राष्ट्रीय|2011/06/08 8:40 pm

ये पब्लिक है सब जानती है………

भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा का भूतपूर्व अनशन सफल माना गया था। देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अनुठी सी लहर दौड़ उठी थी। वहीं फिर बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और काला धन वापसी की मांग को लेकर राम लीला मैदान में अनशन किया। इन दोनों महापुरूषों का अंदोलन कितना सफल रहा यह तो जनता की आवाज सुनकर ही साफ किया जा सकता है।

जन लोक बिल की मांग को लेकर अण्णा के अमरण अनशन को देश की सम्पूर्ण जनता ने सकारात्मक नजरियें से देखा था। उसके बाद बाबा राम देव का रामलीला मैदान में आयोजित सत्याग्रह पर लोगों का नजरिया कुछ सकारत्मक तो कुछ का नजरिया नकारात्मक नजर आया। बाबा को समर्थन देने वाले ज्यादातर लोग वो थे जो बाबा के शिविरों का लाभ उठा चुके थे या फिर बाबा के प्रति श्रद्धा रखते थे।

श्रद्धालुओं से परिपूर्ण बाबा राम देव ने रामलीला मैदान में सरकार के आमने-सामने का मुकाबला किया। लेकिन इसे सरकार की दोगली नीति कहो कि बाबा उसका शिकार हो गये। आंदोलन स्थल पर रात के एक बजे के लगभग प्रशासन ने मानवीय अधिकारों को तार-तार कर दिया। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का शिकार मासूम जनता बनी और बाबा मुंह छुपा कर भाग निकले।

वहीं पुलिस कार्रवाई के विरोध में राजघाट पर अन्ना हजारे ने अनशन शुरु कर दिया है। गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के एक दिवसीय अनशन का समर्थन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रशासन ने, काले धन के मुद्दे पर बाबा रामदेव के अनशन के दौरान की गई कार्रवाई के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और दिल्ली पुलिस के जवान बड़ी संख्या में यहां तैनात किये गये। हजारे का अनशन स्थल राजघाट के पास गाधी दर्शन के द्वार के बाहर है और इसके लिए यहा मंच तैयार किया गया।

दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर अनशन की अनुमति न दिए जाने के बाद अन्ना ने अपने अनशन के लिए राजघाट को चुनने का फैसला कर लिया था। सुरक्षा लिए यहा मेटल डिटेक्टर वाले दो गेट लगाए गए हैं और लोगों की दो बार जांच करने के बाद अनशन स्थल पर उन्हें प्रवेश दिया गया। इसके अलावा, प्रवेश से पहले स्वयं सेवकों के पंजीयन का इंतजाम भी है। ‘इंडिया अगेन्स्ट करप्शन’ के स्वयं सेवक भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था कर रहे हैं। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, ‘इंडिया अगेन्स्ट करप्शन’ लिखी टीशर्ट पहने बड़ी संख्या में युवा और बुजुर्ग हाथों में तिरंगे लहराते हुए राजघाट स्थित अनशन स्थल पहुंचे।

फिर से अण्णा, सरकार के खिलाफ अनशन बैठे। इस बार भी अण्णा को जनता का पूर्ण सहयोग मिला। पर सरकार की नियत किसी भी नेक इंसान को जो सरकार के खिलाफ आवाज उठायेगा उसे कुचल कर रख देने की है।

बीते दिनों में उत्तर प्रदेश में किसानों के साथ पुलिसिया व्यवहार को दुनिया ने देख लिया। वहां पर भी मासूम निहत्थे किसानों पर कहर बरसाया गया। पुलिसिया और सरकार की मिली भगत के चलते मासूमों को अपनी जान गवानी पड़ी। यहीं आलम रामलीला मैदान में होने वाला था।

अण्णा के एक दिवसीय अनशन पर बहुत से लोग गांधी टोपी लगा कर आये। जिस पर ‘मैं अन्ना हूं’ लिखा है। अनशन स्थल पर महात्मा गांधी की पोशाक पहन कर पहुंचा एक व्यक्ति सबके आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह व्यक्ति बापू का पसंदीदा भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ गा रहा था। समाजसेवी अन्ना हजारे ने बड़ी संख्या में समर्थकों ने साथ दिया। राजघाट पर जाकर बापू की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित कर अण्णा ने अनशन शुरु किया।

अब यहां सवाल उठता है कि अण्णा हजारे के अनशन पर लोगों की सोच क्या रही है। वो किस तरह अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे है। यह सोसियल नेटवर्किंग साईटों के माध्यम से देखनों को मिला है। जिसमें देश की चर्चित हस्तियों ने अण्णा को समर्थन देने की बात कहीं तो आम जनता ने भी अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया जाहिर की है।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ये सब बेकार की बातें है। सरकार इतनी सबल है कि वो अण्णा और बाबा को ठिकने नहीं देगी। या फिर यूं कहा जाए कि सीधे-साधे समाज सेवी अण्णा हजारे सरकार के चक्रव्यूह में फस गये। और राजनीति करने निकले बाबा राम देव अपने ही बनाये राजनैतिक शिकंजे में कस कर रह गये।

अण्णा को आज भी देश की जनता समर्थन करती है जबकि बाबा को ज्यादातर लोग नकारात्मक टिप्पणियां दे रहे हैं। इसके पीछे की बजह यह है कि अण्णा एक नेक मकशद के साथ निस्वार्थ काम कर रहे हैं। जबकि बाबा का मकशद नेक है वो अपने स्वार्थ के लिए जनता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। लेकिन ये पब्लिक है सब जानती है।

 

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