राष्ट्रीय|Shortlink: 2010/08/30 11:55 pm

रंग-बिरंगा आतंकवाद !

वास्तव में आतंकवाद बद-रंग है और दूसरों के इन्द्रधनूशी रंगों को छीन लेता है, फिर भी हम इसे काले रंग के रूप में लेते है, क्योंकि उनका उसूल है अँधेरा कायम रहे. भगवा आतंकवाद कहना ही गलत है क्योंकि आतंकवादी की कोई जाति, धर्म या रंग नहीं होता,उसका मतलब तो केवल आतंक, हिंसा, दहशत फैलाना होता है ताकि लोग उससे डरें. हमारें राष्ट्र ध्वज में तीन रंग है. केसरिया, सफ़ेदऔर हरा. केसरिया रंग तो शौर्य और बलिदान का रंग है. अंग्रेजों के विरुद्ध महारानी लक्ष्मी बाई ने भगवे रंग के झंडे का उपयोग किया था जिसका अर्थ शौर्य दर्शाना था और आज़ादी की लड़ाई में उसने अपना बलिदान दिया. लगता है,आज हमारे नेता भगवा रंग को आतंकवाद का रंग कहकर कह कर अपने आप को अंग्रेजों का प्रतिनिधि कहलाना चाह रहे है क्या! हमारे नेता हमेशा से ही वोट की राजनीति के लिए तुष्टिकरण की नीति अपनाते रहे है.अंग्रेजों ने फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई. लगता है,हमारे सम्माननीय नेता उसे अपनाने पे तुले है और भोली भली जनता को आपस में बाँट रहे है.एक वर्ग विशेष के वोट लेने के लिए भगवा आतंकवाद के नाम पर हिन्दुओं को बदनाम करने का एक कुत्सित प्रयास है.आतंकवादी,आतंकवादी ही होता है फिर वह किसी भी धर्म का हो. प्रायोजित आतंकवाद को हम रोकने में असमर्थ हो रहे है और उसको बढ़ावा देने वाले देश की लल्लो-चप्पो कर रहे है. जो असली आतंकवादी है हम उन्हें फंसी की सजा होने के बाद भी फंसी ने के बजाय जेलों में रखकर देश का खर्च बढ़ा रहे है और उसका बोझ टेक्स के रूप में जनता से वसूला जा रहा है. लगता है हमें फिर से गुलामी के दिन देखना है क्या ? हिन्दू संस्कृति में भगवा रंग त्याग, वैराग्य का प्रतीक है. चंद लोगो के आतंकवादी होने से पूरे भगवे रंग से सम्बंधित संस्कृति को उसके लपेटे में लेना कहाँ का न्याय है. उस पर लांछन लगते हुए हमारे नेता अपने आप पर गर्व महसूस करते है. कुछ तो शर्म करो. क्यों करे भाई? हम नेता जो ठहरे..!

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