14. पाँच अँचल: पैंतालीस राज्य
14.1
जनता की माँग को ध्यान में रखते हुए बड़े और मँझोले आकार के राज्यों को दो, तीन या चार राज्यों में विभाजित करते हुए देश में कुल 45 राज्यों का गठन किया जायेगा.
14.2 फिर एक क्षेत्र के 9 राज्यों को मिलाकर एक अँचल का गठन किया जायेगा- इस प्रकार, देश में कुल 5 अँचल बनेंगे- उत्तराँचल, दक्षिणाँचल, उत्तर-पूर्वाँचल, पश्चिमाँचल और मध्याँचल.
14.3 आगे एक राज्य में 9 जिले, एक जिले में 9 प्रखण्ड, एक प्रखण्ड में 9 थाने तथा एक थाने में कई पँचायतों का गठन किया जायेगा. (9 की संख्या यहाँ सिर्फ इसलिये है कि नागरिकों को जारी होने वाले पहचानपत्रों (अध्याय:44) को नम्बर देते वक्त एक-एक अंक से धारक के अँचल, जिले, प्रखण्ड और थाने की पहचान हो सके.)
14.4 महानगरों को जिले के; नगरों/उपमहानगरों को प्रखण्ड के, और वार्डों को पँचायत के समतुल्य माना जायेगा.
14.5 अँचल एक अँचलपाल के अधीन रहेगा, जो दोहरी भूमिका निभायेंगे- देश के लिये उपराष्ट्रपति की तथा अँचल के अन्तर्गत आने वाले नौ राज्यों के लिये ‘राज्यपाल’ की. (इस प्रकार, देश में कुल 5 उपराष्ट्रपति तथा 9 राज्यों पर एक राज्यपाल हुआ करेंगे.)
14.6 अँचल एक सांस्कृतिक इकाई होगी, न कि राजनीतिक; और देश के सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम अँचलपाल के माध्यम से सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से सहयोग लेते हुए लागू किये जायेंगे.
14.7 अँचलपालों की नियुक्ति तीन चरणों में होगी- पहले चरण में अँचल के सभी सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन सर्वसम्मति से 5 वरिष्ठ एवं सम्मानित नागरिकों के नाम प्रस्तावित करेंगे; दूसरे चरण में अँचल के नौ मुख्यमंत्री आम सहमति से इन पाँच में से तीन नाम अनुमोदित करेंगे, और तीसरे तथा अन्तिम चरण में प्रधानमंत्री की सलाह पर इन तीन में से एक को राष्ट्रपति महोदय सम्बन्धित अँचल का अँचलपाल (5 वर्षों के लिये) नियुक्त करेंगे.
14.8 पाँचों अँचलपाल यानि उपराष्ट्रपति मिलकर एक ‘राष्ट्रीय पँचायत’ का गठन करेंगे, जिसमें राष्ट्रपति की उपस्थिति ‘सरपँच’ के रुप में होगी- यह पँचायत देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूति प्रदान करने के लिये और नागरिकों को एक-दूसरे की संस्कृति से परिचित कराने के लिये जरुरी निर्णय लेगी.
14.9 रक्षा, मुद्रा, विदेश तथा संचार- ये चार विषय राष्ट्रीय सरकार के पास, समाज एवं संस्कृति अँचलों के पास तथा बाकी सभी विषय राज्यों के पास रहेंगे. (बेशक, ‘समवर्ती सूची’ कायम रहेगी और राज्य कुछ विषयों को राष्ट्रीय सरकार को हस्तान्तरित कर सकेंगे.)
14.10 राज्यों को राज्यभाषा, राज्यचिन्ह, राज्यध्वज, राज्य संविधान (भारतीय संविधान के दायरे में) बनाने की छूट दी जायेगी- हाँ अँग्रेजी भाषा/रोमन लिपि को किसी राज्य की राज्यभाषा बनाने की छूट नहीं होगी.
14.11 राज्यों के कायदे-कानून आपस में लगभग एकरुप रहें और राष्ट्रीय कायदे-कानूनों के साथ भी भरसक उनकी एकरुपता बनी रहे, यह देखने के लिये राष्ट्रीय सरकार में बाकायदे एक ‘समन्वय विभाग’ का गठन किया जायेगा.
राष्ट्रीय सरकार द्वारा पिछ्ड़े राज्यों को आर्थिक मदद दी जायेगी, आपदा-विपत्ती के समय किसी भी राज्य को यह मदद दी जायेगी, मगर लगातार तीसरे वर्ष घाटे का बजट पेश करने वाली राज्य सरकार को- बेशक, अँचलपाल की सिफारिश पर- बर्खास्त कर वहाँ (अगले विधानसभा चुनाव तक) राष्ट्रीय शासन लागू कर दिया जायेगा.
