संसद मार्ग|2010/07/25 8:08 pm

एकछत्र शासन का घोषणापत्र- 34

34. घटनास्थल पर तुरन्त न्याय

34.1          मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग में न्यायाधीशों को नियुक्त करते हुए इन्हें न्यायिक शक्तियाँ प्रदान की जाएँगी और निम्न तीन प्रकार के मामलों में घटनास्थल पर ही अस्थायी न्यायालय स्थापित कर दोषियों को सजा देने का अधिकार इन आयोगों को दिया जाएगा- 1) महिलाओं एवं बच्चों पर अत्याचार, 2) सामाजिक आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर अत्याचार और 3) पुलिस या प्रशासन द्वारा अत्याचार।

34.2          जरुरत पड़ने पर जिला स्तर की प्रशासन एवं पुलिस व्यवस्था को भी अधिगृहित करने का विशेषाधिकार इस न्यायालय के पास होगा।

34.3          जरुरत पड़ने पर एक ज्यूरी (जिसमे सामाजिक कार्यकर्ता, मनोविज्ञानी, पुलिस अधिकारी, वकील, डॉक्टर तथा पत्रकार के रूप में छह महिला और छह पुरूष सदस्य होंगे) का भी गठन किया जाएगा।

34.4          इन अदालतों में भुक्तभोगी, अभियुक्त, चश्मदीद गवाह और स्थानीय लोगों से सीधी पूछ-ताछ की जायेगी- पेशेवर वकीलों को किसी का पक्ष नहीं रखने दिया जाएगा।

34.5          अभियुक्त नामजद न होने पर ‘अज्ञात’ दोषी के नाम सजा सुनाई जायेगी, जो अभियुक्त के पकड़े जाने या आत्म-समर्पण करने तथा दोष सिद्ध होने के बाद अपने-आप लागू हो जायेगी।

34.6          ‘फरारी’ के लिए अलग से सजा सुनाई जायेगी।

पिछले बीस वर्ष तक पुराने उपर्युक्त किस्म के मामलों की समीक्षा करने, फ़िर से सुनवाई करने और सजा देने/बढ़ाने का अधिकार भी इन दोनों आयोगों के पास होगा।

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