संसद मार्ग|2010/09/10 9:17 pm

भाजपा के बहकावे में ना आयें , भारत को बचाएं |

जब-जब भी और जहाँ-जहाँ पर भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में रही हैं। उसके नेतृत्व ने देश और समाज को मूर्ख बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोडी है। केवल इतना ही नहीं, इनके गुर्गे (मन्त्री भी) जो संघ एवं विश्वहिन्दू परिषद से आदेश प्राप्त करते हैं, हिन्दुत्व के नाम पर हिन्दू समाज की पिछडी और छोटी जाति के लोगों को मुसमानों के सामने करके अपनी लडाई लडते रहते हैं, जबकि मोदी, तोगड़िया और आडवाणी जैसे तो वातानुकूलित कमरों में आराम फरमाते रहते हैं।

इस बात को तो देश-विदेश के सभी लोग जानते हैं कि गुजरात में हिन्दुओं के हाथों मुसलमानों का कत्लेआम करवाया गया, लेकिन इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं कि जिन हिन्दुओं के हाथों मुसलमानों का कत्लेआम करवाया गया, वे कौन थे और उनकी वर्तमान दशा क्या है? गुजरात के दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी एवं पिछडी जाति के लोगों के घरों में स्वयं भगवा ब्रिगेड के लोगों द्वारा आग लगाई गयी थी। अनेकों हिन्दुओं को इस आग के हवाले कर दिया गया और बतलाया गया कि मुसलमानों ने हिन्दुओं को जला दिया है। जिससे आक्रोशित होकर इन भोले-भाले अशिक्षित हिन्दुओं ने अनेक निर्दोष मुसलमानों के घरों में आग लगा दी। अनेकों को मौत के घाट उतार दिया।

आज ये गरीब और बहकावे में आने वाले आदिवासी हिन्दू या तो जेल में बन्द हैं या जमानत मिलने के बाद कोर्ट में पेशियाँ दर पेशियाँ भुगतते फिर रहे हैं। इन्हें हिन्दुत्व के नाम पर मुसलमानों के विरुद्ध भडकाने वाले कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आते हैं।

हिन्दुत्व के नाम पर संघ शाखाओं में हाथियारों के संचालन का प्रशिक्षण प्रदान करके सरेआम आतंकवाद को बढावा दिया जा रहा है। तोगड़िया त्रिशूल और भाला बांट रहे हैं। संघ से जुडे अनेक लोग अनेक आतंकवादी घटनाओं में पकडे जा चुके हैं। जिन्हें बचाने के लिये संघ एवं भाजवा वाले इसे सोनिया सरकार की चाल बतला रहे हैं।

बस यात्रा के बहाने पाकिस्तान से दोस्ती का नाटक खेलने वाले पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी की अदूरदर्शिता एवं देश विरोधी नीति के चलते हजारों सैनिकों को कारगिल में मरवा दिया। हजारों सैनिकों को हमारी ही धरती पर मारगिराने वाले पाकिस्तानियों को वापस पाकिस्तान में सुरक्षित चले जाने की लिये वाजपेयी सरकार ने वाकायदा सेना को चुप रहने एवं पाकिस्तानियों पर आक्रमण नहीं करने का आदेश दिया था। इसके बाद लम्बे समय तक आर-पास की लडाई की बात का नाटक करके हिमालय की ऊँची बर्फीली की चोटियो पर हमारे सैनिकों को तैनात करके अनेक सैनिकों को बेमौत गल-गल कर मर जाने को विवश कर दिया।

