लगता है देश में कांग्रेस शासन से फैली महंगाई का असर अब छात्र संघ चुनावों पर भी पड़ने लगा है. मीडिया की सरकारपरस्ती के कारण युवाओ के चहेते बताये जाने वाले राहुल गाँधी का असर भी इस बार फीका पड़ता दिखाई दिया. इसीलिए तो डूसू के चुनाव में कांग्रेस के एनएसयूआई ने न सिर्फ शिकस्त खाई बल्कि तीन महत्वपूर्ण पदों को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से गवां बैठी. दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ में अध्यक्ष पद पर जीतेन्द्र चौधरी , उपाध्यक्ष पर प्रिया डबास और सचिव पद पर नीतू डबास ने हजारों मतों के अंतर जीत दर्ज की जबकि सह-सचिव पद के अभाविप प्रत्याशी पंडित सौरभ उनियाल महज 625 मतों से पिछड़ गये. उधर डूसू चुनाव से ठीक पहले राजस्थान छात्रसंघ चुनाव में भी नज़ारा कुछ ऐसा ही रहा . दोनों जगह कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी अभाविप की जीत से तो यही लगता है कि देश का युवा ना केवल कांग्रेस की भ्रष्ट नीतियों से पूरी तरह तंग आ चुका है बल्कि राहुल गाँधी की ढोंगी राजनीति को समझ चुका है . हार का सबसे बड़ा कारण लिंगदोह समिति की सिफारिशों को माना जा रहा है जिसके बदौलत धन-बल का प्रयोग थोड़ा कमा है और ऐसा भी कहा जा रहा है कि जिसका संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत होगा आगे भी वही चुनाव जीतेगा . इतना ही नहीं पार्टी दिल्ली में २००८ के विधानसभा चुनाव और २००९ के लोकसभा चनाव के जीत को छोड़ दे तो स्थानीय स्तर के चुनाव लगातार हारती आ रही है. क्योंकि माना जाता है की पार्टी अपने अनाप-सनाप खर्चे और धन-बल का प्रयोग कर हरबार जीत जाती है. छात्र संघ चुनावों में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआइ की हार से यही साबित होता है कि अगर लिंगदोह की सिफारिशे विधानसभा और लोकसभा में भी लागू कर दी जाये तो शायद महंगी कांग्रेस सरकार से लोगो का पीछा छुट जाये.
इतना ही नहीं इसबार कॉमनवेल्थ की आड़ में जिस तरह से कांग्रेस सरकार ने काले धन जमा किये और दिल्ली में किराया से लेकर सभी खाने-पीने की सामग्रियों के अंधाधुंध दाम बढ़ाये इससे भी दिल्ली की जनता काफी नाराज दिखाई दे रही है. और तो और भगवान भी इस बड़े घोटाले से इतने आहात हुए है कि इन्द्रदेव भी इसे रोकने के लिए ज्यादा-से-ज्यादा बारिश कराकर भ्रष्टाचार के इस खेल को रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है.
देश में जिस तरह से शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है इससे भी युवा और विद्यार्थी मौजूदा सरकार से काफी नाराज है. भाजपा ने तो कांग्रेस को उलटी गिनती शुरू करने की हिदायत दे दी है. उधर कांग्रेस हार की वजहों को समझने में जुटी हुई है.


छात्र नहीं तो कौन समझेगा कि सोनिया और राहुल इस भारत पर परजीवी हैं। उनकी जड़ें भारत की धरती से कटी हुई हैं। जब तक इस देश की बागडोर भारत की धरती से गहराई से जुड़े हुए किसी व्यक्ति के हाथ में नहीं आ जाती, भारत की अस्मिता और आत्मसम्मान पर ग्रहण लगा रहेगा।
janvirodhi sarkaro ke khilaf jab jab tarunai ne awaj utha ke andolan kiya hai sarkare badal gayi hai….ab in vijau student leaders ko pure desh me khum ke sarakar ki janvirodhi nition ka pardafash karna chahiye…