इस समय भारत में जो आन्दोलन चल रहा है भारत के स्वाभिमान के लिए;”भारत स्वाभिमान आदोलन” मुझे तो लगता है कि सम्पूर्ण बुराईयों के विरुद्ध ऐसा जन आन्दोलन आदि शंकराचार्य के बाद शायद; अब ही हो रहा है। “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्रनिर्माण”की भावना पर बीच में स्वामी विवेकानंद और स्वामी दयानंद सरस्वती के साथ ही महर्षि अरविन्द और स्वामी श्रद्धानंद के द्वारा भी आन्दोलन चला पर इतनी जन व्यापकता नहीं पा सका।
लेकिन; इस सबसे व्यापक जनाधार वाले आन्दोलन के शत्रु भी कम नहीं । आखिर विरोध करने में कोई बुराई नहीं छोड़ी स्वामी रामदेव जी ने, बिना शत्रुओं की परवाह किये अपने उद्देश्य की पूर्ति में बढ़ते रहे हैं। यही कारण है कि सदस्यों और अनुयायियों की संख्या बेशक करोड़ों में है पर शत्रुओं की संख्या भी कम नहीं है। १.राजनैतिक शत्रु ( लगभग सभी पार्टियाँ और उनके नेता और कार्यकर्त्ता ),२.शैक्षिक माफिया, क्योंकि स्वामीजी शिक्षा मुफ्त-अंग्रेजी बाध्यता मुक्त करने की बात कहते हैं,३. लगभग सभी सरकारें और उनके भ्रष्ट कर्मचारी,४. बहुराष्ट्रीय कम्पनियां और उनके द्वारा पालित-पोषित; जिनमे टी.वी.न्यूज (अन्य भी) चैनल और,५. अंग्रेजी दवा कम्पनियां सभी प्रकार की (स्वदेशी-विदेशी),६. वो स्वदेशी उत्पाद बनाने वाली कम्पनियां भी दुश्मन हैं जो केवल ठगने के लिए अपने धंधे को जमाये बैठी थी,७. वो विदेशी ४००० से अधिक कम्पनियां जो आज भारत में विभिन्न प्रकार के जीरो तकनीक के सामान के द्वारा यहाँ कई प्रकार से लूट रहीं हैं जैसे कोला पिलाओ बीमार बनाओ-दवाएं खिलवाओ-कमजोरी के नाम से टॉनिक पिलवाओ,एक चक्र बना दिया,८. वो नशा व्यापारी; शराब माफिया,गुटका माफिया,बीडी-सिगरेट माफिया और भी हैं,९. भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी,व्यापारी,पत्रकार और सभी पेशेवर भ्रष्ट;यहाँ तककि; एक छोटा सा दुकानदार भी अगर बुरा है तो दुश्मन बना बैठा है,१०. विदेशी बैंक और , चिकित्सा माफिया। ये कुछ मुख्य-मुख्य दुश्मनों को मैंने गिनवाया अगर इन की व्याख्या की जाये और इन पर आश्रित भ्रष्टों को पहचाना जाये तो संख्या कई करोड़ हो जाएगी।
जो भारत को अपनी माता के रूप में देखता है, वास्तव में देशभक्त है, जिसके शारीर में शुद्ध भारतीय खून है, जो अपने को ऋषियों का वंशज समझता है, उसका हौसला इन दुश्मनों को देख कर कम नहीं होता। वह और जोश से उठता है चलो कुछ और दुश्मनों की पहचान हुयी।