इसके बाद भी भाजपा, संघ और विहिप द्वारा बेशर्मी से प्रचारित किया गया कि वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने कारगिल में पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की। इसी प्रकार से हजारों करोड डालरों से भरे बक्सों के साथ कन्धार में दुर्दान्त आतंकियों को छोडकर आने वाले वाजपेयी सरकार के विदेश मन्त्री जसवन्त सिंह को जिन्ना का गुणगान करने पर पहले तो बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन जैसे ही पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शैखावत का निधन हुआ तो राजपूत वोटों को लुभाने के लिये बिना शर्त वापस बुला लिया गया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री हर साल पांच सितम्बर को शिक्षकों के पैर पखारते (धोते) हैं और इस बात का नाटक करते हैं कि भाजपा के राज में गुरुओं का सर्वाधिक सम्मान होता है। जबकि सच्चाई को जानना है तो गत शिक्षक दिवस से ठीक पूर्व वेतन नहीं मिलने के चलते शिक्षक की मौत के लिये जिम्मेदार मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री की असली तस्वीर को ब्लॉग लेखक श्री अजीत ठाकुर के निम्न समाचार से समझा जा सकता है।

“होशंगाबाद जिले की पिपरिया तहसील के ग्राम मटकुली में एक व्यक्ति की मौत हो गई। ये कोई साधारण मौत नहीं है, ये मौत करारा तमाचा है, हमारे शिक्षातंत्र पर और हमारी व्यवस्था की भयानकतम असंवेदनशीलता का नमूना, ये एक शिक्षक की मौत है। चार महीने से वेतन नहीं मिल पाने की वजह से बीमार सहायक अध्यापक हरिकिशन ठाकुर ने बेहतर इलाज के अभाव में दम तोड दिया। इनकी मौत के 6 दिन बाद ही इनका परिवार भूखे मरने की नौबत में है। ये उस देश में हुआ है, जहाँ गुरु को गोविन्द से बडा बताया गया है, जहाँ पर एक दिन अर्थात् 5 सितम्बर शिक्षक दिवस शिक्षको को समर्पित है। ये उस प्रदेश में हुआ जहाँ के माननीय मुख्यमंत्री जी (शिवराज सिंह चौहान) शिक्षक दिवस पर शिक्षको के पैर धोकर उनका सम्मान करते हैं। इस असंवेदनहीन व्यवस्था में हम कैसे किसी द्रोण या चाणक्य (के पैदा होने) की उम्मीद कर सकते हैं और जब द्रोण और चाणक्य नहीं होंगे तो अर्जुन और चन्द्रगुप्त की उम्मीद तो बेमानी है।”

केवल इतना ही नहीं देश के लोगों को इस बात को भी ठीक से समझ लेना चाहिये कि-

कश्मीर की वर्तमान दु:खद स्थिति के लिये भी प्राथमिक तौर पर ये ही कथित हिन्दुत्ववादी आतंकी ताकतें ही हर प्रकार से जिम्मेदार हैं।

तत्कालीन कश्मीर पर पाकिस्तानी हमले के लिये भी इन्हीं के विचार जिम्मेदार थे।

इन ताकतों को इस बात से बखूबी पहचाना जा सकता है कि पहले तो इन्होने भारत में कश्मीर के विलय का ही विरोध किया था और तत्कालीन कश्मीर सरकार पर नेहरू के कूटनीतिक दबाव कारण विलय सम्भव हो भी गया तो इनको विलय का तरीका ही नहीं सुहाया और कश्मीर में साम्प्रदायिकता की नफरत का बीज बोने के लिये इनके नेताओं ने तरह-तरह के नाटक किये गये। जिनके कारण कश्मीर से हजारों पण्डित बेघर हो गये और इस पर भी तुर्रा ये कि ये अपने आपको राष्ट्रवादी कहते हैं। अखण्ड भारत की बात करते हैं।

देश को तोडने के लिये कुटिल चालें चलने में माहिर ये अनीश्वरवादी हिन्दुत्व के ठेकेदार, ईश्वर के नाम पर 1947 से भारत के भोले-भाले हिन्दुओं को लगातार बहकाने और उकसाने के अपराध में संलिप्त हैं।

