौन कुंधित हो या १६ १८ साल की लड़कियों के साथ नहाते हों एक शातिर कुटिल व्यक्ति हो मगर हमारे बापू हैं! और कमसे कम मैं अपने बाप की हर बुराई में अच्छाई देखता हूँ! श्री गाँधी एकलौते राज ऋषि थे जिन्हें राष्टपिता के आलावा किसी और नाम से पुकारना संभव नहीं! बापू पर सांप्रदायिक होने के भी आरोप लगे हैं मगर उसी सांप्रदायिक बुद्दे में इतना दम था की अपने अनशन के बल पर दंगों को रुक्जाने पर मजबूर करता था! गालियाँ दी जाए या पूजा जाए जब जब भारत की बात होगी श्री गाँधी के बगैर पूरा व्याख्यान अधुरा होगा
आपके लेखन में और पैनापन आसकता था अगर आप इसे विश्लेषण और मध्यस्ता से लिखते!
पुरुषोत्तम दास जी गाँधी जी के चरित्र पर एक अंग्रेज द्वारा लिखी पुस्तक (Gandhi :Naked Ambition) पढ़ कर जो आपने अपनी अभिव्यक्ति दी है वह सराहनीय है और आपके हिम्मत कि दाद देनी पड़ेगी कि आपके जैसा महान व्यक्ति इस देश में पैदा लिया है जो अपने बुजुर्गों का मरनो उपरांत चिर-हरण करने से बाज़ नहीं आता, यह लिखने कि आज़ादी आपको गाँधी ने दिलाई है वर्ना गुलाम देश में आप यह भी नहीं लिख पाते. हम भारतीय है बुजुर्गो को सम्मान देना हमारी विरासत में है, हम अंग्रेज नहीं है जहाँ चरित्र नाम कि कोई चीज ही नहीं है उसने एक पुस्तक लिख दी और आपने पढ़ कर गाँधी जैसे महान व्यक्ति के चरित्र पर ही उंगली उठा दी,
aapne ek lekhak ki likhi pustak ke ithas ko to sach man liya. kintu purusottam nagesh oak dwara likhit pustak ke tattyon per gour aaj tak kisi ne nahi kiya.
50 sal pichhe to chale gaye magar 200 sal pichhe nahi gaye ki videshi muslim aattaiyon ne hindustan ka kya hasra kiya? aur ab vartman me moujood neta log kar rahe hai.
jo mar gaye un per anguli uthne ka, anguli karne ka sahas to hai.
jinda logo per utha kar dekhooooooooo
aapka sab (daily rutten tak) kaisa band kar dete hain.
समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी लोग गांधीवाद का ‘ग’ भी नहीं जानते पर उन पर ऊँगली उठाने से बाज़ नहीं आते. एक इंसान जिसने देश ही नहीं वरन दुनिया के लिए अपनी सारी जिंदगी समर्पित कर मानवता का एक नया सन्देश हमें पढ़ाया. ऐसे बहुत सारे लोग हमारे समाज में हैं जिन्होंने गांधी पर तो कम किताबें पढ़ी हैं परन्तु गांधी की छवि को धूमिल करने वाली किताबें पढ़ कर अपनी अभिमती बना लेते हैं.आप चाहे जो राय गांधी के बारे में रखते हो. पर पूर्वाग्रह से ग्रसित मत होयें. साम्राज्यवादी लेखक के एक किताब ने तो आपको प्रभावित कर दिया परन्तु दुनिया भर के हजारों इतिहासकार और विद्वानों ने जो गांधी के बारे में लिखा वह आप झूठी साबित करने का प्रयास कर रहे हैं. शायद गांधी के बारे में आप ही को सत्य पता है और सभी अनभिज्ञ हैं. या फिर ये गोपनीयता आपके और गांधी के बीच में ही थी. किसी भी महानायक पर लांछन लगाने से पूर्व अनुसंधान करें और फिर उनका मूल्यांकन कर अपनी अभिमती बनाये. आप पत्रकारिता से जुड़े हैं तो आपको ‘वस्तुनिष्ठता’ तो ज़रूर मालूम होगी. इसी को धयान में रखते हुए आलेख लिखे. इसीलिए मेरी आपसे यह गुजारिश है की इतिहास का अध्ययन पुनः करें. फिर विषय का चुनाव करें. फिर उस विषय पर शोध और अनुसंधान करें और फिर ऐसे लेख लिखे.
आज UNO २ अक्टूबर को अंततराष्ट्रीय शान्ति दिवस मना रहा. नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर ये सब व्यक्तित्व गांधीवाद के कारण दुनिया में अपनी पहचान बनाये. अलबर्ट आइन्स्टाइन ने भी कहा था गांधी के बारे में – “शायद ही आने वाली पीढ़ी इस बात पर यकीन करेगी की दुनिया में हाड-मांस का ऐसा पुरुष चला होगा”.गांधीवाद को समझे-जाने फिर कुछ लिखे या बोले. इंडिया टी.वी की तरह नहीं की कुछ भी बोल दे और दिखा दे.
