कभी-कभी पी. चिदंबरम भारत के गृह मंत्री कम, अमेरिका के वकील ज्यादा लगते हैं। वैसे शायद वे भारत के एकमात्र ऐसे राजनीतिज्ञ हैं, जो अपनी बात को टो-टूक शब्दों में कहते हैं। वे अपनी कही बात में निहितार्थ, गूढार्थ और भावार्थ ढूंढने की गुंजाइश कम ही मौकों पर छोडते हैं, क्योंकि वे जो कहते हैं, उसका अर्थ भी सपाट होता है। बिलकुल दीवार पर लिखी हुई इबारत के समान, पर दुर्भाग्य से वे जब अमेरिका के मामले में बोलते हैं, तब ऐसा नहीं होता। फिलहाल, असमंजस इस पर कायम है कि क्या अमेरिका भारत को उस डेविड कोलमैन हेडली उर्फ तहब्बुर हुसैन राणा से पूछताछ करने की इजाजत देगा भी? जिसने हाल ही में एक अमेरिकी अदालत में अपने ऊपर लगे उन सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है, जो भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26 नवंबर-2008 को हुए आतंकी हमलों के संदर्भ में उस पर लगाए गए थे।
बता दें कि हेडली द्वारा गुनाह कबूल कर लिए जाने के बाद अमेरिकी अटॉर्नी एरिक होल्डर ने कहा था कि भारत चाहे तो हेडली से पूछताछ कर सकता है। इसके बाद हमारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पूछताछ की तैयारियां भी चालू कर दीं। इसी का खाका बनाने हेतु चिदंबरम भी अमेरिका गए हुए हैं , पर उधर उन्होंने अमेरिका के लिए उडान भरी, इधर भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे रोमर कहने लगे कि अमेरिका ने अभी इस विषय में कोई निर्णय नहीं लिया कि भारत को हेडली से पूछताछ करने दी जाए अथवा नहीं। जब रोमर का यह बयान आया, तब चिदंबरम लंदन में थे। वहां के एक टीवी चैनल ने उनसे जब इस विषय में पूछा, तो उन्होंने ऐसी गोलमोल बातें कहीं कि उनका अर्थ ढूंढते रह जाओगे। चिदंबरम बोले कि रोमर का बयान ध्यान से पढें, तो पता चलेगा कि वह होल्डर के पुराने बयान के विपरीत नहीं है। जबकि होल्डर ने जो कहा था, उसका अर्थ भी साफ था कि भारत हेडली से पूछताछ कर सकता है और अब रोमर ने जो कहा है, उसका अर्थ भी स्पष्ट है कि अभी अमेरिका तय नहीं कर पाया कि भारत को हेडली से पूछताछ करने देनी है या नहीं। फिर भी, चिदंबरम कह रहे हैं कि रोमर के बयान को ध्यान से पढें। यानी, अमेरिका भारत को हेडली से पूछताछ करने की इजाजत देने से मुकर गया है, तो भी चिदंबरम ने उसी की वकालत की। चिदंबरमजी! ध्यान से पढने से न शब्द बदलते हैं, न उनके अर्थ और हां, राजदूत एक ऐसा तोता होता है, जो उतना ही बोलता है,जितना उसकी सरकार बुलवाती है। अतः अमेरिका की बदनीयत पर पर्दा मत डालो।
कभी-कभी पी. चिदंबरम भारत के गृह मंत्री कम, अमेरिका के वकील ज्यादा लगते हैं। वैसे शायद वे भारत के एकमात्र ऐसे राजनीतिज्ञ हैं, जो अपनी बात को टो-टूक शब्दों में कहते हैं। वे अपनी कही बात में निहितार्थ, गूढार्थ और भावार्थ ढूंढने की गुंजाइश कम ही मौकों पर छोडते हैं, क्योंकि वे जो कहते हैं, उसका अर्थ भी सपाट होता है। बिलकुल दीवार पर लिखी हुई इबारत के समान, पर दुर्भाग्य से वे जब अमेरिका के मामले में बोलते हैं, तब ऐसा नहीं होता। फिलहाल, असमंजस इस पर कायम है कि क्या अमेरिका भारत को उस डेविड कोलमैन हेडली उर्फ तहब्बुर हुसैन राणा से पूछताछ करने की इजाजत देगा भी? जिसने हाल ही में एक अमेरिकी अदालत में अपने ऊपर लगे उन सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया है, जो भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26 नवंबर-2008 को हुए आतंकी हमलों के संदर्भ में उस पर लगाए गए थे।
बता दें कि हेडली द्वारा गुनाह कबूल कर लिए जाने के बाद अमेरिकी अटॉर्नी एरिक होल्डर ने कहा था कि भारत चाहे तो हेडली से पूछताछ कर सकता है। इसके बाद हमारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पूछताछ की तैयारियां भी चालू कर दीं। इसी का खाका बनाने हेतु चिदंबरम भी अमेरिका गए हुए हैं , पर उधर उन्होंने अमेरिका के लिए उडान भरी, इधर भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे रोमर कहने लगे कि अमेरिका ने अभी इस विषय में कोई निर्णय नहीं लिया कि भारत को हेडली से पूछताछ करने दी जाए अथवा नहीं। जब रोमर का यह बयान आया, तब चिदंबरम लंदन में थे। वहां के एक टीवी चैनल ने उनसे जब इस विषय में पूछा, तो उन्होंने ऐसी गोलमोल बातें कहीं कि उनका अर्थ ढूंढते रह जाओगे। चिदंबरम बोले कि रोमर का बयान ध्यान से पढें, तो पता चलेगा कि वह होल्डर के पुराने बयान के विपरीत नहीं है। जबकि होल्डर ने जो कहा था, उसका अर्थ भी साफ था कि भारत हेडली से पूछताछ कर सकता है और अब रोमर ने जो कहा है, उसका अर्थ भी स्पष्ट है कि अभी अमेरिका तय नहीं कर पाया कि भारत को हेडली से पूछताछ करने देनी है या नहीं। फिर भी, चिदंबरम कह रहे हैं कि रोमर के बयान को ध्यान से पढें। यानी, अमेरिका भारत को हेडली से पूछताछ करने की इजाजत देने से मुकर गया है, तो भी चिदंबरम ने उसी की वकालत की। चिदंबरमजी! ध्यान से पढने से न शब्द बदलते हैं, न उनके अर्थ और हां, राजदूत एक ऐसा तोता होता है, जो उतना ही बोलता है,जितना उसकी सरकार बुलवाती है। अतः अमेरिका की बदनीयत पर पर्दा मत डालो।
Author: सुमित श्रीवास्तव
पाटलिपुत्र के मूल निवासी हैं| पत्रकारिता और सामाजिक में गहरी रूचि होने के कारण छात्र जीवन से ही दोनों क्षेत्रों में सक्रिय हैं| इंजीनियरिंग करने के बाद एनिमेसन में पढाई की है| वर्तमान में सुमीत श्रीवास्तव www.janokti.com के उप-संपादक हैं| www.rashtriyaswabhimaan.org के हिंदी संस्करण के प्रधान संपादक है, और साथ में लोकतंत्र दर्पण के संपादक का दायित्व है|
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