संसद मार्ग|2010/05/15 5:17 pm

शेखावत का आदर्श राजनैतिक जीवन

भारत के पूर्व उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत का शनिवार की सुबह ११ बजकर १० मिनट पर निधन हो गया . गौरतलब है कि सांस लेने में तकलीफ़ की वजह से श्री शेखावत को कल रात सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती किया गया था .

भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री शेखावत लम्बे समय से भारतीय राजनीति के शीर्ष पर काबिज उन नेताओं में से हैं जिनको निष्पक्ष राजनीति के लिए जाना जाता है . राजस्थान के सीकर ज़िले के कचारियावास गाँव के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे शेखावत का जीवन अत्यंत सरल और प्रेरणादायी है .भैरोंसिह शेखावत ने हाईस्कूल पास किया लेकिन अपने पिता देवी सिंह शेखावत के निधन की वजह से शिक्षा आगे जारी नहीं रख सके . परिवार की जिम्मेदारी को देखते हुए उन्होंने खेती-बाड़ी शुरू की लेकिन यहाँ भी टिक नहीं सके और फिर पुलिस में बतौर दारोगा भर्ती हो गए।

1948 में दारोगा की नौकरी छोड़ कर देशसेवा की भावना मन में लिए शेखावत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के चंद वर्षों बाद ही 1952 में वे राजस्थान विधानसभा के सदस्य बने और 1972 तक लगातार विधानसभा के सदस्य बने रहे. इस दौरान पहली बार जून 1977 में वे राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और उनका कार्यकाल फ़रवरी 1980 तक चला. जुलाई 1980 से दिसंबर 1989 तक वे राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे. वे मार्च 1990 में दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और दिसंबर 1992 तक मुख्यमंत्री रहे. सन 1993 में वे तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने और 1998 तक मुख्यमंत्री रहे. पुनः जनवरी 1999 से अगस्त 2002 तक वे राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे. अगस्त 2002 में वे भारत के उपराष्ट्रपति बने और जुलाई 2007 तक इस पद पर रहे.

सांगठनिक स्तर पर भी उनकी उपलब्धियां कम नहीं हैं .जनसंघ के प्रदेश अध्यक्ष , राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाजपा के गठन होने पर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे श्री शेखावत का उदय उस समय हुआ था जब राजस्थान में कांग्रेस की तूती बोलती थी . वहां विपक्ष का नामोनिशान नहीं था . ऐसे समय में शेखावत ने जनसंघ की जमीन तैयार कर सत्तासीन कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी थी .

आजीवन राष्ट्रहित में काम करने वाले जननेता श्री शेखावत ने एक बार कहा था कि “मैं गरीबों और वंचित तबके के लिए काम करता रहूंगा ताकि वे अपने मौलिक अधिकारों का गरिमापूर्ण तरीके से इस्तेमाल कर सकें.” देश के अत्यंत ग़रीब लोगों को भोजन मुहैया कराने के लिए चलाई जाने वाली ” अंत्योदय अन्न योजना ” का श्रेय उन्हीं को जाता है . उनके इस कदम के लिए तत्कालीन विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट मैक्कनमारा ने उनकी सराहना करते हुए उन्हें भारत का रॉकफ़ेलर कहा था . अपने जीवनकाल की एक अन्य चर्चित घटना “रूप कंवर सती कांड ” के दौरान अपनी लोकप्रियता और राजनीतिक कैरियर की परवाह न करते हुए उन्होंने सती प्रथा के विरोध में आवाज़ बुलंद की थी.

श्री शेखावत का राजनीतिक कार्यकाल गरीबों की बेहतरी और विकास को समर्पित रहा है .काम के बदले अनाज योजना, अंत्योदय योजना, भामाशाह योजना, प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम आदि के माध्यम से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने का जो सपना उन्होंने देखा था आज साकार हो रहा है . राजनीति के इस माहिर खिलाड़ी ने सरकार में रहते हुए ऐसे ना जाने कितने काम किये जिसका उदाहरण आज भी दिया जाता है .उनके द्वारा शुरू किये गये काम के बदले अनाज योजना की मिसाल दी जाती है .बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या के नियंत्रण को लेकर भी उन्होंने अभिनव प्रयोग करते हुए अधिक संतानें होने पर पंचायतों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया था .

आजीवन भाजपा को समर्पित शेखावत दलगत राजनीति से सदैव दूर रहे .ना केवल मुख्यमंत्री के रूप में बल्कि उपराष्ट्रपति के पड़ पर रहते हुए भी उन्होंने सभी पार्टियों के लोगों से चाहे वे काँग्रेस के हों या साम्यवादी दल के, समान व्यवहार किया . उनके जीवन का एक और तथ्य उल्लेखनीय है कि जब उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ा तो पहले भाजपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था .शेखावत ने पाँच वर्ष के कार्यकाल में अपने गरिमापूर्ण व्यवहार के कारण राज्यसभा में सभी पार्टियों से जो संबंध बनाये रखा वह अपने आप में अनुकरणीय है . किसी ने क्या खूब कहा है :

हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पर रोती है,

बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावार पैदा।

श्री शेखावत का अचानक इस दुनिया से विदा होना भारतीय राजनीति के लिए एक गहरा धक्का है जिसकी क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती है .

सन्दर्भ : पुस्तक “ माटी बन गई चंदन ” , लेखक : मिलापचंद डंडिया

1 Comment

  • Let’s pay our homage to Late Bhairosinghji…! He was one of the greatest leaders of modern India who worked beyond the sights.His honesty ,moralty and sincerity was always praisable.He had the passion for poors.No one can forget his great career.Its a great damage of Indian politics that we have missed him now.

Leave a Reply