वर्ष 2011 का जब से शुरुआत हुआ है तब से अभी तक देखा जाये तो विश्व किसी न किसी देश में विद्रोह या क्रांति आई है, अगर हम अंग्रेजी नववर्ष के प्रथम महीने की बात करे तो अफ्रीकन महाद्वीप के देश मिश्र में वर्ष का सबसे पहला विद्रोह शुरू हुआ उस विद्रोह को इतना बड़ा जन समर्थन मिला की वहां के साशक हुस्नी मुबारक को ना सिर्फ अपनी गद्दी छोडनी पड़ी बल्कि देश भी छोड़ना पड़ा| जब मुबारक ने गद्दी छोड़ने का एलान किया तो देश की जनता नाचने और झूमते जसं मन रही थी जैसे वो उनकी जीत हो और एक नई क्रांति आई हो मिश्र में| मिश्र के बाद थी अरब देशों में से एक छोटे से देश तुनीसिया की यहाँ भी तुनीसिया के राष्ट्रपति बेन अली सत्ता में सन 1987 से काबिज थे अमेरिका और फ्रांस जैसे देश भी तुनीसिया की बुराई कर रहे थे, तब यहाँ की जनता भी तुनीसिया के कैबिनेट के खिलाफ प्रदर्शन करने लगी और आर.सी.डी का विरोध कर रही थी और अंत में सफलता मिली| अब एन दो देश के बाद एक बार फिर से बारी आई थी अफ्रीकन महाद्वीप के देश लीबिया की| जहाँ के तानाशाह गद्दाफी के खिलाफ सिविल वार इस वर्ष फरवरी में शुरू हो गया, पर गदाफी को किसी बात का फर्क नही पड़ा और उसने अपने खिलाफ उठने वाले स्वर को दबाने की भरपूर कोसिस की पर वो ना कामयाब रहा जनता का आन्दोलन और तेज हो गया, पर गदाफी अपनी गद्दी को छोड़ने को टायर नही हुआ, अब हालत को बिगड़ता देख अमेरिका, फ़्रांस, और ब्रिटेन ने लीबिया पर हमला कर दिया क्युकी वो चाहते हैं की लीबिया में भी लोकतंत्र की स्थापना हो और तानाशाही ख़तम हो| इन सब के बाद बारी थी दक्षिण-एशिया में बड़े भाई की भूमिका निभा रहे भारत की| भारत में भी 5 अप्रैल 2011 को एक आन्दोलन की शुरुआत हुई जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध थी, इस आन्दोलन पर भारत के समाजसेवी अन्ना हजारे आमरण अनशन पर बैठे और इस आन्दोलन को जनता बहुत बड़ा योगदान मिला और यही नही इस आन्दोलन को प्रोफेसनल्स छात्र और एंगिनीर्स का भी साथ मिला वही कई संगठन जैसे यूथ फॉर नेसन भी इस आन्दोलन के समर्थन में आये| और अन्ना हजारे के 97 घंटे के अनसन ने केंद्र की गूंगी सरकार के कानो तक बात पंहुचा दिया जिसके बाद सरकार ने भी जन लोकपाल बिल की सारी सर्थे मान ली और आन्दोलन ख़तम हुआ| इस आन्दोलन ने दुनिया को एक बात दिखा दिया बाकि के ३ देशों में हुए आन्दोलन में मार काट हिंसा और पब्लिक को परेशानी पर भारत में हुए इस आन्दोलन में किसी को कोई परेशानी नही और जन समर्थन भी मिला| और यह भी कहा जाने लगा की अन्ना हजारे मॉडर्न भारत के गाँधी है जिन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात जनता तक पहुंचा कर एक आन्दोलन खड़ा कर सरकार को झुका दिया

