32. पर्यावरण
32.1 प्रदूषित घोषित किए जा चुके नगरों में कल-कारखानों के निर्माण तथा मोटर-वाहनों के पंजीकरण/स्थानान्तरण पर रोक लगा दी जायेगी, जो नगरों के प्रदूषण-मुक्त होने तक जारी रहेंगी।
32.2 चम्बल के बीहड़-जैसे बंजर भूखण्डों को विकसित कर वहाँ औद्योगिक सह रिहायशी नगर बसाए जायेंगे और प्रदूषित एवं अत्यधिक जनसँख्या दवाब वाले नगरों की औद्योगिक इकाइयों को वहाँ (पर्याप्त मुवाजे के साथ) स्थानान्तरित किया जाएगा।
32.3 नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के लिये नदियों के किनारे-किनारे दो पाईप-लाईन बिछाए जायेंगे, जिनके बीच-बीच में जरुरत के मुताबिक पम्पिंग स्टेशन होंगे- ये पाईप लाईन नगरों/महानगरों के मल-जल तथा औद्योगिक कचरे को समुद्र के किनारे स्थापित बड़े-बड़े परिशोधन संयंत्रों तक लेकर आयेंगे, जहाँ शोधन के बाद जल को समुद्र में छोड़ दिया जायेगा। (मूल रूप से यह सुझाव दिल्ली के श्री गोकुल चन्द कपूर द्वारा गंगा को प्रदुषण मुक्त करने के लिए दिया था।)
32.4 पर्वतीय, खासकर हिमालयी पर्यटन तथा तीर्थ स्थलों पर कंक्रीट निर्माण पर स्थायी रोक लगाई जाएगी और मोटर-वाहनों को इनसे कई किलोमीटर बाहर ही रोक दिया जाएगा। (पर्यटन या तीर्थ यात्रा उनके लिए होनी चाहिए, जो मीलों पैदल चलने तथा छोटे तम्बुओं, जिन्हें वे स्वयं पीठ पर लाद कर चलें, में रात गुजारने के काबिल हों। वैसे, सरकार की ओर से भी तम्बू-आवास, भोजन इत्यादि की व्यवस्था रहेगी.)
32.5 पर्यावरण, प्राकृतिक सौन्दर्य और जैव-विविधता को नुकसान पहुँचा रहे निर्माणों तथा मशीनीकरण की पहचान कर उन्हें समाप्त किया जाएगा।
32.6 नदियों को प्रवाहमयी बनाने तथा इनमे अन्तर्देशीय नौवहन फिर से चालू करने के लिए बाँधों को तोड़ा जाएगा और नदियों से गाद की सफाई की जाएगी। (पनबिजली के लिए मुख्य नदी पर बाँध बनाने के बजाय उससे नहर निकालकर या/और जलाशय बनाकर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।)
32.7 वन्य क्षेत्रों में रहने वाले और वनों से आजीविका पाने वाले समाज के युवाओं को ‘वन्य-रक्षक’ की नौकरी में प्राथमिकता दी जाएगी।
32.8 देश के अलग-अलग क्षेत्रो के प्रमुख वनों को ‘वन्य-कॉरिडोरों’ से जोड़ा जाएगा- इन कॉरिडोरों से गुजरने वाले रास्तों/रेलपथों को भूमिगत या फ्लाई-ओवर का रूप दिया जाएगा।
32.9 प्रत्येक प्रखण्ड/नगर/उप-महानगर का 33 प्रतिशत भू-भाग (पर्वतीय क्षेत्रों में 50 प्रतिशत) वृक्षारोपण के लिए चिन्हित किया जाएगा और लोगों को जन्माष्टमी के दिन घर के बच्चों तथा ब्याही गई बेटियों के हाथों वहाँ वृक्ष का पौधा रोपने और बड़े होने तक उनका देख-भाल करने के लिए कहा जाएगा। (रोपे गए पौधों का बाकायदे पंजीकरण होगा और पौधे के बड़े होने पर उसके फलों पर उस परिवार का ही अधिकार होगा- जमीन भले सरकारी हो।)
32.10 दुधारू एवं वाहक पशुओं की कत्ल पर और यंत्रचालित कत्ल-गाहों पर पाबंदी लगाई जाएगी। (बेशक, यंत्रचालित कत्लगाहों को दुग्ध-इकाईयों में बदलने के लिये अनुदान दिया जायेगा.)
32.11 क्रमांक 21.1 में लाचार एवं बे-सहारा लोगों के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा (सरकार के सहयोग से) आश्रयों की श्रृंखला कायम करने की बात कही गयी है, इन्हीं आश्रमों के साथ गौशाला सह पशु अस्पताल भी बनवाये जायेंगे, जहाँ बीमार एवं बूढ़े पशुओं को बाकायदे खरीदकर रखा जाएगा और उनकी सेवा की जाएगी।
32.12 प्रकृति में क्षय होने लायक प्लास्टिक की खोज होने तक प्लास्टिक की थैलियों के निर्माण पर प्रतिबन्ध लगाया जायेगा और इसके स्थान पर सूती ‘स्टॉकिनेट’ (बनियान के जैसे जालीदार कपड़े) के थैलों को प्रचलन में लाया जायेगा.
32.13 ग्रीन हाउस गैसों को बढ़ाने वाले उद्योगों तथा उपकरणों की संख्या पहले स्थिर की जाएगी, बाद में इनमे कमी लायी जाएगी- इनके स्थान पर प्रकृति-मित्र विकल्पों का विकास किया जा सकता है।
32.14 विकास के नाम पर या किसी भी नाम पर सरकार जनता को विस्थापित नही करेगी, उलटे विस्थापित लोगों को उनके मूल निवास स्थान पर बसाने की कोशिश करेगी।
