संसद मार्ग|2010/03/11 5:58 pm

महिला आरक्षण एक ऐतिहासिक फैसला

सात सहेलियां खडी -खडी , फ़रियाद सुनाये घडी- घडी | कल और आज में बड़ा फर्क होता है भाई, यहाँ सात सहेलियां बने हमारे सांसदों को घडी- घडी फ़रियाद सुनाने के ईनाम  में  तो मार्शल उठा कर ले गये | और 186 सदस्यों के भारी बहुमत ने महिला आरक्षण विधेयक को राज्यसभा में आख़िरकार पारित करा ही दिया | अब धरना दे रहे इन सांसदों की फ़रियाद कौन सुने ? चलिए कुछ तो ढंग का काम हो ही गया , इसके लिए सभी को बधाई | अब सस्पेंड सांसद सोंचे की और कौन सी वस्तु  फेकने या फाड़ने के लिए बची है ?  विधेयक का पारित होना और इन सांसदों का सस्पेंड होना दोनों ही ऐतिहासिक रहा |
अब थोडा उनके तरफ ध्यान देते है , जिनका ये मानना  है की जिस स्वरुप में ये महिला आरक्षण विधेयक है, अगर इसी स्वरुप में पारित हो गया तो केवल पढ़ी-लिखी , संभ्रांत परिवार से सम्बन्ध रखने वाली महिलाओं का ही फायदा होगा | इससे पिछड़े और कम पढ़ी लिखी महिलाओं में आत्मविश्वास की कमी हो जाएगी | इन नेताओं का मानना है की अत्यंत पिछड़े और अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय  के लिए कोटे की व्यवस्था की जाये | अब इसपर क्या कहा जाये ! बहुत पहले हमारे हिन्दुस्तान में अंग्रजों ने “फूट डालो राज करो” की नीति अपनाई थी | कहीं  आज भी उसी नीति को हिन्दुस्तान में फिर से लाने की कोशिश  तो नहीं की जा रही है |
जिन लोगों को ऐसा लग रहा है की इस महिला आरक्षण विधेयक के आने के बाद पिछड़े और कम पढ़ी लिखी महिलाओं में आत्मविश्वास की कमी हो जाएगी, उनके आत्मविश्वास को बढाने के लिए इन लोगों ने पहले क्या किया है ? अगर इनके आत्मविश्वास में कमी  की इतनी ही चिंता थी तो अभी तक जो चुनाव हुए उसमे इन लोगों ने ऐसी  महिलाओं का आत्मविश्वास क्यूँ नहीं बढाया ?  अत्यंत पिछड़े और अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की महिलाएं, क्या महिला आरक्षण विधेयक के पहले नहीं थी  ? तब आपने क्यूँ नहीं उन्हें आगे बढाने का प्रयास किया ? अगर आपकी चिंता इतनी ही ज्यादा है तो अभी भी देर नहीं हुई  है , आगे आने वाले चुनाव में आप इस आरक्षण का फायदा उन्हें दे और जरुर दे | अगर आप ऐसा करते हैं तो ये वाकई सराहनिए कदम होगा | लेकिन कृप्या करके महिलाओं में आरक्षण के नाम पर फूट तो मत डालिए |
आप महिलाओं का दर्द ज्यादा समझते हैं , तो उन्हें साक्षर बनाने पर कार्य करे , उनके चहुमुखी विकाश पर अपना ध्यान केन्द्रित करें और कोशिश करें की वो भी वर्तमान धारा  में सबके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर चले | आप बार बार पिछड़ा और दलित कहकर क्या उनके आत्मविश्वास में कमी लाने का प्रयास नहीं कर रहे है | भगवान् ने तो पिछड़ा या दलित नहीं बनाया है ये सारी बातें हमारे  धरती पर आने के बाद ही उठायी जाती है ? अगर कोई पिछड़  रहा है तो उसके विकाश के लिए सार्थक कदम उठाने की जरुरत है, ना की उनके उन्नति में रोड़ा अटकाने की | आप आरक्षण में आरक्षण लाकर पिछड़े और कम पढ़ी लिखी महिलाओं या फिर  अत्यंत पिछड़े और अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के लिए क्या साबित करना चाहते हैं ? आप ये सोंचे की आप महिलाओं के लिए क्या करना चाहते हैं?
पुरुष और स्त्री ये दो वर्ग  हैं और इनका अपना अलग से कोई वर्ग तो नहीं है , फिर हम खुद से महिलाओं को वर्गों में विभाजित करने वाले कौन होते हैं | निश्चित  रूप से ये एक पुरुषवादी शासनात्मक  सोंच है जो महिलाओं को बाटने पर तुला हुआ है | आप जिन्हें भी आगे बढ़ाना चाहते हैं आपके लिए राश्ते  पहले भी खुले थे और आज भी खुले हैं , और ये तो बहुत अच्छी बात है की आप जैसे लोग हैं, जो कम पढ़ी लिखी महिलाओं या फिर अत्यंत पिछड़े और अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय की महिलाओं के लिए इतना ज्यादा सोंच रहे , तो अब इस  महिला आरक्षण विधेयक ने तो आपकी सारी परेशानियो  को दूर कर दिया है , अब तो कम से कम इन लोगों के लिए कुछ कर के दिखाएं | हल्ला करना छोडिये और लग जाएँ इनके उस स्तर को सुधारने में जिसकी वजह से आज आपको इतनी पीड़ा पहुँचती है | हम सभी भारतवासिओं   को ऐसा लगेगा की  हां हमारे देश ने दुनिया के आगे एक मिशाल  कायम किया है |आप कुछ ऐसा कर दिखाए की हम गर्व से पूरे विश्व को ये कह सके की हमारे देश में कोई पिछड़ा नहीं है, कोई निरक्षर नहीं है, अत्यंत पिछड़े और अल्पसंख्यक जैसे कोई व्यवस्था हमारे यहाँ नहीं है , हमारा भारत देश एक सूत्र में बंधा है और यहाँ सब एक समान है | अगर इस मुद्दे पर कोई काम कर सके तो बड़ी  मेहरबानी  होगी आपकी समस्त मानव जाति पर | कवि दुष्यंत कुमार के अनुसार  ”कौन कहता है की आसमा में सुराग नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों” | तो महानुभाव पत्थर आसमान में उछाले किसी के ऊपर नहीं |
समय बदल चुका है, आज अगर महिलाओं का संवैधानिक दखल पंचायतों तक पहुंचा  है, तो विधायिका तक भी उनकी पहुँच होनी चाहिए , इसमें अलग से कोई दो राय  नहीं होनी चाहिए |  और यकीं मानिये  सबसे बड़ी बात तो यह है की हम उनपर कोई अहसान नहीं कर रहे है, ये उनकी शक्ति है ,ये उनका विश्वास है , ये उनकी दक्षता है, ये उनकी सम्पूर्णता है | राष्ट्र के संपूर्ण विकाश में उनका आगे आना बहुत जरूरी है | अत: उन्हें आगे आने दे , वो खुद अपनी नारी जाति के प्रति संवेदनशील है , तथा  खुद से अपनी तथा अपनी समस्त जाति के विकाश के प्रति गंभीर भी | आखिर जननी का दर्जा उन्हें ही तो मिला है | है ना ?

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