बलात्कार की शिकार लड़की को 200 कोड़े मारने की सजा
जेद्दाह में एक सऊदी अदालत ने पिछले साल सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की को 90 कोड़े मारने की सजा दी थी। उसके वकील ने इस सजा के खिलाफ अपील की तो अदालत ने सजा बढ़ा दी और हुक्म दिया: ’200 कोड़े मारे जाएं।’ लड़की को 6 महीने कैद की सजा भी सुना दी। अदालत का कहना है कि उसने अपनी बात मीडिया तक पहुंचाकर न्याय की प्रक्रिया पर असर डालने की कोशिश की। कोर्ट ने अभियुक्तों की सजा भी दुगनी कर दी। इस फैसले से वकील भी हैरान हैं। बहस छिड़ गई है कि 21वीं सदी में सऊदी अरब में औरतों का दर्जा क्या है? उस पर जुल्म तो करता है मर्द, लेकिन सबसे ज्यादा सजा भी औरत को ही दी जाती है।
बेटी से निकाह कर उसे गर्भवती किया
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में एक व्यक्ति ने सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए अपनी सगी बेटी से ही शादी कर ली और उसे गर्भवती भी कर दिया है। यही नहीं , वह इसे सही ठहराने के लिए कहा रहा है कि इस रिश्ते को खुदा की मंजूरी है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि इस निकाह का गवाह कोई और नहीं खुद लड़की की मां और उस शख्स की बीवी थी। जलपाईगुड़ी के कसाईझोरा गांव के रहने वाले अफज़ुद्दीन अली ने गांव वालों से छिपाकर अपनी बेटी से निकाह किया था इसलिए उस समय किसी को इस बारे में पता नहीं चला। अब छह महीने बाद लड़की गर्भवती हो गई है ।
मस्जिद में नमाज अदा करने पर महिलाओं को मिला फतवा
असम के हाउली टाउन में कुछ महिलाओं के खिलाफ फतवा जारी किया गया क्योंकि उन्होंने एक मस्जिद के भीतर जाकर नमाज अदा की थी। असम के इस मुस्लिम बाहुल्य इलाके की शांति उस समय भंग हो गई , जब 29 जून शुक्रवार को यहां की एक मस्जिद में औरतों के एक समूह ने अलग से बनी एक जगह पर बैठकर जुमे की नमाज अदा की। राज्य भर से आई इन महिलाओं ने मॉडरेट्स के नेतृत्व में मस्जिद में प्रवेश किया। इस मामले में जमाते इस्लामी ने कहा कि कुरान में महिलाओं के मस्जिद में नमाज पढ़ने की मनाही नहीं है। जिले के दीनी तालीम बोर्ड ऑफ द कम्युनिटी ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि इस तरीके की हरकत गैरइस्लामी है। बोर्ड ने मस्जिद में महिलाओं द्वारा नमाज करने को रोकने के लिए फतवा भी जारी किया।
कम कपड़े वाली महिलाएं लावारिस गोश्त की तरह
एक मौलवी के महिलाओं के लिबास पर दिए गए बयान से ऑस्ट्रेलिया में अच्छा खासा विवाद उठ खड़ा हुआ है। मौलवी ने कहा है कि कम कपड़े पहनने वाली महिलाएं लावारिस गोश्त की तरह होती हैं , जो ‘ भूखे जानवरों ‘ को अपनी ओर खींचता है। रमजान के महीने में सिडनी के शेख ताजदीन अल-हिलाली की तकरीर ने ऑस्ट्रेलिया में महिला लीडर्स का पारा चढ़ा दिया। शेख ने अपनी तकरीर में कहा कि सिडनी में होने वाले गैंग रेप की वारदातों के लिए के लिए पूरी तरह से रेप करने वालों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 500 लोगों की धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए शेख हिलाली ने कहा , ‘ अगर आप खुला हुआ गोश्त गली या पार्क या किसी और खुले हुए स्थान पर रख देते हैं और बिल्लियां आकर उसे खा जाएं तो गलती किसकी है , बिल्लियों की या खुले हुए गोश्त की ?’
