कांग्रेस और भाजपा, भारतीय राजनीति के दो ध्रुवांत एक साथ कैसे हो सकते हैं? परन्तु ऐसा ही हुआ है। एक नहीं दो-दो मसलो पर इनका बयान लगभग एक जैसा है। शाहरूख-शिवसेना विवाद में जहां दोनों राष्ट्रीय दल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं वहीं “बाटला हाउस मुद्दे” के संदर्भ में इमाम बुखारी के बयान को दोनों ने भारतीय संविधान के विरूद्ध और राष्ट्र द्रोही बताया है।
दरअसल शाही इमाम बुखारी पिछलों दिनों बाटला कांड के आरोपी युवकों के घर मिलने गए थे। अपने भड़काउ भाषण के दौरान इमाम बुखारी ने केंद्र और उत्तरप्रदेश सरकार को आतंकवादी सरकार की संज्ञा दे डाली। हांलाकि मीडिया ने अबतक बुखारी के बयान को प्रमुखता नहीं दी है।
इमाम के इस जनादेश विरोधी कथन के मुद्दे पर भाजपा के साथ कांग्रेस ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि मौलाना की गैर जिम्मेदाराना हरकत देश -विदेश में भारत की छवि धूमिल करने और शत्रु राष्ट्रो की मदद करने जैसा है। कांग्रेस सदस्य प्रमोद तिवारी ने इस मामले को संविधान के औचित्य का प्रष्न बताया।
भाजपा के विधायक हुकुम सिंह ने कहा, देश को बुखारी के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। सैकड़ो मुसलमानों ने देश की रक्षा के लिए कुर्बानियां दी है लेकिन बुखारी जैसे लोग कभी उनके घरों की ओर ताकते भी नहीं बहरहाल, दोनों मामले में कांग्रेस की भूमिका नैतिकता के परे दिखाई देती है। कांग्रेस बस बयानबाजी से काम चलाना चाहती है।
कंग्रेसी नेता दिगविजय सिंह संजरपुर में जाकर ÷बाटला हाउस कांड’ पर आंसू बहाते समय भूल जाते है कि उक्त कांड के दौरान उन्हीं का राज काज था। शिवसेना के गैरलोकतांत्रिक रवैये को गलत बताते हुए भी कांग्रेस भूल जाती है कि आज भी केंद्र और राज्य में उन्हीं की सरकार है और ऐसे मामलो से निबटने की जिम्मेदारी उनकी ही है।
कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस अपने कर्तव्य हीनता को चिकनी चुपड़ी बातों से ढ़ंकना चाहती है। भाजपा से संग सुर में सुर मिला कर दुखड़ा गाने से बेहतर है कि सरकार में बैठे लोग कुछ कदम उठाएं।


कांग्रेस और भाजपा का साथ देखकर अच्छा लगा, वैसे देश हित के मुद्दे पर दोनों को हरवक्त साथ ही होना चाहिए, स्वार्थ में आकर देश का नुकसान करने वाली पार्टियो को चिन्हित करना भी जरुरी है.