भाजपा की पूर्व मुख्यमन्त्री वसुन्धरा राजे ने राजस्थान में शराब, शबाब और जमीन बेचकर भ्रष्टाचार को बढावा देने में कोई कोर-कसर नहीं छोडी थी और राजस्थान को कई दशक पीछे धकेल दिया। हर राज्य में इनकी करनी और कथनी में धरती आसमान का अन्तर स्पष्ट नजर आता है। इनका एक मात्र कार्य है किसी भी प्रकार से समाज में अमन-शान्ति और भाईचारा बिगडा रहे, जिससे ये अपनी राजनीति की रोटियाँ सेकते रहें।

यह है असली चेहरा-भाजपा और संघ के संस्कृति और राष्ट्रवादी चरित्र का।

अब जबकि 24 सितम्बर को अयोध्या-बाबरी भूमि विवाद पर मालिकाना हक का निर्णय सुनाये जाने की तारीख घोषित हो चुकी है तो भाजपा, आरएसएस एवं विश्व हिन्दू परिषद तथा इनके अनुसांगिक संगठनों की ओर से हिन्दुत्व के नाम पर समाज को साम्प्रदायिकता की आग में धकेलने की पूरी तैयारी शुरू की जा चुकी है। मोबाईल पर मैसेज के जरिये लोगों को उद्वेलित करके भडाया जा रहा है और जैसे ही मौका मिलेगा, ये देश के माहौल को बिगाडने के लिये कुछ भी करने को तैयार बैठे हैं।

जबकि आम लोगों को इस बात का ज्ञान ही नहीं है कि भाजपा एवं इसके समर्थक जिस हिन्दुत्व को मानते हैं, उसमें ईश्वर को ही नकारा गया है। इनके आदर्श हैं सावरकर जो ईश्वर की सत्ता में कतई भी विश्वास नहीं करते, तब ही तो इनके लिये निरीह गाँधी का वध गर्व की बात है।

इस समय भाजपा अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष कर रही है। इसलिये अब हम भारतीयों को चाहिये कि धर्म का मुखौटा पहनकर देश को तोडने वाली भाजपा, संघ, विश्व हिन्दू परिषद आदि के नाटकीय बहकावे में नहीं आना है और मुसलमानों को इनके उकसावे में आकर अपना धैर्य नहीं खोना है। अन्यथा ये धर्मविरोधी संगठन 24 सितम्बर को इस देश के सौहार्द को बिगाडने में कोई कोर कसर नहीं छोडेंगे। विश्वास करें, इनके साथ केवल देश के 1 प्रतिशत लोग भी नहीं हैं। शेष लोगों को तो ये मूर्ख बनाकर साम्प्रदायिकता की आग में झोंकरकर अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं! अत: हमें भाजपा को नहीं, बल्कि हर हाल में भारत को और भारतीयों को बचाना है।

11 Comments

  • सुरेश चिपलूनकर

    हा हा हा हा हा हा हा… मजेदार कॉमिक लेख है…
    टाइम पास के लिए इस लेख को पढ़ा जा सकता है…

    आईये सब मिलकर मीणा जी के उत्तम स्वास्थ्य हेतु प्रार्थना करें…

  • लगता है सोनिया माता ने मीणा जी को गोद ले लिया है. उनकी संस्था को करोडो का दान मुहैया कराया है. उन्हें अब सोनिया टाइम्स अख़बार निकालने कि जरूरत है. जिससे कांग्रेस और गाँधी शब्द का प्रयोग करने वाले नेहरु खानदान का गुणगान करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हो सकेगा.

