बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गये हैं | इसी के मद्देनजर भाजपा चुनाव समिति की दो दिवसीय बैठक पटना में हो रही है | बैठक में विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की जाएगी | उम्मीदवारों के चयन और प्रचार के अलावा बैठक में जनता दल (युनाइटेड) के साथ सीटों के तालमेल और मोदी-वरुण के मसले पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है |गौरतलब है कि अभी तक भाजपा और जद (यु) में सीटों का बंटवारा तय नहीं हो पाया है। राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीख 21 अक्टूबर से 20 नवंबर के बीच छह चरणों में घोषित है।
मीडिया सूत्रों के मुताबिक बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के फायर ब्रांड नेता नरेन्द्र मोदी को चुनाव में प्रचार करने लाया जाए या नहीं यह चर्चा का मुख्य विषय है। नीतीश और मोदी के बीच चल रही तकरार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बैठक के दौरान खुलकर सामने आया था | उस दौरान नीतीश ने जिस तरह से भाजपा को चेताया वह रवैया अब तक जारी है |
दिल्ली से लौटते हीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया से कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी राजग का चुनाव प्रचार होगा ना कि भाजपा और जदयू का । पिछले विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी बिहार चुनाव प्रचार में नहीं आए थे। भाजपा-जदयू के बीच खिंचा-तानी का पता इसी बात से चलता है कि इसके तुरंत बाद शाहनवाज हुसैन ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। विधानसभा चुनाव प्रचार में भाजपा के उम्मीदवारों वाले जिस क्षेत्र से जिस भाजपा नेता की मांग होगी, उस क्षेत्र में वे नेता प्रचार करने पहुंचेगें।
उधर पटना के आइएमए हाल में नरेंद्र मोदी फैंस एसोसिएशन द्वारा 17 सितम्बर को मोदी का जन्मदिन मनाया गया । कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा के ताकतवर नेता गिरिराज सिंह की भूमिका हम मानी जा रही है | भाजपा कार्यकारिणी बैठक के दौरान चले हंगामे के दौरान भी नीतीश कुमार को लेकर बयानबाजी के लिए गिरिराज सिंह चर्चा में रहे हैं |
बहरहाल , अंतिम निर्णय तो भाजपा की चुनाव समिति और आलाकमान को ही करना है और ऐसा नहीं लगता है कि विधानसभा चुनाव के दौरान बेवजह का हंगामा होने दिया जायेगा | यदि नीतीश सहमत हो जाते हैं तो ठीक नहीं तो भाजपा आलाकमान बगैर मोदी के चुनाव प्रचार करेगा | देखा जाए तो यदि भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व मोदी को लेकर अड़ता है तब नीतीश कुमार को भी अपनी जिद छोड़नी पड़ सकती है क्योंकि बगैर भाजपा के नीतीश कुमार की वापसी असंभव है | किसी भी हालात में नीतीश कुमार लालू-पासवान से हाथ नहीं मिला सकते और कांग्रेस की हालात इतनी ठीक नहीं हुई है कि हाथ मिलाया जा सके | इस प्रकार जदयू को भाजपा की और भाजपा को भी जदयू की सख्त जरुरत है | इसीलिए इस प्रकरण को जल्द सुलझाना ही राजग गठबंधन सरकार की वापसी सुनिश्चित कर सकता है |


आपने सही लिखा है कि भाजपा और जनता दल (युनाइटेड) को एक दूसरे
की जरुरत है. लेकिन नरेन्द्र मोदी व वरुण गांधी के बिहार में प्रचार करने को लेकर आपके विश्वस्त और उच्च पदस्थ सूत्र क्या कह रहे हैं .