ऐसी ओछी बातें करना बंद करें. मैं गांधीवादी नहीं हूँ. मुझे जितने गांधी अच्छे लगते हैं उतने ही सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह,चंद्रशेखर आज़ाद. जितने कार्ल मार्क्स पसंद हैं उतने ही विवेकानंद. सभी की अलग-अलग विचारधारा थी और सबका उद्देश्य समाज का कल्याण करना था. महानायको के बारे में कोई गंभीर विषय भी लिखे. महानायकों के सेक्स जीवन को ही उभारना है तो आपको अभी बहुत शोध और अनुसन्धान करने पड़ेंगे. मेरे विचार से अभी आप इस लेख के लिए परिपक्व नहीं है.
भाई मीणा जी आप क्या बोल गए आप को पता भी है
गलती आप की भी नहीं
क्या करे लोक तन्त्र है
कभी इतहास नहीं देखा आपने
मेरे पास शब्द नहीं आप से बोल ने के लिए क्या कहे आप को
मीणा आप क्या बोल गए आप को नहीं पता
गलती आप की भी नहीं
क्या करे लोक तन्त्र है
कभी इतहास नहीं देखा आपने
मेरे पास शब्द नहीं आप से बोल ने के लिए क्या कहे आप को
तुम पागल हो कय अपने बाप का असा अपमान कर सकता है कोई
@मीणा जी
उपरोक्त सभी पाठकों की आपत्ति जायज़ है ,आपका ये लेख अपने आपको ब्लॉग जगत के पटल पर लोकप्रिय बनाने की कवायद का हिस्सा भर प्रतीत होता है और कुछ नहीं
अब की बार बात गांधी जी की है तो आपको एक सुझाव देना चाहूँगा और ये मेरा आपसे निजी निवेदन भी है की कृपया एक बार इस किताब को अवश्य पढ़ें और उसके बाद अपने विचार और जो भी आपको समझ में आये और उचित लगे उसे भी एक पोस्ट के माध्यम से हम सबके साथ साझा करें
My Experiments with Truth
इससे आपको गाँधी जी के सेक्स के प्रति क्या विचार थे और कैसे उन्होंने अपने युवाकाल में वासनाअधीन होने पर पश्चाताप किया था वो भी पता चलेगा ,साथ ही घनश्याम दास बिरला का नाम भी आपने अवश्य सुना होगा ,घनश्याम दस बिरला जी की पहली पत्नी का बहुत जल्दी ही एक बिमारी के कारण निधन हो गया था ,उसके बाद उन्होंने दूसरा विवाह किया परन्तु दुर्भाग्यवश कुछ समय के पश्चात उनकी दूसरी बीवी भी चल बसी ,अब वो तीसरा विवाह करने ही वाले थे लेकिन वो गांधी जी ही थे जिन्होंने उन्हें एक पत्र लिखकर कहा था की -
” वासनाओं पर नियंत्रण पाना अत्यधिक कठिन है परन्तु यह हमारा कर्तव्य है “
अंत में ऊपर एक सज्जन द्वारा आपको समर्पित एक कविता जैसे कमेन्ट को थोड़े संशोधन के साथ आपके लिए ही लिखना चाहूँगा की -
मीणा जी आप क्या बोल जाते हैं ये आपको भी नहीं पता होता
गलती आप की भी नहीं है
क्या करे लोक तन्त्र है
आपने इतिहास बहुत देखा है लेकिन practical नहीं
मेरे पास शब्द नहीं आप से बोल ने के लिए क्या कहे आप को ????????
श्री गाँधी यौन कुंधित हो या १६ १८ साल की लड़कियों के साथ नहाते हों एक शातिर कुटिल व्यक्ति हो मगर हमारे बापू हैं! और कमसे कम मैं अपने बाप की हर बुराई में अच्छाई देखता हूँ!
@शफीकुर रहमान खान युसुफजई भाई की इस बात से पूरी तरह से असहमत हूँ की वो हमारे बापू हैं तो उनकी हर गलत से गलत बात को भी सही मान लिया जाए और अपनी आँखें बंद कर ली जाएँ, अगर कल को वे आपके घर की किसी स्त्री के साथ ऐसा करें तब भी क्या आप उनकी इस बुराई में अच्छाई देखेंगे ?
