
बहरहाल, उस तरह के उद्घाटन के बाद उनको पकड़ा गया, विश्व समुदाय ने उनके स्वरूप के दर्शन किये और बहुतों ने तो अपने को धन्य समझा। इस तरह की एकाएक मिलती प्रसिद्धि के बाद उनका हाजमा खराब हो गया और उसकी बदबू यहां भारत तक कई बार आई। कभी राहुल गांधी के बयानों को लेकर तो अब घूसखोरी के मामले को लेकर।
असांजे जिस तरह से प्रसिद्धि को लेकर भुखमरी का शिकार हैं उसी तरह की भुखमरी का शिकार हमारे देश के राजनेता रहते हैं, सत्ता प्राप्ति के लिए। विकीलीक्स पर एक खबर आई और सारा विपक्ष जुट गया कि प्रधानमंत्री नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दें। जो भी आरोप लगे हैं उन्हीं के आलोक में एक-दो बातों को देखा जाना चाहिए।
मान लिया भी जाये कि सांसदों ने वोट के बदले नोट लिये, तो बताइये कि इस उद्घाटन से पहले क्या इस तरह के रहस्य पर्दे से बाहर नहीं आते रहे हैं? विधायकों के, सांसदों के सदन में प्रश्न पूछने के एवज में पैसा खाने के मामलों ने तो पहले भी सिर उठाया था। सदन में तो सांसदों ने बैग से नोटों की गड्डियां निकाल कर लहराईं भी थीं, तब क्या हम सभी सो रहे थे?
यहां सवाल यह उठता है कि क्या विकीलीक्स को विश्व स्तर पर सभी देशों ने मान्यता दे रखी है कि वो जो भी लिखेगा, दिखायेगा उसे प्रमाणिक माना जायेगा? क्या विकीलीक्स और असांजे को समस्त देशों की तरफ से इस बात का पंजीकरण-पत्र प्राप्त है कि वह जिस देश के विरुद्ध चाहे कुछ भी दिखा सकता है? क्या विश्व की तमाम सारी जांच एजेंसियों के बेहतर विकीलीक्स को, असांजे को स्वीकार कर लिया गया है? यदि इन सवालों के जवाब हां में हैं तो निश्चय ही प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके पीछे कारण सिर्फ यही है कि इस तरह के आरोप विकीलीक्स ने लगाये हैं, जुलियन असांजे ने लगाये हैं।
इसी के साथ यदि उक्त सवालों के जवाब न में हैं तो सोचा जाना चाहिए कि हमारे देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर कोई विदेशी कुछ भी कहे और हम बजाय उसका विरोध करने के इस बात की स्वीकारोक्ति करने लगें कि उस विदेशी संस्था के, व्यक्ति के आरोप सही हैं? अरे! समूचे विपक्ष को तो शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए जो देश की सर्वोच्च संस्था के सदस्यों-सांसदों-पर लगाये गये आरोपों को, और वो भी जो एक विदेशी इंटरनेट साइट पर, एक विदेशी ने लगाये हैं, उन पर गला फाड़-फाड़ कर अपने ही देश के प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांगने में लगा हुआ है।

इसके विपरीत होना यह चाहिए था कि विकीलीक्स को, असांजे को मान-हानि के आरोप में कटघरे में खड़ा करके समूचे विश्व को संदेश दिया जाना चाहिए था कि हमारे देश की अस्मिता पर, सदन पर, यहां के सांसदों पर उंगली उठाने वालों का क्या हाल होता है। इस तरह के आरोप किसी एक पार्टी विशेष के लिए नहीं, किसी सांसद विशेष के लिए नहीं, प्रधानमंत्री विशेष के लिए नहीं वरन् हम सभी भारतीयों के लिए शर्म का विषय हैं। इसको सोचे बिना हमारा विपक्ष बस अपना उल्लू सीधा करने की फिराक में है और कैसे भी सत्ता पाने की कोशिश में लगा हुआ है।
यह भली-भांति माना जा सकता है कि हमारे ज्यादातर राजनेता इस समय किसी न किसी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और हो सकता है कि वोट के बदले नोट का आरोप सही भी हों पर आरोप लगाने वाले की प्रामाणिकता को भी जांचा-परखा जाना चाहिए था। एक बात हम हमेशा कहते हैं कि हम अपने घर में भले ही रोज अपने पिता से लड़ते-झगड़ते हैं पर किसी बाहरी को कोई हक नहीं कि हमारे घर में घुस कर हमारे पिता के साथ मारपीट करे। ठीक यही स्थिति देश पर भी लागू होती है, हम एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं, इस्तीफे की मांग करते हैं, सदन में मारपीट भी कर लेते हैं पर किसी विदेशी को मात्र इसी से यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह हमारे देश की सम्प्रभुता पर सवाल खड़ा करे।
