आजकल लोकतान्त्रिक राजवंश के युवराज राहुल गांधी युवाओं को खुद से जोड़ने का अभियान जोर-शोर से सरकारी पैसे पर चला रहे हैं । इसी अभियान के तहत राहुल कभी बिहार तो कभी महाराष्ट्र के दौरे करते रहते हैं | वैसे तो मीडिया में राहुल के इस संपर्क अभियान को काफी बढा-चढ़ा कर दिखाया जाता रहा है लेकिन टीवी स्क्रीन के पीछे का सच कुछ और ही है | मंगलवार के दिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आयोजित राहुल की एक सभा में सैकड़ों छात्रों को इस मकसद जुटाया गया था कि वो राहुल ब्रिगेड से जुड़ेंगे लेकिन मामला पलट गया | राहुल की सुरक्षा इन्तेजामों की वजह से जहाँ छात्रों को काफी देर तक तलाशी के कारण परेशान होना पड़ा वहीँ राहुल खुद समय से दो घंटे देरी से आये | इन सब बातों से नाराज युवा छात्र मीडिया में मायूस दिखे खासकर जब राहुल गाँधी ने उनके प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया | एक छात्र ने तो एनडीटीवी को दिए बाईट में यहाँ तक कह डाला कि वो जिस उम्मीद से आये थे उनको बड़ा झटका लगा है | राहुल बाबा ने जो कुछ कहा वो किसी चुनावी सभा की भाषणबाजी लगी |
सभा में राहुल गाँधी ने बोलते हुए छात्रों को बताया कि इंडिया दो तरह का है एक कोर्पोरेट इंडिया और दूसरा पुअर इंडिया ! इस बात पर भी छात्रों ने राहुल की खूब पोल खोली और पूछा कि पुअर इंडिया के लोगों को उस सभा में क्यों नहीं बुलाया गया ?
महाराष्ट्र में राहुल ने क्षेत्रवादी राजनीति करने वालों को पहले भारतीय होने की याद दिलाई। लेकिन राहुल गाँधी और उनकी सरकारें उस वक्त कहाँ छिप जाती हैं जब बिहारियों को मनसे के गुंडों द्वारा बेरहमी से पीटा जाता है ?
अफ़सोस तो ये है कि राहुल के ढोंगपूर्ण राजनीति को आयना दिखाने की हिम्मत आज के पत्रकार खो चुके हैं और जो ऐसा करते हैं उनको तक़रीबन खरीद लिया जाता है | तभी तो बिहार के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में छात्रों के समक्ष गलतबयानी पर राहुल गाँधी द्वारा माफ़ी मांगने की घटना मुख्यधारा की मीडिया से गायब हो जाती है | औरंगाबाद में छात्रों की मायूसी को उलट कर ” राहुल गाँधी से संतुष्ट दिखे युवा ” कह कर दिखाया और छापा जाता है ! जबकि राहुल गाँधी से हर समझदार युवा पूछना चाहता है कि कोर्पोरेट इंडिया और पुअर इंडिया की बात आप किसे सुना रहे हैं ? क्षेत्रवादियों को खाद -पानी देकर बड़ा करने वाले पार्टी के महासचिव होकर आप किस मुंह से उनको भारतीयता का पाठ पढ़ा रहे हैं ?


किस मुंह से ? भाई ये कोई सवाल हुआ . जबाब सीधा है .बेशर्मी से !
जो इस वंश की परंपरा है और ‘ भोंदू बाबा ‘ की विरासत .
इसमें धन और सत्ता से मिडिया प्रबंधन ,गुंडा प्रबंधन ,व्यवस्था प्रबंधन और इस देश की भोली जनता को बहला फुसला बरगला ,वादों से ही उम्मीद भर दिला , साठों सालों से तिकड़म शामिल है .