  • आदिवासी हिन्दू, हिन्दू तो हिन्दू है. फिर आदिवासी क्या और फॉरवर्ड क्या? मीणा जी आप ने मुसलमानों का उल्लेख नहीं किया कि वे सिया है सुन्नी है या मुल्ला, मौलवी या आलम, अंसारी.? आप जैसे हिन्दुओ के कारन ही. मुसलमानों का मनोबल बढ़ रहा है. और हम बहुसंख्यक होकर भी अपने हिंदुस्तान में राम मंदिर नहीं बना सके है और मुसलमानों कि अनुमति को तरसते है. और एक पाकिस्तान है जो बने मंदिरों को भी नेस्तनाबूत करता जा रहा है. अब आपको हाथ जोड़कर भगवान को पूजने कि जरुरत नहीं है. बल्कि हाथ खोलकर नवाज पढ़ा करे. तब आप अवस्य समाज सेवक से सही राजनीतिज्ञ बन जायेंगे और राहुल गाँधी आपको कांग्रेस से अवस्य टिकट चुनाव में दे देगी. बोलिए कांग्रेस की जय.

  • लेख के आरम्भ में मीणा जी ने कहा है भाजपा छोटे जाति के लोगों को मुसलमानों के खिलाफ इस्तेमाल करती रही है जो कि बेबुनियाद आरोप है ! यदि ऐसा हुआ भी है तो सत्ता सुख में भागेदारी के लिए भी भाजपा ने पिछड़ों और आदिवासियों को नेतृत्व सौंपा है > गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी ओबीसी से आते हैं , एम्पी के मुख्यमंत्री चौहान एससी हैं , आजकल में सपथ लेने वाले अर्जुन मुंडा आदिवासी समाज से हैं और यहाँ तक कि राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले विनय कटियार भी ओबीसी से आते हैं और शिलान्यास कर्ताओं में से एक और महत्वपूर्ण व्यक्ति जिन्होंने ईट रखी थी वो कामेश्वर चौपाल एससी हैं | ऐसा लगता है मीणा जी को एकतरफा सोचने की आदत है ! वैसे इनके आलेखों में खुद विरोधाभास रहता है | अभी पिछले लेख में हिंदुवादियों की सरकार बनाने के सुझाव दे रहे थे और अब पलटी मारकर हिंदुवादियों को बेमतलब कोस रहे हैं |

    जहाँ तक बात देश में साम्प्रदायिकता को खाद-पानी देने की है तो यह काम कांग्रेस से नेह्तर कौन कार सकता है ? जरा शाहबानो प्रकरण और राम मंदिर का ताला खुलवाने की घटना को याद करिए !

    आगे बढ़ते हैं , कारगिल युद्ध की बात है तो यह ना तो पहला युद्ध था और ना ही पहला दोस्ती का प्रयास था ! 1948 ,1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध हुआ था और दर्जनों बार दोस्ती-सुलह की कोशिशें होती रही हैं | और इनमें से किसी भी एक युद्ध में बताएं जिसमें कारगिल युद्ध से कम मौतें हुई हों ? सबसे बड़ी बात यह है कि दोस्ती की आड़ में पाकिस्तान ने भारत की पीठ में छुरा घोंपा था | यदि , अटल बिहारी वाजपेई पाकिस्तान के खिलाफ खुला युद्ध छेड़ते तो मीणा जी जैसे लोग हीं आज उस लड़ाई को मुसलमानों के खिलाफ बुश की तरह अमानवीय करवाई बताते |

    – कश्मीर की वर्तमान दु:खद स्थिति के लिये भी प्राथमिक तौर पर कथित हिन्दुत्ववादी आतंकी ताकतें को हर प्रकार से जिम्मेदार बताने वाले मीणा जी भूल गये कि इसी कश्मीर में लाल चौंक में तिरंगा फहराने वाले श्यामाप्रसाद मुखर्जी शहीद हो गये थे और वो भी संघ परिवार से थे ! अब जरा ये बताएं कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को घर से बेघर करने के लिए हिन्दुत्ववादी ताकतें किस प्रकार जिम्मेदार हैं ? मुसलमान बहुल कश्मीर में जहाँ हिन्दुओं के साथ दो दशकों से अत्याचार हो रहा हो वहां के आतंकी हालात के लिए कौन सी वाजपेई सरकार जिम्मेदार है ? पाकिस्तान पोषित कश्मीरी आतंकवाद के लिए कौन सा हिन्दुत्ववादी संगठन जिम्मेदार है ?