असल बात ये है की बापू का जीवन चरित्र से कहीं उन बातों की गंध तक नहीं आती जो की मीणा जी के द्वारा अपने लेख में एक पुस्तक पर यकीन करके लिखी गयीं हैं ,अगर ये सब सच है तो निश्चित ही उन्होंने गलत किया लेकिन इसका प्रमाण दिया जाना अति-आवश्यक है ,बिना प्रमाण के किसी पर कीचड उछालना अच्छी बात नहीं
डाक्टर पुरषोत्तम मीणा जी, आपके द्वारा लिखा लेख तो बहुत अच्छा है लेकिन क्या हमने कभी अपने आप को देखा है, जो हर वक्त दुसरो पर कीचड़ उछालते रहते है, हमे दुसरो की कमियां निकलने से पहले अपने आप को देखना चाहिए, ये दौर बीती बातों को याद कर समय पास करने का नहीं है, बल्कि हमे तो अब अपने देश की तरकी के बारे में सोचना चाहिए, रहा सवाल महात्मा गाँधी जी का, तो ये समझ लीजिये कि समाज हमेशा एक प्रतिष्ठित व्यक्ति पर ही ऊँगली उठता है, कभी किसी गरीब को विवादों में घिरते हुए देखा है
धन्यवाद !
जे. कुमार – jeetumedia@gmail.com
बड़े बड़े लोग और बड़ी बड़ी बातें. लेकिन पीढ़ी दर पीढ़ी इतिहास पुरुषों का मूल्याङ्कन होता है, और आज मोहन दास करम चंद को गाली देने वाले बहुत मिलते हैं. मीणा जी को कोटिशः साधुवाद जिसने देश की वर्तमान परिस्थिति के लिये जिम्मेदार नेता के बारे में बहस करने का सहस किया.
यहाँ पर अधिकतर पाठक गॉधी जो के बोर में लिखे गये आलेख के बारे में अनेक प्रकार की बातें लिख रहे हैं। मुझे नहीं पता कि आप में से कितने गाँधी के अन्धे भक्त हैं। उनमें से ऐसे कितने हैं, जिन्होंने गाँधी को काँगेस की दृष्टि के बजाय, भगत सिंह या सुभाष बाबू या सरदार पटेल या आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय की लडाई के संस्थापक कांशीराम की नजरों से देखा है? परन्तु मैं इसी लेख के निम्न मुद्दों पर आपके विचारों को जानने की उम्मीद करतीहूँ :-
“गाँधी को यौन कुण्ठाओं से ग्रस्त बताने वाले उक्त लेखक की पुस्तक की आड में अनेक भारतीय लेखक स्वयं भी अपनी अनेकों प्रकार की दमित कुण्ठाओं को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। मैं भी इनमें से एक हूँ और उक्त पुस्तक के बहाने मैं भी गाँधी पर थोडा खुलकर लिखने का खतरा उठा रहा हूँ।”
“गाँधी के आश्रम के कुछ लोगों ने इन गतिविधियों पर दबी जुबान में आपत्ति भी की थी, जिन्हें गाँधी एवं गाँधी के अनुयाईयों की असप्रसन्नता का शिकार होना पडा। यहाँ तक की गाँधी के समय के अनेक वरिष्ठ स्वतन्त्रता सैनानियों ने इसी कारण गाँधी से दूरियाँ बना ली थी और वे यदाकदा ही उनसे बहुत जरूरी होने पर, सार्वजनिक बैठकों या कार्यक्रमों में औपचारिक रूप से मिला करते थे। जिनमें सरदार वल्लभ भाई पटेल भी शामिल थे।”
“अतः वर्तमान में गाँधी पर लिखने में उतना खतरा नहीं है, बल्कि गाँधी पर लिखने में प्रचारित होने और माल कमाने का पूरा अवसर है। उक्त किताब के लेखक ने भी यही किया है। मात्र 288 पृष्ठ की पुस्तक की कीमत आठ सौ (800) रुपये देखकर कोई भी समझ सकता है कि किताब को लिखने के पीछे कमाई करना ही बडा लक्ष्य है।”
“इस देश का ढाँचा इस प्रकार से बनाया गया है या कालान्तर में ऐसा बन गया है कि सार्वजनिक रूप से समाज अपने ढाँचे से बाहर किसी को निकलने की आजादी नहीं देता। बेशक चोरी-छुपे आप कुछ भी करो।”
“कौन नहीं जानता कि आज या बिगत मानव इतिहास में अपवादों को छोडकर मनचाहा और ताजगीभरा सेक्स पाना, हर उम्र के स्त्री और पुरुष की मनोकामना रही है। हाँ सेक्स के मार्ग में भटकन एवं फिसलन हमेशा रही है। जिसमें कभी न कभी हमारे पूज्यनीय समझे जाने वाले ऋषियों से लेकर आज तक के युवा भटकते रहे हैं।”
“गाँधी एक अत्यन्त तीक्ष्ण बुद्धि के स्वामी और धर्म का लबादा ओढकर लोगों को मूर्ख बनाने में दक्ष व चालाक किस्म के राजनीतिज्ञ थे। जिसने बडी आसानी से दस्तावेजों पर यह सिद्ध कर दिया कि अंग्रेजों की अदालत द्वारा सुनाई गयी फांसी की सजा से भगत सिंह एवं उसके साथियों को बचाने में उनका (गाँधी का) का भरसक प्रयास रहा, लेकिन इसके बावजूद भी भगत सिंह एवं उनके साथियों को नहीं बचाया जा सका। जबकि सच्चाई सभी जानते हैं कि गाँधी के कारण ही आजाद भारत को भगत सिंह एवं सुभाष चन्द्र बोस जैसे सच्चे सपूतों की सेवाएँ नहीं मिल पायी। गाँधी को भगत सिंह एवं सुभाष चन्द्र बोस तथा इनके सहयोगी फूटी आँख नहीं सुहाते थे।”
“गाँधी कभी भी अपनी पत्नी के साथ यौन सम्बन्धों से सन्तुष्ट नहीं थे (अधिकतर भारतीयों की भी यही दशा है)….”
