अपने अज्ञातवास के अंतिम समय में अर्जुन ने विराटनगर,नेपाल के राजा की गायो के हरण कर चुके कौरवो से जिस जगह युद्ध कर रक्षा की वो जगह ही गो रक्षा पुर या गोरखपुर कहलाई. अर्जुन की तरह ही आज भी
Author: अनिकेत प्रियदर्शी
अनिकेत प्रियदर्शी ,
जीवन साधना का अर्थ है- अपने समय, श्रम ओर साधनों का कण-कण उपयोगी दिशा में नियोजित किये रहना।-
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