    राजस्थान में वसुंधरा राजे को शराब ठेकों की वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले जरा क्षेत्रफल के हिसाब से हर राज्य में शराब की दुकानों की संख्या का सर्वेक्षण कर लेते तो बेहतर होता ! पंद्रह सालों से दिल्ली की शीला सरकार इस मामले में राजे से कई गुना आगे है लेकिन कभी देश में बढ़ते शराब ठेकों पर इन्होने एक लेख लिखकर सभी राज्यों का हिसाब नहीं लगाया !

    बाकि आप सभी खुद पढ़िये और अपने विचार दीजिये !

  • च …च ..च…च सचमुच एक कामेडी के आलावा कुछ नही है जिसे कामिक्स का एक पार्ट कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी|
    जय हो मीणा जी, लिखते रहिये बहुत अरसा सो गया है कामिक्स पढ़ने को

  • सुरेश जी ,कहीं आपका मतलब मानसिक स्वास्थ्य से तो नहीं ? सुना है की मीणा जी चिकित्सक हैं . भगवान भला करे इनके मरीजों का !

  • डॉ राजेश कपूर

    इतना अधिक भाजपा का बढा-चढा कर विरोध और ५५ साल के शासन में कांग्रेस द्वारा देश के विनाश पर एक शब्द भी नहीं. ऐतिहासिक तथ्यों को तोड-मरोड कर, झूठ का तगडा तडका लगाकर पेश करने का एक ही अर्थ हो सकता है कि अन्धा पूर्वाग्रह है और कोई निहित स्वार्थ साधने की गुप्त साजिश है. इतनी अधिक अतिवादी मुखालफ़त से तो कोई भी समझ जायेगा कि दाल में कुछ नहीं, बहुत कुछ काला है. जो कांग्रेस देश के सारे संसाधन विदेशी कंपनियों के हाथ में सौंप रही है, इसके लिए लाखों देशवासियों को उजाड़ रही है, उनकी ज़मीनें चीन कर उन्हें भूखे मरने को बाध्य कर रही है ; देश के हितों को विदेशियों के हाथ बेचने वाली कांग्रेस के बारे में आप ने एक शब्द भी नहीं कहा. अब इसमें क्या संदेह रहा कि आप इमानदारी से लेखन नहीं कर रहे. देश हित में नहीं, एक दल के हित में दुर्भावना से लेखन करके पाठकों को बहकाने का प्रयास कर रहे हैं. आपको कोई नहीं रिक सकता, पर इस प्रकार आप की विश्वसनीयता कहाँ बचेगी ? कृपया देश हित में अपनी प्रतिभा का प्रयोग करें न कि भाजपा के अतिवादी, दुराग्रही विरोध में. यदि आप भाजपा , कान्ग्र्वेस दोनों के विरुद्ध सही और संतुलित आलोचना लिखें तो उससे कोई भे सहमत होगा. पर यह साहित्यिक आतंकवाद तो ठीक नहीं, शोभनीय नहीं. बुरा मने बिना ज़रा अपने लेखन को देखें कि आप सभ्यता की से४एमा का उल्लंघन कितनी बुरी तरह कर रहे हैं और असत्य का प्रचार कर रहे हैं. इतिहास तो और लोग भी पढ़ते हैं. अतः ये चल नहीं पायेगा. यदि मेरी किसी बात से कष्ट पहुंचा हो तो मुझे खेद है , पर आप बाध्य कर देते हैं.

  • जनोक्ति में भी कचड़ा छपने लगा …..वाह ….