“जिस देश की संस्कृति ऋषियों की अवैध औलाद (वेदव्यास) की अवैध सन्तानों से (नियोग के बहाने) संचारित होकर महाभारत की गाथा को आज तक गर्व के साथ गाती और फिल्माती हो, उस देश की आधुनिक सन्तानों का सच्चा राष्ट्रपिता यौनेच्छाओं की खुलकर तृप्ति करने वाला मोहनदास कर्मचन्द गाँधी ही हो सकता था।”
“जहाँ तक भारत के इतिहास और वर्तमान को देख कर ईमानदारी से आकलन करने की बात है तो गाँधी से भी अधिक कामुक और यौन लालायित हर आम स्त्री-पुरुष होता है, लेकिन स्त्री को तो हमने अनेक प्रकार की बेडियों में जकड रखा है, जबकि आम साहसी पुरुष यौनसुख हेतु मिलने वाले अवसरों को भुनाने से कभी नहीं चूकता।”
केवल गाँधी भक्ति को ही नहीं उकेरा जावे, बल्कि अनेक विषयों से परिपूर्ण इस आलेख के हर एक पहलु पर चर्चा होनी चाहिये, जिससे लेखक के विचारों का आलोचनात्मक विवेचन हो सके। मेरा तो विवेकशील महिला पाठिकाओं से भी निवेदन है कि महिलाओं से जुडे इस विषय पर वे भी खुलकर चर्चा में भाग लें, जिससे स्त्री की वेदना पर भी चर्चा हो सके। क्योंकि स्त्री के वैध और अवैध उपभोग की बात गांधी के अन्धभक्तों और धर्म के ठेकेदारों की चर्चा में हमेशा दबकर रह जाती है।
श्री मीना जी साहसिक आलेख के लिये साधुवाद। बहुत कम लोगों को इतनी बेवाकी से विचार व्यक्त करते देखा है। यहाँ पर गाँधी के अन्धभक्तों की टिप्पणियों से ज्ञात होता है कि गाँधी के झूठे आदर्शों से इस देश को बचाना आसान नहीं है।
मेरा सवाल है कि आपने गाँधी के बहाने सेक्स से जुडे अनेक महत्वूपर्ण सवाल उठाये है, जिनपर पाठकों द्वारा एक भी शब्द नहीं लिखा गया है, जो हमारी दौहरी चरित्रता का परिचय है।
मीणा जी ,
मानकर चल रहा हूँ की इस लेख पर टिप्पणियां करीब करीब समाप्त हो गयी हैं .
मैं आपकी कही कुछ बातों से पूर्णतः सहमत हूँ , जैसे कि गांधी कोई संत ,महात्मा नहीं बल्कि मनुष्य मात्र थे . लेकिन वे ऐसे राजनेता थे जिन्होंने वक्त को समझा ,तत्कालीन भारत के मानस को भी , और उसी हिसाब से अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति सोची और सफल रहे .
रही बात उनके कम से कम ‘ ब्रम्हचर्य ‘ को लेकर ‘ सत्य के प्रयोगों ‘ की तो उनके हिसाब से सफल रहे .शायद वे सच भी हों क्योंकि अँधेरे बंद कमरे गवाहियाँ नहीं दिया करते .एक पुरुष होने के नाते इतना ही कहूँगा कि यह भी हो सकता है कि एक उम्र प्राप्त होने के बाद ,जैसे कि मैं भी ,पुन्सत्व्हीनता के कारण ,उनका ब्रम्हचर्य का प्रयोग मेरे जैसा सफल ही होता रहा हो .
फिर भी , यौन एक व्यक्तिगत विषय है और वह सार्वजनिक बहस का विषय नहीं ही होना चाहिए ,बशर्ते उसमे सहभागी लोग अपनी कामना से संलग्न हो रहे हों . यह निजता का विषय है .
कई लोगों ने गांधी की नीतियों और राजनीती पर सवाल उठाये हैं ,कई सही भी थे .अगर उन्हें ‘ महात्मा ‘ समझ कर न चला जाये तो ‘ मोहनदास ‘ को समझना आसान होगा ,जैसे कि उनके पडपोते की हालिया किताब भी कहती है .
