देश की अखंडता पर चोट किया है राज ठाकरे ने , सौ प्रतिशत यही शब्द अशोक चाह्वान ने मीडिया के समक्ष कहा था . पर सही बात यहीं नहीं ठहरती , भारत का संविधान पूछ रहा है महाराष्ट्र सरकार और सरकार को उँगलियों पर नचाने वाली कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी से कि मेरा हवाला दे-देकर बयानबाजी कर लेने से उनके कर्तव्यों का निर्वहन हो जायेगा ? इतने दिनों तक और लोग चुप क्यों थे ? मुंबई से दिल्ली तक आप का ही राज था फिर देश की एकता के भंजक ये लोग कैसे सर चढ़ गये ? आप लोगों ने हीं कभी मुंबई में वामपंथियों के सफाए के लिए बाल ठाकरे सरीखे एसिड का सहर लिया था जो आज कई गुना तेजी से बढ़ रहा है . अब तो उद्धव और राज ठाकरे सरीखे बोली बम भी है उनके पास ! लुंगी वालों की पुंगी बजवाई आपने , फिर भइयों की बारी आई . मराठी अस्मिता के नाम पर एक ओर बाल ठाकरे दूसरी ओर राज ठाकरे को खड़ा कर कमजोर किया . और अब नये टेक्सी कानून बना कर आपकी चाह्वान सरकार ने साबित कर दिया है कि अब पवार को ठिकाने लगाने की तयारी में है कांग्रेस . अरे , अगर आपको अपनी रोटी नहीं सेंकनी होती तो अब तक ठाकरे परिवार की दादागिरी बंद हो चुकी होती और लाखों लोग रोज मेरी दुहाई देना बंद कर चुके होते . दूसरों के कंधे पर बन्दुक रखकर चलाना तो आपकी पुरानी आदत है . वैसे इस सारे झगडे का जड़ विकास है जो समग्र और समावेशी रूप में हर क्षेत्र में नहीं हो पाया है . देश में गैरबराबरी का मुद्दा सबसे बड़ा है जिसके पैदा होने की सारी जिम्मेदारी कांग्रेस की हैं क्योंकि स्वतंत्र भारत में सर्वाधिक ४५ वर्ष तक आप ने शासन किया . आज जब राज ठाकरे ने राहुल गाँधी पर निशान साधते हुए ” रोम पुत्र” कह डाला तब तिलमिला उठे , तब कहाँ गये थे जब यही राज ठाकरे उत्तर भारतीयों के खिलाफ न केवल जहर उगल रहा था बल्कि सरेआम उन्हें पीट भी रहा था . आखिर, उस वक्त देश की अखंडता का ख्याल अशोक चाह्वान या किसी अन्य को क्यों नहीं आया था . कांग्रेसी दोहरेपन की हद तो ये है एक तरफ राहुल गाँधी बिहार में बिहारियों को गुजरात का हवाला दे रहे थे , दिल्ली मेट्रो को बिहारियों की दें बता कर तेल लगा रहे थे , ठीक उसी समय अशोक चाह्वान की सरकार नया टेक्सी परमिट कानून बना रही थी जिसके अनुसार परमिट का हक़ उसी को है जो मराठी लिखना-पढना -बोलना जानता हो . एक कहावत याद आ रहा है ” पोसा हुआ कुत्ता ही काटता है ” अब आप रेबीज के टीके खोजने शुरू कर दीजिये क्योंकि कुत्ते पालने की जहमत और शौक तो आप ने ही पाल रखे हैं !


Sach Hai!
हर कुत्ते कि मौत सड़क पर, तड़प-तड़प कर होती है,
Hi, just here to leave a comment for you, becouse I just doing research to my mid-school about this what you’re writing. Keep up good work mate! Kind Regards, Szkolenia.