कामकाजी महिलाएं पुरुषों को दूध पिलाएं
काहिरा : मिस्र में पिछले दिनों आए दो अजीबोगरीब फतवों ने अजीब सी स्थिति पैदा कर दी है। ये फतवे किसी ऐरे-गैरे की ओर से नहीं बल्कि देश के टॉप मौलवियों की ओर से जारी किए जा रहे हैं।
देश के बड़े मुफ्तियों में से एक इज्ज़ात आतियाह ने कुछ ही दिन पहले नौकरीपेशा महिलाओं द्वारा अपने कुंआरे पुरुष को-वर्करों को कम से कम 5 बार अपनी छाती का दूध पिलाने का फतवा जारी किया। तर्क यह दिया गया कि इससे उनमें मां-बेटों की रिलेशनशिप बनेगी और अकेलेपन के दौरान वे किसी भी इस्लामिक मान्यता को तोड़ने से बचेंगे।
गले लगाना बना फतवे का कारण
इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के धर्मगुरुओं ने पर्यटन मंत्री नीलोफर बख्तियार के खिलाफ तालिबानी शैली में एक फतवा जारी किया है और उन्हें तुरंत हटाने की मांग की है। बख्तियार पर आरोप है कि उन्होंने फ्रांस में पैराग्लाइडिंग के दौरान अपने इंस्ट्रक्टर को गले लगाया। इसकी वजह से इस्लाम बदनाम हुआ है।
ससुर को पति पति को बेटा
एक फतवा की शिकार मुजफरनगर की ईमराना भी हुई। जो अपने ससुर के हवश का शिकार होने के बाद उसे आपने ससुर को पति ओर पति को बेटा मानने को कहा ओर ऐसा ना करने पे उसे भी फतवा जारी करने की धमकी मिली।
फतवा क्या है
जो लोग फतवों के बारे में नहीं जानते, उन्हें लगेगा कि यह कैसा समुदाय है, जो ऐसे फतवों पर जीता है। फतवा अरबी का लफ्ज़ है। इसका मायने होता है- किसी मामले में आलिम ए दीन की शरीअत के मुताबिक दी गयी राय। ये राय जिंदगी से जुड़े किसी भी मामले पर दी जा सकती है। फतवा यूँ ही नहीं दे दिया जाता है। फतवा कोई मांगता है तो दिया जाता है, फतवा जारी नहीं होता है। हर उलमा जो भी कहता है, वह भी फतवा नहीं हो सकता है। फतवे के साथ एक और बात ध्यान देने वाली है कि हिन्दुस्तान में फतवा मानने की कोई बाध्यता नहीं है। फतवा महज़ एक राय है। मानना न मानना, मांगने वाले की नीयत पर निर्भर करता है।


और सभी फतवे रोजेदारों ने दिए हैं ……………………………..
अल्लाह इनको जरुर ज़न्नत बख्श देगा ( कीडे पड़ेंगे इनको )|
आमीन ||
muje samajh hi nahi aata ki is tarah ke Fatve padhkar kya reyect kiya jaye ye kaise log hain jo kisi or ke jurm ki saja kisi or ko dete hain galti bhi tum karo sazaa b tum hi do ye kahaa ka insaaf hai…
ladkiya kam kapde pahankar nikli hai matlb aapke baap ki property ho gyi hain k jaisi marji behave aap unke sath karo or phir ilzaam bhi unko hi do…..
ek office me kaam kar rahe hain to dono ke bich sambandh na ho jaye isliye Mahilaaye Un-married ladko ko apna dudh pilaye isme kya guarrenty hai k wo beta bankar hi dudh pi raha hai ……….kya us samay wo dimag me kya soch raha hai aap jaante hain???
Sasur apni beti ki umar ki bahu ke sath balaatkaar karta hai to aap sasur ko uska pati bana do or pati ko beta ye kya matlb hai?? sasur se pahle pati ke sath b tho wo sambandh bana chuki hai dil se, man se usko pati maanti hai Sasur ki jabardasti ke kaaran uski galti ki ajeh se wo apne sab rishte khatam kar de…..apne pati ko beta bana de or Sasur ko aap kuch na kaho
agar ye fatwa sirf ek raay b hai tab b kisi ko koi hak nahi hai ki kisi or ki life me kya hai kya nahi hai or kya hona chaiye wo decide kare..
इस्लाम ने नारी को तो बहोत बडा दरज्जा दिया है। उसकी मंजुरी के बिना निकाह भी कुबुल नहि किया जा सकता। यहां तक की मांबाप के भी अपनी मिल्कीयत में उसको हिस्सेदारी देनी होती है। हर औरत अपने इंन्साफ़ की हक़्दार होती है। ये तो नबी (स.अ.व.) के ज़माने से चला आया है।
ये बन बैठे ठेकेदारों ने इस्लाम को "फ़तवा" का नाम देकर बदनाम करने की कोशिश की है। पर हर मुस्लिम इन के "फ़तवों" को कोइ तवज्जो नहिं देते।
ये बन बैठे ठेकेदारों ने इस्लाम को "फ़तवा" का नाम देकर बदनाम करने की कोशिश की है। पर हर मुस्लिम इन के "फ़तवों" को कोइ तवज्जो नहिं देते।
sach kaha hai aapne ! kuchh log hain jo apne man ki baton ko dusron par islam ke nam se thopne ki koshish karte hain ………..ek bat yah bhi hai samaj ka ek bada warg inke chungul mein fansa hua hai ……………
धार्मिक ठेकेदारी एक बड़ी दूकानदारी है हमारे कानून्दा क्या कहते हैं इस बारे में एक देश में दो कानून तो नहीं चल सकते
rajiya raj ji aap meri chhoti bahan bhi ho sakti hain or badi bhi . aap ne islaam ke baare me orton ke baare me jikr kiya hai , to me aapko bata doon ki islaam me orton ke liye vaasna se adhik kuchh nahi hai. me hindu jaroor hoon,lekin mene hindu granthon se jyada muslim granth padhe hain. ek vyakti 50 saal se upar ki umar me 6 varsh ki ladki se nikaah kare ,iske aage ab bhi kuchh kahun, kahne ko bahut hai,lekin maryada rokti hai.
Fatwa जरी करना आज के लोगों का फैसन बन गया है यह hamara दुरभाग्य है की हम स्वतंत्र हो कर bhee स्वतंत्र नहीं hain