Totally bullshit.. Dr. purshotamm , before pointing figures on Gandhi look at yourself. You guys can write anything for some money or get some publicity. Stop reading such masala news or books.. There are thousands of history books which will tell who gandhi was and what he did for you. He could have got all these girls and other thing in UK or South Afirca.. But this man was here in our country and gave us for which we were struggling for last 200 years..
I cant believe that people of india still read such masala news. Anyways if you guyz think that you are better then gandhi then for last 50 years gandhi is not here, but u are here, So tell me what you guyz have given or contributed in India’s growth..
Stop questioning and start working.
it’s stupid. It’s not even an interesting article, absolutely boring.
The writer is advised to practice writing at home before trying it on a public forum and not expose his writing skills prematurely.
meena ji
aap ne gandhi ji ke bare me jo bhi likha mai usse sahmat hoon lekin phir bhi lekh likhne ki ek saumyata hoti hai jo log gandhi ko desh azad karne wala batate hai yah unki galti nahi balki congres ne unka aisa chadam mahimamandan kiya hai ki usse baher aane me abhi samaya lagega aagaz ho chuka hai aaj nahi to kal anjam tak pahuch hi jaega lekin isme kafi mushkile hai kyo ki congres ne aise sabhi saboot jo ki gandhi ki kathit mahatma hone me badhak the sare mita diye hai ek cheej jo aap ne ved vyas ke bare me likha hai to shayad aap yeh bhool rahe hai jis scinece ko aaj aap dekh rahe hai us samaya ki science bahut aage thi aaj aap testtube baby ki parikalpana kar rahe hai us samay yeh murtroop me thi aap jain misiles ko bana rahe hai wo nanotechnology ke roop me us samaya ke badoo me thi aap udne wali car ki parikalpana kar rahe hai aur us samay bina aisi kisi cheej per bathe udne ki shakti develop thi any way hamare bharat ka itihas itna samridhishali tha ki us per gaurav hona hi chahiye
dear meena ji
aapki galti nahi he…. aap ganghi ji ko pasand nahi karte he isliye aapko wo nahi dikh raha he wo unhone is desh ke liye kiya he…….
mujhe ascharya hai ki aap videshi damit mansikta bale ek ghatiya lekhak ke bratant ko apna aadhar bana rahe hai. hakikat yah hai ki aap bhi gandhi ji ke bina (rs.) jiwan ki kalpna nahi kar sakte .ishwar aapko sadkaryo ki prerna de.
श्रीमान् पुरुषोत्तम मीणा का लेख केवल इस लिए खारिज नहीं किया जा सकता कि महात्मा पर राष्ट्र और विश्व की अतिरेक श्रद्धा कायम रही है। कारण कुछ भी रहा हो महात्मा ने अपने जीवन के अंतिम दौर में सैक्स के घिनौने प्रयोग अंजाम दिए। किसी भी शख्सियत में अच्छाईयां और बुराईयां एक साथ निहित रहती हैं और उनकी विवेचनी की जानी चाहिए। श्रीमान् पुरुषोत्तम मीणा ने यही गलती की कि अपने लेख में महात्मा के गुणों पर एक शब्द भी नहीं लिखा।
गाँधी जी के बारे मै ज्यादा तो नहीं पढ़ा हूँ, लेकिन मै यह जरूर जनता हूँ कि सेक्स एक सामान्य प्रक्रिया है. महत्वपूर्ण यह है कि गाँधी जी जैसे भी हों, उन्होंने पराधीन भारत में सच्ची देश-भक्ति की भावना जगाई. भले ही वह स्वयं इमानदार न हो, लेकिन उनके प्रयास सराहनीय है.
Dr. Mina ji sorry to say but i think you should need a full checkup of your mind.
You are like Rakhi Sawant,you want publicity on any cost like her………and i belive you got your Dr.Degree from any local institute….and you will write anything about your father and mother for publicity….
मीणा साहब मुझे बहुत दुःख है की आप जैसी मानसिकता वाले लोगो से आज का समाज गलत रस्ते पे जा रहा है ….आप जैसे लोग खुद तो कुछ करते नहीं जिसने हमें आजादी दिलाई लिखने की पढ़ने की और खुली हवा में साँस लेने की उसी के बारे में आप गलत लिख रहे है . लेकिन मुझे लगता है की ये आप की गलती नहीं है आप की परवरिश में ही कमी रह गयी थी…..गाँधी जी कहा करते थे की अगर हवस की वजह से कोई बचा पैदा होता है तो वो आप जैसा ही होता है…..और अगर प्यार से हुआ तो वो कृष्ण ,राम ,गाँधी, और मदर टेरेसा जैसा होता है…..कृपया आप अपनी सोच को अपने पास ही रखे क्योंकि हमें एक और गाँधी की जरूरत है आप जैसे लोगो की नहीं……मुझे बहुत दुःख है की मैंने ये सब लिखा और वो भी इसलिए है की मै गाँधी जी का भक्त हूँ, वरना आप जैसे बीमार लोग इसी के हकदार है क्योंकि अगर किसी बहरी लेखक ने कुछ लिख दिया तो बस आप जैसे लोग भी पोपुलर होना चाहते है.
