बिहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इसे देख कर कुछ दिनों से बिहार में हर दिन राजनीति में कुछ-न-कुछ हो रहा है। वोट की राजनीति करने के लिए यहां के नेता कुछ भी करने को तैयार हैं। इसी क्रम में नीतीश सरकार में पूर्व आबकारी मंत्री रहे जमशेद ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया। एक नजर बिहार की वर्तमान राजनीति पर।
कहते हैं राजनीति में सभी एक ही थैली के चट्टे -बट्टे होते हैं। कब ,कैसे और किधर पाला बदल ले ,कहना मुश्किल है । यानि कि जिधर मलाई देखा ,उधर ही मुड़ गया। चाहे इसके लिए जनता कुछ भी सोचे ? उन्हें तो अपनी कुर्सी प्यारी है जनता की भावनाओं का कोई ख्याल नहीं है। चुनाव का समय है और किसी राजनीतिक पार्टी का सहारा चाहिए। क्योंकि जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का एक बार फिर से समय आ गया है। और जनता से वोट मांगने के लिए राजनीतिक दलों का सहारा बहुत जरूरी हो गया है वर्तमान समय में। तभी तो नीतीश सरकार से जब खटपट हुई ,तो जमशेद ने आबकारी विभाग के अधिकारियों की पोल खोलनी शुरू कर दी। उन्होंने नीतीश सरकार पर मनमानी करने का आरोप लगाया था, और कहा था कि इस सरकार में सिर्फ नीतीश और मोदी की ही चलती है, बाकी मंत्रियों की कोई नहीं सुनता है। सवाल ये है कि जब उनकी मनमानी चलनी बंद हो गई तो सरकार की पोल खोलने में लग गए और जब तक सब कुछ ठीक था किसी के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा। बिहार में लगातार दल बदलने का क्रम जारी है और ये चुनाव तक जारी ही रहेगा। पिछले लोकसभा चुनाव में भी कई नेताओं ने पार्टी बदली और चुनाव हारने या जीतने के बाद फिर पार्टी बदल ली। कह सकते हैं कि कपड़े के ही समान पार्टी बदली। आज की तारीख में पार्टी का मतलब होता है कुर्सी। यानि कि जितनी बड़ी कुर्सी उतनी ही बड़ी पार्टी।
ऐसे में कांग्रेस में शामिल हुए जमशेद कांग्रेस के लिए कौन सा इंद्रजाल करते हैं और कांग्रेस जमशेद के लिए क्या करती है , ये तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा। तब तक पार्टी बदलने का दौर बिहार में जारी रहने की संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। क्योंकि अभी तो आगाज हुआ है पूरा होने में अभी समय है।


कांग्रेस हो या बीजेपी या हो JDU इन सब को अपने भलाई की चिंता है बिहार और बिहार की जनता को तो अपनी भलाई के लिए एकजुट होकर खुद ही कुछ करना होगा ये सारे भ्रष्ट लोग कुछ भी नहीं करने वाले |