Author: नरेन्द्र निर्मल
नरेन्द्र निर्मल , जनोक्ति के कार्यकारी संपादक हैं . निर्मल मूलतः बोकारो (झारखण्ड) के निवासी है और वर्त्तमान में दिल्ली में पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. गत पांच वर्षो से विभिन्न सामाजिक और काव्य मंचो पर उपस्थित रहे. निर्मल जी कवि और समाजसेवक के रूप में भी जाने जाते हैं. “वाई एम् सी ए ” से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर करने के बाद ‘ जन आवाज’ निर्माण संवाद ‘ जिन्दा लोग’ आदि पत्रिकाओं के साथ -साथ जयप्रकाश अंतर्राष्ट्रीय शोध संस्थान से भी जुड़े रहे हैं .
एनजीओ माफिया ! नरेन्द्र जी आपने बहुत खूब शब्द निकला है ! वैसे आपकी बात खरी है . आज कल सेवाधर्म के आम पर सब मलाई मर रहे हैं ……. आखिर ये सब कौन हैं .? ये कहाँ से आये हैं ? क्या ये कोई एलियन हैं ? या फिर हमारे समाज से ही पैदा हुए है ? क्यों कर समाज में मूल्यों का ह्रास हो रहा है और अधिक से अधिक धन कमाने और जमा करने की होड़ लगी है ?