मेरी जनोक्ति वालों से रेकुएस्ट है की मेरा ये विचार आप तक जारूर पहुंचाए और आप जैसे लोगो का लेख आगे से ना छापे
भाई मीणा जी,आप अपने पिता जी के सेक्स जीवन पे भी एक ब्लाग लिखे शायद पाठकों को बापू जी के ब्लॉग से भी ज्यादा अच्छा लगे ,गलतिया सबसे होती है वह बी कभी १६,१७,१८,१९,२० साल की रहे होगे जो की सभी के जीवन में कुछ अच्छा कुछ बुरा लेके आता है ,अप्पने बारे में भी लिखो सबकुछ पता चल जायेगा,उगली तो सीता पे बी उठी थी राम पे भी उठी क्रसना पे बी उठी है तो उनकी पूजा क्यूँ करते है उनकी तस्वीर क्यूँ घेर पे होती है धनवाद ;
संदीप
maine ek bhi gadha nahi dhekha jo adami ke jaisa bolta hai, Lakin ajj ek adami hai jo gadhe ke jaisa bolata hai.
meenaji aap jaise logo ne hi toh aapne desh ke mahapursoo ko badnaam kiya hai.aur aap jaise deshdruhiyon ne hi toh aaj bharat ki garima ko dhool me mila diya hai.afsoosh ho rha hai ki aap jaise log hamare desh me paida hue hai.
jainendra shukla
डा मीना जी आपकी एक बात में तो प्रशंसा लारनी ही पड़ेगी. बड़ी मोटी खाल है आपकी, कोई असर होता ही नहीं है आप पर. क्षमा करें, शर्म और नैतिकता से आपका कोई वास्ता नज़र नहीं आता.
श्रीमान आपके लेख पर ३० टिप्पणियाँ पाठकों की आगई हैं जिनमें से केवल एक आपके पक्ष में और एक सामान्य है., २८ आपके विरुद्ध आयी है. कोई असर हुआ आपके ऊपर ? नहीं न ? तभी कहा कि आपकी खाल सचमुच काफी मोटी है. अरे भाई सदा दमित वासनाओं में जीने वाले एक कुटिल व दुष्ट अंग्रेज की किताब पढ़ कर गाँधी जी जैसे महा पुरुष के विरुद्ध अंट-संट लिख डाला. कैसे साहित्यकार हैं, कैसे संपादक हैं आप कि केवल एक ही पक्ष पढ़ा. और जो इतनी किताबें गांधी जी पर और गांधी जी द्वारा लिखी हैं वे भी तो पढी होतीं ? पढी भी होंगी पर आपको तो विदेशी चर्च के एजेंडे के अंतर्गत गांधी जी के विरुद्ध एक सूत्री चरित्र हनन का अभियान चलाना है. आपकी बेईमानी को पाठक पकड़ नहीं पाए कि आपने जानबूझकर उसी पुस्तक को चुना, उसी लेखक को चुना जो आपकी तरह भारत को तोड़ने और कमजोर बनाने के गुप्त उद्देश्य से काम कर रहा है. आप लोगों की नीयत को हम भारत के लोग धीरे-धीरे समझने लगे है. अब पहले जैसे सफल आप लोगों के षड्यंत्र नहीं होने वाले. मेरे मित्र कुछ तो शर्म करो. जिस देश का खाया-पीया, उसी के समाज के साथ गद्दारी ? ऐसा नीच कर्म करने वाले आप पहले व्यक्ति तो हैं नहीं . पर काश आप प्रलोभनों के शिकार बन कर ऐसे पतित न होते. फिर भी ईशवर से सच्चे ह्रदय से प्रार्थना है कि वह आपको सदबुद्धी प्रदान करे.
stupeid
Dr. Meena Ji,
GANDHI JI iss desh mai behas ke liye ek achha subject hai aur loktantra ki visheshata hai ki har aadmi apne vichar prakat kar sakta hai… aapne bhi apne vichar parkat kiye….. lekin mehrabani karke apne vichar kewal ek dasha mai hi prakat naa kare. jab bhi koi baat public ke samne rakhni hai, to poori research aur jankari ke saath rakhe, kewal apne gande vichar naa parose…
i really liked ur article…………and i have already read many things u have shared in this post …………….i wud like to say you did a perfect job in this article…………..most of the people who wrote against you are blind followers of gandhi………so don`tworry doctor sahab…….keep writing such gud articles…………:)))
पुरुषोत्तम जी आपने बहुत ही सराहनीय कार्य किया है परन्तु संकीर्ण मानसिकता आज हर दिमाग में घर कर चुकी है | इन लोगो ने भी वोही पाठ पढ़ा जो इन्हे पढाया गया | आज अगर इन लोगो को कहे की नाथू राम गोडसे परम देश भक्त थे तो इन लोगो को बदहजमी हो जाएगी | आज युवे सच्चाई तो जानना चाहता है परन्तु यह भी चाहता है की सच्चाई उसी लेबल में हो जिसे वेह पहले से जनता है | अगर इन लोगो की आंख ही खुल जाये तो शायद इन नेताओ की इतनी हिम्मत न हो की देश को लूट सके| सुभाष चन्द्र बोसे , आजाद, नारायण दत्त तिवारी और न जाने सेकड़ो नाम जिन्हे सब भील चुके है वे सब इसी गांधीवाद का ही परिणाम ही तो है| खैर कुए का मेंढक कुए को ही तो दुनिया मानेगा इसमें कोई दो राय नहीं
धन्यवाद इस लेख के लिए
What wrong he done in that,everybody know GANDHI slept with many women.I ask to those person who favour GANDHI …will they allow their’s daugher or wife to sleep with any person who consider to be GREAT LEADER.It always seems easy if some GREAT LEADER sleeping with other’s women.
