31. भाषा
31.1 देश की जिन क्षेत्रीय भाषाओँ की अपनी सुगठित लिपियाँ हैं, उन सबको उप राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाएगा। (जाहिर है, हिन्दी राष्ट्रभाषा होगी।)
31.2 राष्ट्रीय (केन्द्रीय) सरकार अपने कार्य राष्ट्रभाषा में करेगी और उप राष्ट्रभाषाओँ में उनके अनुवाद जारी करेगी।
31.3 हिन्दी भाषी राज्य अपने कार्य हिन्दी में करेंगे और राज्य की दूसरी प्रमुख भाषा में उनके अनुवाद जारी करेंगे।
31.4 अहिन्दी भाषी राज्य अपने कार्य राज्य भाषा में करेंगे और इनका अनुवाद राज्य की दूसरी प्रमुख भाषा में तथा राष्ट्र-भाषा जारी करेंगे।
31.5 अन्तर्राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी का प्रयोग होगा और इनका अनुवाद सम्बंधित देश की राष्ट्रभाषा अथवा अंग्रेजी में जारी किया जाएगा।
31.6 उपर्युक्त नीतियों को लागू करने के लिए बड़ी संख्या में अनुवादकों की आवश्यकता होगी- यह भी रोजगार का एक अवसर पैदा करेगा।
31.7 देश की राष्ट्रभाषा और उप-राष्ट्र-भाषाओँ का आपस में अनुवाद आसानी से हो सके- ऐसी कम्प्यूटर तकनीक विकसित करने के लिए विशेषज्ञों को प्रेरित किया जाएगा।
31.8 हिन्दी को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय रूप देने के लिए अन्यान्य भारतीय/गैर-भारतीय भाषाओँ से प्रचलित शब्दों को ज्यों-के-त्यों या थोड़े बदलाव के साथ हिन्दी में शामिल करने के लिए भाषाविदों की बाकायदे एक समिति गठित की जाएगी।
31.9 राष्ट्रभाषा के रूप में जिस हिन्दी का प्रयोग होगा, उसमे लगभग दस प्रतिशत तक अंग्रेजी एवं अन्यान्य गैर-भारतीय भाषाओँ के शब्द और तीस प्रतिशत तक उर्दू एवं अन्यान्य भारतीय भाषाओँ के शब्द प्रयोग किए जा सकेंगे।

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