यह असंसदीय, असंवैधानिक और असामाजिक भी होगा वरना हम तो कहते हैं कि किसी भी विदेशी के द्वारा इस तरह देश के सासंदों पर, प्रधानमंत्री पर, किसी दल पर आरोपों के लगाये जाने पर उसके सिर पर जूतों की बारिश कर देनी चाहिए। भले ही विकीलीक्स ने कितने भी बड़े रहस्योद्घाटन किये हों; भले ही जूलियन असांजे को मानवाधिकार का संरक्षक माना जाने लगा हो पर हमारी राय में देश की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने वाले को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। समूचे विपक्ष को इस बात को समझना चाहिए और आपस में बैठकर आरोपों का निस्तारण कर ले किन्तु इस मुद्दे पर विकीलीक्स और असांजे को सबक जरूर सिखाया जाना चाहिए।
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दोनों चित्र गूगल छवियों से साभार


पहली बार आपसे सहमत नहीं. इस तरह के लेख की आशा नहीं थी. विकीलीक्स चलाने वाला असांजे सही मायनों में पत्रकार है, क्या हमारे देश के किसी भी पत्रकार में इतना दम था कि इस तरह की जानकारी विश्व के सामने रख पाता. और आपका यह कहना गलत है कि असांजे आरोप लगा रहा है. असांजे कोई आरोप नहीं लगा रहा, वह सिर्फ उन गोपनीय संदेशों को आम कर रहा है जो राजनयिक-कूटनीतिज्ञ अपने देश को भेजते रहे. असांजे जो कुछ भी कर रहा है, पत्रकारिता के हित में होने के साथ साथ उस भोली भाली जनता के भी हित में है जिसकी गाढ़ी कमाई पर ये राजनीतिबाज मौज करते रहते हैं.
सहमत या असहमत होना इस बात का सबूत है कि कुछ विचार और हैं. आपकी बात से सहमत हुआ जा सकता है पर क्या ये सही है कि हमारे देश की संसद के बारे में कोई विदेशी आरोप तय करे, भले ही ये तथ्य हों पर किसी बाहरी को हक नहीं कि हमारी इज्जत से खेले.
एक उदाहरण आपको दें कि राष्ट्रमंडल खेलों के पहले हमारे पत्रकारों ने, मीडिया ने जो किया उससे घोटाला तो सामने आया पर देश का नाम भी ख़ाक में मिल गया. विदेशी तो हमेशा से चाहते रहे कि भारत का नाम खराब हो उस पर आप जैसे लोगों के विचार, सोने पे सुहागा होते हैं.
असान्जे कितना भी बड़ा पत्रकार क्यों न हो पर हमारा मन्ना है कि देश की इज्जत को उछलने वाले को सौ जूते सरेआम मारने चाहिए. याद रखिये ये पत्रकारिता नहीं, किसी को अपमानित करना है.
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड
निश्चय ही अबकी बार आपके विचारो से सहमती संभव नहीं है। आपके द्वारा ऐसे विचार तब अमेरिका के समर्थन में नहीं आये जब अमेरिका अंसाजे को किसी भी प्रकार से गिरफ्तार करने पर आमादा थी। जहाँ तक प्रश्न इज्जत करने या सम्मान करने का प्रश्न है ये अपने आप होता है, पैदा नहीं किया जाता। सचिन तेन्दुलकर ने किसी को नहीं कहा कि आप मेरा सम्मान करो लेकिन भारत ही नहीं अपितु विश्व के सभी देशो के व्यक्ति उनका सम्मान करते है। हमारे देश के राजनेताओं का आचरण कतई ऐसा नहीं है जिससे हम उनका सम्मान अपने पिता के बराबर कर सकें। जहाँ तक असांजे का प्रश्न है मेरे ख्याल में उसने कोई भी बात बिना प्रमाण और केवल कहने के लिए नहीं कहीं बल्कि ये सब उन दस्तावेजो पर आधारित है जिनको अवलोकन का सौभाग्य आप और मेरे जैसो को होना असंभव है। ये नेता जितने और जिस रूप में भी नंगे किये जाए कम है। इनके लिए किसी भी प्रकार के रहम का कोई प्रश्न ही नहीं है।
सहमति या असहमति का सवाल नहीं है ये, ये सवाल है कि क्या पत्रकारिता के नाम पर किसी को भी (विशेष रूप से विदेशियों को) देश की इज्जत से खेलने का अधिकार है? यहाँ सवाल ये भी नहीं कि हमारे राजनेता इज्जतदार हैं या नहीं, सवाल ये भी नहीं कि वे घोटालों में घिरे हैं या नहीं, सवाल ये भी नहीं कि वोट के बदले नोट लिए गए या नहीं………..एक पल को आप बिना इस बात को सामने रखे कि यहाँ मुद्दा कोंग्रेस, भाजपा या किसी अन्य दल से जुड़ा है क्या आप इसको स्वीकार करते हैं कि कोई विदेशी देश की संसद पर, यहाँ के सांसदों पर ऐसे आरोप लगाए?
