दक्षिणावर्त|Shortlink: 2009/08/21 7:03 am

योगगुरु रामदेव के कथन पर संतों का भड़कना सनातन धर्म का तालिबानीकरण

4 Comments

  • aapka aalekh bahut hi vicharniy hai iske liye badhayi .

  • बाबा रामदेव और साधु संत दोनों का अधिकार है कि वे अपनी अपनी बात कहें. सादगी भरे भारत में चार्वाक के दर्शन, यावत जीवेत सुखम जीवेत, ऋणम कृत्वा घृतम पिबेत ने कितना तहलका मचाया होगा. आगे भी होगा. होता रहेगा. आलोचक साधु बाबाओं ने हिंदू धर्म को क्या दिया है और उन्हें कौन जानता है. बाबा रामदेव को तो सब जानते हैं और उन्होंने व्यक्ति को स्वस्थ जीने का मार्ग बतलाया है. केवल उबलते रहना ही ठीक नहीं है. साधु-संतो समाज को कुछ देना भी सीखो.

  • very nice , thought provoking article !

  • कुछ लोगो के मन में ये भर गया ही की जो संत है जब तक मिडिया चैनलों के समक्ष न रहे और उपरी चमक दमक न दिखाए वे संत नहीं है यदि आप सनातन धर्म की सबसे बरी खाशियत यही रही इसमें सभी लोगो के विचारों को लोग सुनते हैं पर यदि कोई किसी के विचारों से असहमत है तो उसे झुकाना या नीचा दिखाना शक्ति के आधार पर ये गलत है जो लोग ऐसा करते हैं वे निश्चित रूप से तयाग्य हैं
    मै तो कहता हूँ पुरे भारत में इस समय उत्पन्न सभी संतों को आपस में शास्त्राथ कर लेना चाहिए

Leave a Reply