थर्ड क्लास राजनीति का फर्स्ट क्लास उदाहरण


भारत में आये दिन कुछ ऐसी राजनीतिक बयानबाज़ी सुनने को मिल जाती है , जो बहुत घटिया स्तर की राजनीति को परिभाषित करती हुई प्रतीत होती है | वैसे भी पिछले दो तीन दशक में राजनैतिक स्थिति इतनी बदत्तर हो चुकी है की कब, किसको, कहाँ, क्या, बोल दिया जाये इसका किसी को पता नहीं होता | एक बयान “यदि मुझे पता होता की अमिताब बच्चन सी- लिंक के उदघाटन में शामिल होने को आमंत्रित है, तो मैं वहां नहीं जाता”……….और बयान बहादुरों की इसी जमात में एक और नाम जुड़ा श्रीमान अशोक चौहान का | पर ये श्रीमान अशोक चौहान हैं कौन ? ओह्ह.. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री | तो ?……..इसमें ऐसी क्या बात है ? महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने पर क्या एक इंसान को कही भी कुछ भी बोल देने का अधिकार हो जाता है ? क्या भारत के और अन्य राज्यों में मुख्यमंत्री नहीं हैं ? ऐसी कौन सी विशेषता है इनमे ????

मुझे अभी भी समझ में नहीं आया की ये बयान देकर श्रीमान अशोक चौहान कहना क्या चाहते थे ? मुख्यमंत्री के मुखमंडल से अपने राज्य के उस व्यक्ति पर शाब्दिक प्रहार, जिन्होंने न केवल उनके राज्य का बल्कि समूचे भारतवर्ष का नाम पूरे विश्व में गौरवान्वित किया हो, न केवल उनकी वैचारिक दुर्बलता को दर्शता है, बल्कि ये भी दिखाता है की महाराष्ट्र में कोई भी राजनीतिक पार्टी क्यूँ न हो … उनके वक्तव्य में क्षेत्रवाद की बदबू घुली हुई मिल ही जाती है | आप जो भी कह गए, क्या बस ऐसे ही कह गए या फिर…… आपकी पार्टी ने आपको इसके लिए भी दिशा निर्देश दे रखा था ? अगर दिया भी होगा तो क्या फर्क पड़ता है | कांग्रेस की राजनीति कोई दूध की धुली हो ऐसा तो है नहीं | पर फिर भी क्या आपको ये सचमुच पता नहीं था की वहां अमिताभ बच्चन भी आमंत्रित थे ? और ऐसी कौन-सी बात अमिताभ बच्चन ने कर दी जो आप उन्हें देखना भी पसंद नहीं करते ?

आप राज्य के मुख्यमंत्री है और आप अपनी ही प्रजा को नहीं देखना चाहते ? आपके एक प्रवक्ता ने कहा की अमिताभ बच्चन ने गुजरात का गौरव गान कर पार्टी के लोगों को नाराज कर दिया है | तो……………… ? अमिताभ बच्चन पूरे देश के हैं | वो जहाँ की चाहे गुणगान कर सकते हैं, इसका उन्हें पूरा अधिकार है | आपके कार्यकर्ता या आपकी पार्टी किस कानून के तहत उनसे नाराज है ? क्या गुजरात भारतवर्ष का हिस्सा नहीं है ? आप और आपके पार्टी वाले …..अगर किसी से नाराज भी हैं, तो क्या फालतू कारण देते रहते हैं | क्या आपको देश के सभी राज्यों से खुन्नस है ? कभी यूपी, बिहार, तो कभी मद्रास, गुजरात …इन्ही बचकाना बातों की राजनीति पूरे राज्य में करते रहना अब आप लोगों की फितरत हो गयी है क्या ? किसी भी दूसरे राज्य ने अगर उन्नति की है , तो इसमें आपको जलन क्यूँ होती है ? और अगर किसी की उन्नति का जिक्र किया जाये तो भड़क क्यूँ उठते है ?

हमारे देश में कम से कम उन लोगों को तो राजनैतिक उठा पटक में बिलकुल भी नहीं घसीटना चाहिए , जो हमारे देश की वैश्विक पहचान है | आज अमिताब बच्चन का सम्मान पूरी दुनिया में किया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा कारण, उनका श्रेष्ट आचरण और अतिविनम्र स्वभाव है | वो कभी भी ऐसी बातों को नहीं करते है जिससे किसी को दुःख पहुंचे | फिर भला किसी बिना मतलब के बात के लिए, उनके दिल को दुःख पहुंचाना, कहाँ से जायज है | आपके यहाँ कभी सचिन तेंदुलकर को मुह बंद रखने की सलाह दे दी जाती है , तो कभी किसी को अपने व्यापार से मतलब रखने की सीख दे दी जाती है | ये होता क्या है आपके यहाँ ? महाराष्ट्र की राजनीति, आज के दौर में थर्ड क्लास राजनीति का फर्स्ट क्लास उदाहरण बनता जा रहा है , ऐसा कहना कहीं से भी गलत नहीं होगा | आज जहाँ पूरी दुनिया जिस शख्स का सम्मान करने को आतुर रहती है, उसके प्रति आप लोगों की भावना में ऐसी कटुता, कहीं न कहीं देश की ओछी, भद्दी,कुरूप और मानसिक तौर पर जंग लगी राजनीतिक हाल का परिचायक नहीं तो और क्या है ? आपकी थर्ड क्लास राजनीति पर मशहूर शायरा शबीना अदीब की शायरी की कुछ पंक्तियाँ बहुत सटीक बैठती हैं की —- आग, धुंआ, नफरत फैली और जीत हुई शैतान की, ये कैसे तश्वीर बना दी तुमने हिन्दुस्तान की………..आमची मुंबई कहने वाले कब तक राग ये गाओगे, क्या शहर मुंबई को अपनी चिता में लेकर जाओगे |

आज के दौर में भारत में जो राजनैतिक बदहाली है, उसका प्रतिदिन कहीं न कहीं से कोई ताजा उदाहरण देखने को मिल ही जाता है | कहीं कोई नेता जी नारी के पीछे खड़े होकर सिटी मारने की बात करते नजर आ जाते है, तो कहीं कोई नेताजी अपनी लाश पर ही किसी बात के पूरा होने जाने की बात करते नजर आते हैं | वैसे ये उनकी राजनैतिक गुलाटी के अलावा कुछ नहीं है , पर आज राजनीति के इस दिवालियापन को देख मन में एक ख्याल तो जरुर आता है, की क्या ऐसे ही दिनों को देखने के लिए हम इन्हें चुन कर , अपना प्रतिनिधि बनाकर देश के सर्वोच्च स्थान पर भेजते हैं ? इनकी ऐसी हरकतों के जिम्मेदार क्या खुद हम नहीं है ? क्या ये हमारी गैर जिम्मेदारी के परिचायक तो नहीं ? या फिर ये राजनीति जगह ही ऐसी है, जहाँ जो जैसा भी जाये बाद में दिखने में एक जैसा ही लगने लगता है | आज की अगर चालाक, चापलूस, चाटुकार, एवं चालबाजों की राजनीती में कल किसी और मशहूर व्यक्ति को निशाना बना कर कुछ अपमानजनक भाषा का प्रयोग उनके खिलाफ कर दिया जाये, तो शायद ये अचरज की बात नहीं हो |

  • Share this post:
  • Facebook
  • Twitter
  • Delicious
  • Digg

Leave a Reply