GANDHI was corrupt ,every time he cried to use home made things (indigenous) but he always carried the swiss watch in his LANGOTI,so how any one can say he was fair .
WHy INDIAN govt. not publish all articles that written against GANDHI what he is afraid for.Why govt. banned a play “MI NATHURAM GODSE BOLTAYA’ cos govt. is corrupt as GANDHI was.
My fore father was with SUBHAS CHAND BOSE JI and i heard so many stories from them ………….so i know truth too.
You done a good job and keep writing dont worry if anyone cry foul cos blind supporter always cry foul .
JAI HIND
har bade aadmi par anguli uthti hain ghandhi ji ne kisi ke sath balatkar to nahi kiya….
kuchh beej wo ase bo gaye jo barat desh ko kabhi bhi khushal nahi banne denge isiliye hamare desh main rasht bhakton ki kami hain……
गाँधी के सेक्स जीवन पर लिख कर आपने बहुत साहस का कार्य किया है | लेकिन इन बातों को बहुत से लोग जानते हैं इस बात को प्रमाणित करने के लिए किसी अँगरेज़ लेखक की पुस्तक में वर्णित तथ्यों की आवश्यकता नहीं है | वैसे भी सेक्स एक बहुत ही निजी विषय है | जिसपर बहस करना उचित नहीं है | गाँधी ने और भी बहोत से कु कृत्य किये हैं जिसका इतिहास गवाह रहा है | जब मुहम्मद अली जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन में लाखों हिन्दू और सिख बहु बेटियों का बलात्कार हो रहा था और हिन्दू और सिख भाइयों का कत्लेआम हो रहा था तब गाँधी ने कुछ नहीं कहा लेकिन जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वीरो ने इन आकरंताओं से लोहा लिया तो गाँधी के पेट में दर्द होने लगा और मुस्लिमो की सहायता के लिए अनशन पर बैठ गए| नाथू राम गोडसे ने इस पापी को यु ही गोली नहीं मार दी इसके पीछे बहोत बड़ा कारन भी है नाथू राम गोडसे भी गाँधी का आदर करते थे लेकिन धीरे धीरे जब इनको गाँधी के कु कृत्यों का पता चला तो वे घृणा से भर गए और उन्होंने इस पापी को भारत की पवित्र धरती से मिटा देने की कसम खाई| आम तौर पर लोगो का ये मानना है की नाथू राम गोडसे के पीछे RSS थी लेकिन यह सत्य नहीं है गाँधी की हत्या नाथू जी की स्वयं की योजना थी | उस महान देश भक्त ने गाँधी को गोली मारने के बाद भागने की कोशिश भी नहीं की और हँसते हँसते अपने प्राण इस देश पर न्योछावर कर दिए|
मे यहा कोई प्रास्ताविक फ़ार्मैलिटि नहीं करुगा “मीना ” को “जी ” कहकर … क्यूकी इनकी हरेक पोस्ट मे आपको लगेगा ये एक एसा आदमी है जिसे प्रशिद्धि का शॉर्टकट चाहिए और हमेशा विवाद हो सके एसी ही बातों पे समय निकलते है सोर्री दुकान चलते है … आपने यहा भी देखा होगा की यहा इनहोने गांधी के बहाने विवेकानंद और हमारे ऋषियों को भी नहीं बक्षा …ये हमेशा अपनी बुद्धि का उपयोग एसे ही करते है … कोई विषयवस्तु को सहारा बना कर अप्रत्यक्ष रूप से सामने वाले के दिमाग मे संस्कृति के स्वाभिमान को तोड़ने का कम ये बखूबी करते है और हमेशा इनकी धारणा से विपरीत आजके बुद्धिजीवी युवा इनका वस्त्रहरण कर देते है कोममेंट्स मे … यकीन नहीं आता तो इनकी सारी पोस्ट और कोममेंट्स देख लो … इनको लगता है वो अकेले बुद्धिमान है पर इनकी कुटिल चल समाजने की 18 साल से ज्यादा उम्र वाले बच्चे समाज सकते है आसानी से … इनको कोई समजाओ फेस्बूक पर एसी कोममेंट्स रखखे आपको आपकी कद के अनुसार कट देगे लोग क्यूकी ये सायकोलोजिकल गेम वो ज्यादा समजते भी है और उसी भाषा मे यतों व्यक्तित्व के हिसाब से “गालियो ” से सम्मानित करना भी जानती है आज की युवा पेढ़ी … क्या आपके दिल मे आपके “मीना ” सरनेम से ये सब दुखड़े का बीज बड़ा होके विसैला वृक्ष बना है ??? मे ये पोस्ट पढ़ ही रहा था की “जिस तरह गांधी को आदमे लेके आपने संस्कृति को बदनाम करनेका एक संदेश डाला अपने लेख मे (और आपको लगा युवा गांधी को नफरत करते है तो भावनाओ मे बेह के विवेकानंद और ऋषियों वाली बात मे भी आ जाएगे ???) तब ही मे समाज गए अरे ये तो गद्दार मीना मिया ही हो सकते है ” और दोस्तो मे सही निकला ये मीना ही निकला …. शर्म करो मीना अपनी उम्र का लिहाज करो और किसिकों एसा कहने की नोबत न आने दो की कोई कह जाए “बुड्ढा सठिया गया है “…. अरे भाई तू बन जाना ईसाई या मुस्लिम कोई जरूर भी नहीं आपकी … और कितना विष भरा है देश /संस्कृति/हिन्दुत्व से जुड़ी हर बात को लेके ?????
