Author: जयदीप शेखर
राजमहल की नीली पहाड़ियों की तलहटी में बसे छोटे-से जिन्दादिल कस्बे बरहरवा (जिला- साहेबगंज, सन्थाल-परगना, झारखण्ड) का मैं वासी हूँ। युवावस्था मेरी भारतीय वायु सेना में (वायुसैनिक के रुप में) बीती। फिलहाल भारतीय स्टेट बैंक में (सहायक के रुप में) कार्य करते हुए मैं बिहार के कोशी अँचल स्थित अररिया में हूँ।
यूँ तो रेखाचित्र-छायाचित्र-शब्दचित्र, तीनों मेरे शौक रहे हैं, मगर फिलहाल मैं सिर्फ शब्दचित्र से ही काम चला रहा हूँ। मौका मिलने पर घूमना, तैरना तथा पहाड़ियों पर बे-मकसद भटकना भी मुझे पसन्द है।
मेरे स्वभाव के बारे में अनुमान लगाने के लिए वॉल्टर बेघाट की यह उक्ति पर्याप्त होनी चाहिए- "सबसे बड़ा सुख उस काम को करने में है, जिसके बारे में लोग यह मानते हों कि आप उसे नहीं कर सकते।"