ममता बनर्जी को लेकर कांग्रेस के अगुवाई वाली सरकार को आये दिन विपक्ष के द्वारा तरह तरह की बाते सुननी पड़ती है | लेकिन सरकार ममता के छाँह में ही रहना चाहती है और आये दिन ममता को लेकर कुछ भी कहने से डरती है | और एक ममता है जिसे किसी की परवाह नहीं है | उसे तो किसी भी तरह रायटर्स बिल्डिंग पर कब्ज़ा जमाना है ,बंगाल उनकी प्राथमिकता है , देश को उनकी नजर में देखने वाले बहुत से लोग हैं | ममता का एक ही मिशन है 2011 में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करना और इसके लिए वो प्रयासरत भी हैं चलिए कुछ तो कर रही हैं वो | हमारे देश में तो ज्यादातर नेता लोग बीच में ही फंसे रहते हैं ममता का विजन स्पष्ट है | ममता जब से रेलमंत्री बनी है तब से रेलवे का मुख्यालय बंगाल शिफ्ट हो गया है , आखिर जब शरद पवार ने भारतीय क्रिकेट का मुखिया बनते ही मुख्यालय मुंबई शिफ्ट करा दिया तो ममता क्यूँ न करे लेकिन यहं ममता मात खा गयीं वो इसे पूरी तरह बंगाल भी शिफ्ट करना नहीं चाहती , सिर्फ काम काज के लिए अधिकारियों को दिल्ली तो कोलकाता के बीच दौड़ लगानी है | यह हुई न ममता की रंगबाजी | वो खुलेआम नक्सलियों का समर्थन करती हैं लेकिन जब समय आता है तो अपने बात से मुकरने से भी नहीं हिचकती हैं | वैसे भी दिल्ली में ममता को क्या मिलेगा , बंगाल की वे मुखिया बन सकती हैं , सारे राज्य पे राज करेंगी | तो उनका हित को बंगाल में ही है | वैसे भी आजकल राजनीती में अगर कोई अपनी बात पर आज भी कायम रहने की हिम्मत दिखा रहा है तो वो ममता बनर्जी ही हैं वैसे भी ममता की नजर 2011 के बंगाल चुनाव पर ही केन्द्रित है और ममता उसके लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहीं हैं ममता एक और बात पर कायम है की चाहे जो भी हो जाए ,चाहे किसी भी मंत्रालय में रहें लेकिन उसका काम बंगाल से ही होना चाहए ,देश को सही मायनो में आज ऐसे लोगो की कमी हो गयी है जो ममता दीदी की तरह बातो पर कायम हो कर दिखाए |देश के ज्यादातर लोग तो काम देख कर बात करतें है ,उसके हर पहलुओ की ओर ध्यान देते हैं ,लेकिन दीदी ने एक सन्देश देना चाहा है उन सभी लोगो को चाहे देश में कुछ भी हो जाए ,आपके फैसले देश को गर्त में ले जाए ,आपके आसपास के लोगो को पीछे कर दे लेकिन आप अपनी बात पर अटल रहो ममता जी तो एक और बात पर उसी समय से अटल रहीं हैं जब वो अटल बिहारी जी के सरकार में रेलवे मिनिस्टर बनी थी तब भी उनका मुख्य लक्ष्य रेलवे की दुर्गति करना ही था ओर आज भी है |बंगाल के बाहर कोई भी रेल हादसा हो जाए लेकिन ममता जी जाने का कष्ट नहीं कर सकती हैं ,उनके अनुसार तो यही सही लगता है की अरे मेरा तो मुख्य काम बंगाल का वोट लेना है देश जाए भांड में |ममता के जूनियर मंत्री भी लगातार कह रहे है की ममता तो उनको कुछ समझती ही नहीं है ,तो मुझे लगता है की उनको अभी भी पता नहीं चल सका है की आखिर ममता हैं क्या ?अरे बंधू लोग जब वो प्रधानमंत्री को समय नहीं दे पाती हैं तो आप किस खेत के मूली है भाई |ममता की एक ओर बात काबिले तारीफ है की एक तरफ तो वो अपने आप को गरीबो का पूरा ख्याल रखने वाली बताती हैं लेकिन यह मोह भी सिर्फ बंगाल तक ही सीमित है | आखिर बात क्या है यह समझ से परे हैं | मुझे एक बात और लगता है की अगर ममता इस जन्म में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनी तो कहीं यह न हो जाए की 7 रेसकोर्स रोड और रायसीना हिल वाली बिल्डिंग भी कोलकाता शिफ्ट हो जाए | मैं एक बात और भी कहना चाहता हूँ क्या ममता जी को यह नहीं पता चलता की किस राज्य के सबसे ज्यादा लोग रेलवे में सफ़र कर रहें है ?रेलगाड़ी की संख्या उनके लिए कम पड़ रही है तो बढाया जाए |एक बात तो सरकार में बैठे लोगो को भी सोचना चाहए की ऐसे लोगो को उस जगह पर नहीं बैठना चाहए जहाँ सारे देश का मामला हो ,अगर ऐसे ही लोगो को इनसब जगहों पर बार -बार जगह दी गयी तो देश का कायाकल्प नहीं हो सकेग|
और जब दोनों तरफ काम हो ही रह है तो परेसानी की कोई बात ही नहीं है | रेल दुर्घटना हो तो सीधे कह दो की विरोधियों की चल है , यह तो कोई ममता से सीखे | इसमें कोई दो राय नहीं है की ममता का मिशन बंगाल बड़ी तेज गति से चल रहा है | केंद्र सरकार भी उनसे हार मान चूकी है , आखिर एक शेरनी जब खूंखार हो जाए तो कौन हार नहीं मानेगा| ममता एक बात बड़ी अच्छे से कहती है की उनकी चाहे लाख बुराइयाँ हो लेकिन वो अपने पथ से हटने वाली नहीं हैं | ममता का जो मिशन है उसकी झलक साफ़ दिखती है | सबसे ज्यादा रेलगाड़ी भी मिशन वाले जगह से गुजारनी चाहिए , आखिर हार रेलमंत्री तो ऐसा ही करता है तो ममता क्यूँ न करे | ममता एक बात बड़ी साफगोई से कहती है की मुझे बदनाम करने की चाहे कितनी भी कोशिश कर लो लेकिन मैं अपने रास्ते से हिलने वाली नहीं हूँ | मिशन तो मैं किसी भी हद पर पूरा करके रहूंगी |