राष्ट्रपिता के बारे में डा ० पुरुषोत्तम मीणा जैसे भारतीय बुद्धिजीवी के मन मस्तिस्क में जो विचार है, वह् कुण्ठित और अपनी popularity को भुनाने का एक तरिका मात्र है । आज बहुत अफ़्सोश् हो रहा है कि जनोक्ति में प्रकाशित इस लेख में गाँधीजी के बारे में लिखी बातें कहीं से भी प्रमाणित प्रतीत नही होती और लेखक नें सिर्फ एक विदेशी लेखक को सत्यवादी हरिशचंद मानकर आपने पूर्वाग्रह का परिचय दिया है | लेख में प्रयुक्त अमर्यादित टिपण्णीयों ने पत्रकारिता के नाम पर सिर्फ अपनी दुकान चलाने का कम किया है.
mina ji aapne jo bhi likha acha laga,kyoki sachai kaisi bhi ho svikarna padti hai
भारतीयों की आदत ही है… ”भेड़चाल”।
झुंड के साथ भागते रहते हैं… बिना ये जाने कि ‘मंजिल’ क्या है
इसीलिए बहुत से भारतीय बंधु ‘मोहन दस करमचंद’ के प्रति नाकरतमकताओं के प्रति अस्वीकृति ही प्रदर्शित करते हैं… भले ही वह पूर्ण सत्य ही क्यों ना हो…!
गांधी परिवार ने भारतीयों की इसी आदत के कारण 15 अगस्त 1947 से वर्तमान तक भारत को मानसिक गुलाम बना कर रखा है।
today i read this on web . Every one think about the sex and do with his/her need but about Gandhi jee how its possible because he is above 70 yrs old . Its true every old man love with teenagers girls and child but its not possible to sex with them .
no comment please
aap angrej hai kya…?
kam se kam indian na hone ka proof mat do nahi log samjhege ki videsi khoon hai
sale apni ma bap par sak karta hai stupid
hahaha… its a joke or what you r talking about MAHATMA GANDHI…. he is a great man an so a leader too. he have thrown British govt out of south africa so British in India even if have any small clue or hint about these thing, they would have big big issue to discard Gandhiji from the heart of Indian people, but they wouldnt coz he is a clean man. and i cant believe if he doing this, and british dont have any information about this, so please chuk this topic, and stop voiliting indian pride and its dignity.
and i appeal to all reader to just read his view.. just a nonsense view and think from ur heart and mind too about Gandhiji, plz dont just believe on this article.
Tha
hahaha… its a joke or what you r talking about MAHATMA GANDHI…. he is a great man an so a leader too. he have thrown British govt out of south africa so British in India even if have any small clue or hint about these thing, they would have big big issue to discard Gandhiji from the heart of Indian people, but they wouldnt coz he is a clean man. and i cant believe if he doing this, and british dont have any information about this, so please chuk this topic, and stop voiliting indian pride and its dignity.
and i appeal to all reader to just read his view.. just a nonsense view and think from ur heart and mind too about Gandhiji, plz dont just believe on this article.
Thanks
NIKHIL D.
इसे कहतें हैं “अभिव्यक्ति की स्वच्छंदता” मीणा जी आप इस स्वच्छंद देश के स्वच्छंद नागरिक हैं.
kaminepan ki hadd kar di tune