  • जयराम "विप्लव"

    माननीय प्रकाश पंकज जी , आपकी प्रतिक्रिया में जनोक्ति से आपकी अपेक्षाएं देख कर बहुत ख़ुशी हुई ! डॉक्टर मीणा काफी समय से जनोक्ति पर लिख रहे हैं , उनके कई लेख काफी सार्थक हैं हालाँकि इस लेख को डालते समय मुझे ऐसी प्रतिक्रियाओं की उम्मीद थी लेकिन मैंने अपने विवेक के अनुसार लेख डालना उचित समझा | इससे पहले मीणा जी ने एक लेख लिखा था “हिन्दू क्यों नहीं चाहते ,हिंदूवादी सरकार ? ” जिसमें उन्होंने खुद को भाजपा का हितैषी बताते हुए हिंदूवादी सरकार बनाने के नुस्खे बताये थे लेकिन उनका यह लेख उनकी ही बातों के ठीक विरोधाभाषी है | तो यही सब देख कर पाठकों के अवलोकनार्थ यह लेख डाला गया | अनेक पाठकों ने यथासंभव उनके हर तथ्यविहीन आरोपों का खंडन किया है | मीणा जी भी हमारे ही समाज के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधि होने का दावा करतेहैं तो हमारा भी कर्तव्य है कि उनकी बातों को सुनें !

    पंकज जी से आग्रह है कि इस लेख का खंडन करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दें और बताएं कि उन्होंने यदि इस लेख को कचड़ा बताया है तो उसके पीछे क्या कारण है ?

    अंत ,में पुनश्च आपका साधुवाद !

  • जयराम "विप्लव"

    इतना अधिक भाजपा का बढा-चढा कर विरोध और ५५ साल के शासन में कांग्रेस द्वारा देश के विनाश पर एक शब्द भी नहीं. ऐतिहासिक तथ्यों को तोड-मरोड कर, झूठ का तगडा तडका लगाकर पेश करने का एक ही अर्थ हो सकता है कि अन्धा पूर्वाग्रह है और कोई निहित स्वार्थ साधने की गुप्त साजिश है. इतनी अधिक अतिवादी मुखालफ़त से तो कोई भी समझ जायेगा कि दाल में कुछ नहीं, बहुत कुछ काला है. जो कांग्रेस देश के सारे संसाधन विदेशी कंपनियों के हाथ में सौंप रही है, इसके लिए लाखों देशवासियों को उजाड़ रही है, उनकी ज़मीनें चीन कर उन्हें भूखे मरने को बाध्य कर रही है ; देश के हितों को विदेशियों के हाथ बेचने वाली कांग्रेस के बारे में आप ने एक शब्द भी नहीं कहा. अब इसमें क्या संदेह रहा कि आप इमानदारी से लेखन नहीं कर रहे. देश हित में नहीं, एक दल के हित में दुर्भावना से लेखन करके पाठकों को बहकाने का प्रयास कर रहे हैं. आपको कोई नहीं रिक सकता, पर इस प्रकार आप की विश्वसनीयता कहाँ बचेगी ? कृपया देश हित में अपनी प्रतिभा का प्रयोग करें न कि भाजपा के अतिवादी, दुराग्रही विरोध में. यदि आप भाजपा , कान्ग्र्वेस दोनों के विरुद्ध सही और संतुलित आलोचना लिखें तो उससे कोई भे सहमत होगा. पर यह साहित्यिक आतंकवाद तो ठीक नहीं, शोभनीय नहीं. बुरा मने बिना ज़रा अपने लेखन को देखें कि आप सभ्यता की से४एमा का उल्लंघन कितनी बुरी तरह कर रहे हैं और असत्य का प्रचार कर रहे हैं. इतिहास तो और लोग भी पढ़ते हैं. अतः ये चल नहीं पायेगा. यदि मेरी किसी बात से कष्ट पहुंचा हो तो मुझे खेद है , पर आप बाध्य कर देते हैं.

  • get well soon

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