विस्तार में कुछ न कह कर बस इतना कहेंगे कि जापान पूर्व में भी परमाणु विभीषिका सहने के बाद भी विश्व शक्ति बना और इस बार भी प्रलय झेलने के बाद शक्ति संपन्न बनेगा…क्योंकि उनके नागरिकों में देश-प्रेम की भावना अत्यंत प्रबल है……..हम भारतीयों से कहीं अधिक………..(अब ये भी आपको बुरा लगेगा)
कुमारेन्द्र जी, विदेशी आरोप नहीं लगा रहे, वे आईना दिखा रहे हैं. वे वही बता रहे हैं, जो उन्होंने देखा. जूलियन असांजे ने अपनी ओर से कोई आरोप नहीं लगाया, वह वही बता रहा है जो अमेरिकी राजनयिकों ने देखा और लिख भेजा. कैंसर का इलाज होना चाहिये न कि ऊपर की मरहम-पट्टी. रही बात राष्ट्रमंडल खेलों की, तो भ्रष्टाचार के इन्डेक्स को उठाकर देखिये, मानव जीवन के स्टैण्डर्ड को उठाकर देखिये, शायद आपके संदेहों का निवारण हो जाये. आखिर यूं ही तो लाखों करोड़ रुपये जमा नहीं हुये स्विस-जर्मन और तमाम बैंकों में.
@भारतीय नागरिक — हमें अपने पर क्षोभ कई कि अपनी बात को हम सही से समझा नहीं पा रहे हैं. इसको ऐसे समझिये कि कल को अमेरिका कहे कि हम सभी भारतीय चोर हैं, भ्रष्ट है, हमारी संसद चोर है, हमारे सांसद चोर हैं, हम भ्रष्टाचार में अव्वल हैं आदि-आदि तो क्या आप चुपचाप इसे मानेगे, भले ही ये सत्य हो.
ये हमें भी पता है कि हमारे राजनेता किस हद तक गए गुजरे हैं हैं पर ये आरोप या आपके शब्दों में कहें कि आयीना हमारी इज्जत को मिटटी में मिला रहा है.
एक निकृष्ट कोटि का उदहारण देते हैं कि कोई कहे कि हम अपनी माँ के गर्भ से पैदा हुए हैं तो हमें बुरा नहीं लगेगा पर यदि कोई कहे कि हमारे जन्म लेने के पहले हमारे माँ-बाप नंगे होकर….कर रहे थे…तो क्या आपको अच्छा लगेगा, जबकि ये भी आईना ही है……………..
आशा है कि आप समझ गए होंगे… हम असान्जे और विकिलीक्स पर अब जायद कुछ नहीं कहेंगे, हमें तो आप जैसे लोगों की सोच पे तरस आता है जो एक विदेशी के दिमाग से संचालित हैं.
आप एक और तो विचारो की सहमती और असहमती की बात करते हैं और दूसरी और आपके विपरीत राय जाहिर करने पर शिष्टता को भी तज कर टिप्णिया देते है। अपने विचारो के प्रति आग्रह ठीक है लेकिन इसे दुराग्रह में बदलना ठीक नहीं है। किसी की सोच पर तरस खाने की आपको कोई आवश्यकता नहीं है हो सकता है कोई आपकी सोच पर तरस खा रहा हो। अपने तर्को को उचित ठहराने के लिए आपके द्वारा दिये उदाहरण कुतर्को की श्रेणी में अधिक आते है। भाषा की शालीनता बनाये रखें।